“प्रत्यक्षं किम् प्रमाणं”: बंदरिया के हाथ में उस्तरा………..( त्रिलोकी नाथ)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौन व्रत को तोड़ने के लिए मणिपुर की हिंसा पर लोकसभा में जो अविश्वास प्रस्ताव  लाया गया उसको गिरना ही गिरना था यह अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले, विपक्ष और सत्ता  पार्टी के सभी नेता जानते थे, बावजूद इसके भी अविश्वास प्रस्ताव इस उद्देश्य से लाया गया था ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर की वर्तमान में सर्वाधिक निर्वस्त्र हो चुकी राजनीति पर प्रधानमंत्री का बयान सुना जा सके। किंतु प्रधानमंत्री को नहीं बोलना था तो वह नहीं बोले….; नाम मात्र का खानापूर्ति करते हुए करते हुए उन्होंने अपनी बात रखी। लेकिन गिरे हुए अविश्वास प्रस्ताव के साथ सत्ता की राजनीति में लाई गई नौटंकी की अदाकारी करने वाली

स्मृति ईरानी को जो जिम्मेदारी दी गई थी उसका वह रोल बहुत बुरी तरह से फ्लॉप शो हो गया।

शायद भारतीय जनता पार्टी का लिखा हुआ सुनियोजित स्क्रिप्ट में मणिपुर की हिंसा को फ्लाइंग किस में उड़ाने का प्लान भी उतनी ही बुरी तरह से फ्लॉप हुआ जितनी बुरी तरह से देश की महिला बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी फ्लॉप हो गई। क्योंकि उनसे बड़ी अदाकारा और पूरे दुनिया में सम्मान रखने वाली हेमा मालिनी जो मथुरा से सांसद हैं और वह भी भारतीय जनता पार्टी की, उन्होंने टीवी के सामने धोखे से ही सही सच बोल दिया। धोखे से इसलिए क्योंकि हेमा मालिनी का कथित तौर पर जो सिग्नेचर किया हुआ 20 महिला सांसदों की शिकायत का पत्र है उसमें उन्होंने अपने बोले गए सच के विपरीत शिकायत पर सिग्नेचर किया था। तो जान ले कि शिकायत क्या हुआ था, लोकसभा स्पीकर को ।जैसा कि मीडिया में चर्चित है….

” आदरणीय अध्यक्ष महोदय,

मैं आपका ध्यान सदन में हुई घटना की ओर आकर्षित करना चाहती हूंश्री राहुल गांधी, केरल के वायनाड से सांसद उक्त सदस्य ने अभद्र व्यवहार किया और गलत इशारे कियेकेंद्रीय मंत्री और इस सदन की सदस्य स्मृति जुबिन ईरानी जब सदन को संबोधित कर रही थीं. हम सदस्य के ऐसे व्यवहार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं, जिसने न केवल सदन में महिला सदस्यों की गरिमा का अपमान किया है, बल्कि इस प्रतिष्ठित सदन की गरिमा को भी कम किया है।”

अब सवाल उठता है कि जब हेमा मालिनी ने सिग्नेचर कर दिया था इस शिकायत में तो उसके खिलाफ उन्होंने क्यों बोला, तो क्या यह स्पष्ट नहीं करता है कि पूरे सुनियोजित षड्यंत्र के तहत एक कोरे कागज में इन कथित सांसदों के सिग्नेचर कर करके रख लिए गए थे, अथवा सिग्नेचर फर्जी थे…?  ताकि लोकसभा स्पीकर को सुनियोजित तरीके से इस आशय की शिकायत दी जाए ताकि मणिपुर का हिंसा का मामला इस शिकायत के हो-हल्ले में सदन के सामने और पूरी दुनिया के सामने उसमें दब जाए….. लेकिन दुर्भाग्य से वह अवसर जो घिनौना था स्मृति ईरानी को नहीं मिल पाया, और स्मृति ईरानी ने षड्यंत्र कारी तरीके से कोरे कागज पर जिसमें सिग्नेचर थे उस पर टाइप करा कर के राहुल गांधी की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी ।और यही कारण था की कोरे कागज में किए हुए सिग्नेचर पर क्या लिखा है हेमा मालिनी को भी नहीं मालूम था और उन्होंने जो देखा वह सच मीडिया के सामने बोल दिया… क्योंकि हेमा मालिनी कोई शातिर और षड्यंत्रकारी राजनेता नहीं है वह फिल्मी दुनिया की सम्मानित अदाकारा है….  स्पष्ट है कि हेमा मालिनी किसी भी हालत में इतना घिनौना और मूर्खतापूर्ण आरोप राहुल गांधी पर नहीं लगातीं। बहरहाल फ्लाइंग-किस (उड़ता हुआ चुम्मा) के बहाने जो भाजपा का कांग्रेस के ऊपर  फेंका गया जो झूठ किस्में मिसाइल था, वह बहुत बुरी तरह से फिस्स हो गया।

इससे प्रतीत होता है,क्योंकि भाजपा चाहती थी कि किसी दूसरी “विवादित-घटना” में मणिपुर को मीडिया से उड़ा दिया जाए; लेकिन इसमें  मणिपुर की हिंसा मे जो “फ्लाइंग-किस” में उड़ाना चाहती थी वह धराशाई हो गया। वर्तमान राजनीति का इससे ज्यादा पतन संसद के अंदर इतिहास में कभी नहीं देखा गया  और इस तरह लोकतंत्र में प्रमाणित तौर पर बोले गए झूठ का दंड लोकसभा स्पीकर में हैसियत भी नहीं कि वह स्मृति ईरनी के खिलाफ कोईकि गंभीर दंडात्मक चार्ज लगा सके। क्योंकि पुरानी कहावत में राजा की पिलाई को गंदगी फैलाने का पूरी तरह से आरक्षण है…. और हमारे लोकतंत्र के सबसे बड़े पवित्र मंदिर में इस घटना को अंजाम दिया गया यही वर्तमान का सच है है कि नहीं यही वर्तमान का प्रत्यक्षं किम् प्रमाणं है


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