
कांग्रेस द्वारा राममंदिर निमंत्रण अस्वीकार किए जाने पर भारतीय जनता पार्टी इस फैसले के बाद कांग्रेस पर हमलावर है और देश की ये विश्वास दिलाने का पूरा प्रयास कर रही है कि कांग्रेस हिंदू विरोधी है, सनातन विरोधी है राम विरोधी है प्राण प्रतिष्ठा में भी जाने से इंकार कर चुकी है ये उसका चरित्र है
उधर कांग्रेस का अपना तर्क है, कांग्रेस का कहना है कि अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा शास्त्र सम्मत नहीं है, चारों पीठ के शंकराचार्य भी नहीं जा रहे इसलिए जहाँ धर्म विरोधी कार्य हो वहां हम क्यों जाएँ, कांग्रेस ने तो इस कार्यक्रम को राजनीतिक कार्यक्रम कह दिया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर साधा निशाना कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमेन पवन खेड़ा आज मीडिया के सामने आये, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाये, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाने साधे, पीएम पर खुद को भगवान राम से ऊपर समझने जैसे गंभीर आरोप लगाये और कहा कि राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का ये कार्यक्रम धार्मिक नहीं है ये राजनीतिक है, ये भाजपा का कार्यक्रम है। ये शास्त्र विरोधी कार्यक्रम है। ये धर्म विरोध कार्यक्रम है।
नासिक धाम-पंचवटी 12 JAN 2024 PIB
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी को अयोध्या धाम में मंदिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 11 दिवसीय विशेष अनुष्ठान शुरू कर दिया है। “ये एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। जैसा हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है, हमें ईश्वर के यज्ञ के लिए, आराधना के लिए, स्वयं में भी दैवीय चेतना जागृत करनी होती है। इसके लिए शास्त्रों में व्रत और कठोर नियम बताए गए हैं, जिन्हें प्राण प्रतिष्ठा से पहले पालन करना होता है। इसलिए, आध्यात्मिक यात्रा की कुछ तपस्वी आत्माओं और महापुरुषों से मुझे जो मार्गदर्शन मिला है…उन्होंने जो यम-नियम सुझाए हैं, उसके अनुसार मैं आज से 11 दिन का विशेष अनुष्ठान आरंभ कर रहा हूं।” मैं नासिक धाम-पंचवटी से कर रहा हूं। पंचवटी, वो पावन धरा है, जहां प्रभु श्रीराम ने काफी समय बिताया था। और आज मेरे लिए एक सुखद संयोग ये भी है कि आज स्वामी विवेकानंदजी की जन्मजयंती है। ये स्वामी विवेकानंदजी ही थे जिन्होंने हजारों वर्षों से आक्रांतित भारत की आत्मा को झकझोरा था। आज वही आत्मविश्वास, भव्य राम मंदिर के रूप में हमारी पहचान बनकर सबके सामने है।और सोने पर सुहागा देखिए, आज माता जीजाबाई जी की जन्म जयंती है । माता जीजाबाई, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में एक महा मानव को जन्म दिया था। आज हम अपने भारत को जिस अक्षुण्ण रूप में देख रहे हैं, इसमें माता जीजाबाई जी का बहुत बड़ा योगदान है ।
साथियों,शरीर के रूप में, तो मैं उस पवित्र पल का साक्षी बनूंगा ही, लेकिन मेरे मन में, मेरे हृदय के हर स्पंदन में, 140 करोड़ भारतीय मेरे साथ होंगे। आप मेरे साथ होंगे…हर रामभक्त मेरे साथ होगा। और वो चैतन्य पल, हम सबकी सांझी अनुभूति होगी। मैं अपने साथ राम मंदिर के लिए अपने जीवन को समर्पित करने वाले अनगिनत व्यक्तित्वों की प्रेरणा लेकर जाउंगा।जब 140 करोड़ देशवासी, उस पल में मन से मेरे साथ जुड़ जाएंगे, और जब मैं आपकी ऊर्जा को साथ लेकर गर्भगृह में प्रवेश करूंगा, तो मुझे भी ऐहसास होगा कि मैं अकेला नहीं, आप सब भी मेरे साथ हैं।साथियों, ये 11 दिन व्यक्तिगत रूप से मेरे यम नियम तो है ही लेकिन मेरे भाव विश्व में आप सब समाहित है | मेरी प्रार्थना है कि आप भी मन से मेरे साथ जुड़े रहें।
