
शहडोल में
20 जून को आध्यात्मिक क्षेत्र में 100 वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया इतिहास प्रारंभ होगा जब भगवान जगन्नाथ स्वामी, देवी सुभद्रा और भगवान बलराम की रथयात्रा, दो रथ यात्राएं शहर में भ्रमण करेंगी।
अभी तक शहडोल में पिछले करीब सौ वर्ष से जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा संत पुरुष मोहनराम पांडे द्वारा स्थापित मोहन राम मंदिर जो वर्तमान में श्री रघुनाथ जी राम जानकी शिव पार्वती मोहन राम मंदिर ट्रस्ट के अधीन संचालित है उस से प्रारंभ होकर अक्सर गंतव्य स्थान पंचायती मंदिर तक ही जाती थी। और वहां 3 दिन प्रवास पश्चात वापस मोहन राम मंदिर में श्री विग्रह स्थापित हो जाते थे।
शहर के नागरिक इस भव्य समारोह में शामिल होकर अहोभाग्य मानते रहे हैं अब 20 जून को अंतरराष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संग्रह संघ (इस्कॉन ) द्वाराकी शहडोल इकाई द्वारा घरोला मोहल्ला से प्रारंभ होकर शहर का भ्रमण करेगी।
सूत्रों के अनुसार इस बाबत प्रयास किए गए थे कि मोहन राम मंदिर से दोनों रथ यात्राएं साथ में निकले और अपने अपने गंतव्य स्थान पर चली जाएं किंतु गैर कानूनी तरीके से मंदिर के अंदर कब्जा करके रह रहे कतिपय लोगों द्वारा जो स्वयं को भ्रामक तरीके से मंदिर प्रबंधक बताते हैं उनके भ्रम में आकर ऐसी परिस्थितियां बनी की दोनों रथ यात्राएं एक ही मार्ग से कुछ दूर तक अलग अलग तरीके से चलेंगी और इसके पश्चात गंतव्य को प्राप्त हो जाएंगी।
इस्कान के सूत्रों के अनुसार 20 जून को रथयात्रा समारोह मंगलवार कोकरीब 3:00 बजे इस्कॉन सेंटर घरौला मोहल्ला से शंख ध्वनि, वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ भगवान श्री श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा का शुभारंभ होगा और सुंदर रंगीन जुलूस हरि नाम संकीर्तन के साथ शिव तिराहा से प्रारंभ होकर गुरुनानक चौक, सूर्या होटल, गांधी चौक, जयस्तंभ चौक से होते हुए बाणगंगा बाईपास होते हुए न्यू बस स्टैंड, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से वापस बुढार चौराहा, सिहपुर रोड रेलवे कॉलोनी की मिलन समिति काली मंदिर रेलवे ग्राउंड के पास रथ यात्रा का समापन होगा। जहां पर करीब 9 दिन गुंडिचा मंदिर मशीन बाड़ी में प्रतिदिन नियमित कार्यक्रम सन्यासी ब्रह्मचारी व अन्य भक्तों द्वारा किया जाएगा ।
जबकि करीब 100 वर्षों से परंपरागत तरीके से निकलने वाली
श्री मोहन राम मंदिर की जगन्नाथ स्वामी जी की रथ यात्रा 2:00 बजे के आसपास निकल कर, गणेश मंदिर , इंदिरा चौक स्थित पहुंचेगी और फिर वापस गुरुनानक चौक होते हुए कमिश्नर बांग्ला के पास से जय स्तंभ चौक के लिए रवाना होगी। जहां से वापस होकर रथ यात्रा गांधी चौक और बाजार तथा परमट होते हुए वापस श्री पंचायती मंदिर शहडोल में 3 दिन प्रवास पर रहेगी।
इन दोनों रथ यात्राओं का संगम संभवत नहीं होगा क्योंकि समय अलग-अलग है किंतु यदि टाइमिंग की गड़बड़ी हुई तो दोनों रथ यात्राएं एक साथ सूर्या होटल से जय स्तंभ चौक तक जा सकती हैं। बहरहाल शहडोल के इतिहास में और उसके विकास क्रम में 20 जून को आध्यात्मिक क्षेत्र में यह बड़ा परिवर्तन होगा जब जगन्नाथ स्वामी जी का रथ यात्रा एक की बजाए दो रथ यात्राएं शहडोल में आनंद का बहार करेंगे। इसके पहले भी जगन्नाथ स्वामी जी के श्री विग्रह श्री रघुनाथ जी मोहन राम मंदिर में ही स्थापित रही तत्पश्चात रेलवे कॉलोनी में प्रथक से जगन्नाथ मंदिर की स्थापना के पश्चात शहडोल में एक और मंदिर बन गया था। जहां उड़िया परंपरा के अनुसार भगवान स्वामी जी की पूजा पाठ इत्यादि होता है। किंतु वहां पर रथ यात्रा का कार्यक्रम देखने को नहीं आया था।
बहरहाल इस्कान मंदिर की झलक शहडोल में पहली बार लोगों के बीच में आनंद का वातावरण अपने अंदाज में प्रदान करेगी ज्ञातव्य है। इस्कान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरि नाम कीर्तन के लिए जग प्रसिद्ध है। जो दुनिया भर में अपने तरीके से भगवान श्री हरि का प्रचार प्रसार करती रही है। शहडोल में इसकी तैयारियां जोरों से चल रही है।
हालांकि अगर शहडोल का प्रशासन ईमानदारी से अपने कर्तव्यों और दायित्वों का निर्वहन करता तो इस रथयात्रा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशानुसार मोहन राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन हेतु गठित स्वतंत्र समिति (जिसमें सदस्य के रूप में स्वयं तहसीलदार सोहागपुर ,राजस्व निरीक्षक सोहागपुर, केंद्र अध्यक्ष जिला पुरातत्व संग्रहालय तथा राजेश्वर उदैनिया और रमेश त्रिपाठी इस कमेटी में बचे हुए सदस्य हैं)के साथ संवाद करा कर एक साथ दोनों रथ यात्राओं को एक मार्ग में विभक्त होने तक ले जाया जा सकता था, किंतु अराजक तत्व गैर कानूनी तरीके से कब्जा करके रह रहे पुजारि ने पंडित मोहन राम पांडे के परिवार वालों को बिना सूचना दिए हुए राजनैतिक लोगों के साथ बैठक करके मनमानी तरीके से निर्णय ले लिया. जिसके कारण पिछली बार परमट के पास यात्रा रूप में काफी विवाद हो गया था किंतु पिछली घटना से सबक न लेते हुए उन्हें विवाद के अवसर पैदा करने जैसे हालात में रथ यात्रा का राजनीतिकरण किया जा रहा है . मंदिर के अंदर कब्जा करने और शहडोल प्रशासन के फेल होने की दशा में इतिहास में पहली बार होने वाली दो रथ यात्रा को हम अलग अलग ही देख पाएंगे. अगर दोनों रथ यात्राएं एक साथ अपने गंतव्य मार्ग के लिए निकलती तो शहडोल के लिए क्षण अमूल्य होता. जो इतिहास का हिस्सा होगा. किंतु अवैध रूप से काम करने वाले लोगों के वर्चस्व होने के कारण तथा प्रशासनिक फैलियर की स्थिति में यह नहीं हो सका… फिर भी दोनों रथ यात्रा को शहडोल वासी पहली बार अलग-अलग तरीके से निकलता देखेंगे जो जगन्नाथ स्वामी की आनंद का प्रचार प्रसार करेंगे कहा जाता है भक्तों के लिए भगवान स्वयं चलकर इस दौर में सबके पास आते हैं.