साथियों, हम सब इस सत्य को जानते हैं कि ईश्वर निराकार है। लेकिन ईश्वर, साकार रूप में भी हमारी आध्यात्मिक यात्रा को बल देते हैं। जनता-जनार्दन में ईश्वर का रूप होता है, ये मैंने साक्षात देखा है, महसूस किया है। लेकिन जब ईश्वर रूपी वही जनता शब्दों में अपनी भावनाएं प्रकट करती है, आशीर्वाद देती है, तो मुझमें भी नई ऊर्जा का संचार होता है। आज, मुझे आपके आशीर्वाद की आवश्यकता है। इसलिए मेरी प्रार्थना है कि शब्दों में, लिखित में, अपनी भावनाएं जरूर प्रकट करें, मुझे आशीर्वाद जरूर दें। आपके आशीर्वाद का एक-एक शब्द मेरे लिए शब्द नहीं, मंत्र है। मंत्र की शक्ति के तौर पर वह अवश्य काम करेगा।
भोपाल : शुक्रवार, जनवरी 12, 2024 राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के जीवन चरित्र और उनके दर्शन का अध्ययन युवा अनिर्वाय रूप से करें। उनके जीवन और आदर्शों को याद करें, उन्हें समझें और उनसे प्रेरणा लेकर स्वयं और देश के उत्थान के लिए कार्य करे। सभी युवा अपने सामर्थ्य, क्षमता, ऊर्जा और ओज को राष्ट्र निर्माण में लगाए। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद जी और अन्य महापुरुषों के आदर्शों की जानकारी देना चाहिए। युवाओं को आगे आकर काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्वामी जी अद्भुत और बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे धर्म, दर्शन, इतिहास, कला, संगीत, साहित्य और खेल में विद्वान थे। इसीलिए उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें सम्पूर्ण पुरुष कहा था। श्री पटेल यूथ फॉर नेशन के मध्यप्रदेश चेप्टर के शुभारंभ अवसर को संबोधित कर रहे थे।
बीसवीं सदी के पहले दशक के दौरान भारत और अमेरिका दोनों में प्रसिद्ध था। भारत के इस अज्ञात साधु को 1893 में शिकागो में आयोजित धर्म संसद में अचानक प्रसिद्धि मिली, जिसमें उन्होंने हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया। स्वामी विवेकानंद की जयंती को हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता एक माध्यम वर्गीय बंगाली परिवार में हुआ था। स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र था। स्वामी विवेकानंद का जीवन अद्भुत घटनाओं से भरा हुआ है। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद के जीवन के कुछ खास प्रसंग हैं जिन्हें यहां आपके साथ साझा कर रहे हैं।
एक बार गाजीपुर से वाराणसी जाते समय स्वामी विवेकानंद का पता चला कि श्री रामकृष्ण के वफादार सेवक बलराम बसु ने अंतिम सांस ली है। उनकी आंखों में आंसू देखकर उनके साथ चल रहे प्रमदा दास मित्र ने कहा कि दुखद व्यक्त करना एक संत को शोभा नहीं देता । स्वामी ने आक्रामक रूप से जवाब दिया और कहा कि क्या मैं अपना हृदय त्याग दूं क्योंकि मैं एक संन्यासी हूं? संन्यास किसी को पत्थर दिल बनने के लिए नहीं कहता । स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि कोई भी महिला उनके मठ में कभी प्रवेश नहीं करेगी। एक बार उन्हें बुखार से बेहोशी महसूस हुई और उनका एक शिष्य स्वामी जी की अनुमति के बिना अपनी मां को उनके पास ला ने गया । मठ के अंदर उसकी मां को देखकर क्रोधित हो कर उन्होंने शिष्य को डांटा। आपने एक महिला को अंदर क्यों आने दि या ? मैंने ही नियम बनाया था और मेरे लिए ही नियम तोड़ा जा रहा है! इससे पता चलता है कि वह अपनी प्रतिज्ञाओं के प्रति कितने समर्पित थे।
एक बार न्यूयॉर्क में रहते हुए स्वामी विवेकानंद ने अपने अनुयायियों को बताया कि जब वे स्वामी प्रेमानंद के साथ वाराणसी की सड़कों पर घूम रहे थे, तो शरारती बंदरों के एक समूह ने उनका पीछा किया । जब दोनों युवा संन्यासी भागने लगे तो उन्होंने एक वृद्ध संन्यासी को उन्हें बुलाते हुए सुना। उन्होंने उनसे भागने के बजाय जानवरों का सामना करने को कहा । दोनों बंदरों के खिलाफ खड़े हो गए और ये देखकर आश्चर्यचकित रह गए कि बंदरों का झुंड भी रुक गया । इसका सारांश ये है कि अगर आप डर को दूर करना चाहते हैं, तो आपको अपने दुश्मनों का सामना करके ऐसा करना होगा।
कोलकाता: 11 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे बांग्ला को ‘शास्त्रीय भाषा’ घोषित करने का आग्रह किया।

