
शहडोल |
सोननदी ( बरगवां ) 1970 के दशक में स्थापित आदिवासी क्षेत्र शहडोल को दलित उत्थान का चेहरा बनाकर लाया गया उद्योग ओरिएंट पेपर मिल में शोषण की दास्तान खत्म होती नजर नहीं आ रही है। क्षेत्र और इसके आसपास पेपर मिल का प्रदूषण के राक्षस का हमला फिर से किए जाने की शिकायत नगर पंचायत के पदाधिकारी द्वारा की गई है।अनूपपुर और शहडोल जिले की सीमा में स्थित ओरिएंट पेपर मिल कास्टिंग सोडा यूनिट का सोन नदी में गंदा पानी छोड़ने का मामला सामने आया हैं। जिसकी शिकायत मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से नगर परिषद बरगवां अमलाई की अध्यक्ष ने की थी। शिकायत के जांच के लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक पहुंचे। एमपीपीसीबी के वैज्ञानिकों ने कंपनी को गंदा पानी नहीं छोड़ने का निर्देश दिया था ,लेकिन कंपनी ने 48 घंटे से समय बीत जाने के बाद भी गंदा पानी सोन नदी में छोड़ रही हैं।
इसलिए औपचारिकता पूरी करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वृत्त शहडोल का अमला खानापूर्ति करने के लिए पहुंचा। जैसा कि पिछले 50 साल से यही औपचारिकता पूर्ति करता चला आ रहा । तब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक कार्यालय ओरिएंट पेपर मिलने अपने गोद में यानी कमरा देकर बोर्ड के कर्मचारियों को पाल रखा था। जो उनके हिसाब से काम करते रहे हैं।
संभाग मुख्यालय हो जाने के बाद कहने को तो वृत कार्यालय शहडोल में खुल गया है किंतु यह बुद्धि विलासिता का केंद्र बनकर रह गया है और प्रयास करता है कि शहडोल क्षेत्र के संपूर्ण प्रदूषण में वह आंख मूंदा रहे।लेकिन जब भी कभी घोषित जनप्रतिनिधि कुछ बात शिकायत रखते हैं तो खाना पूर्ति करने के लिए अपनी विलासिता पूर्ण जिंदगी छोड़कर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वायरस जमीन पर रेंगता हुआ नजर आता है। जैसा की बीते दिन सोन नदी के प्रदूषण की शिकायत पर वह देखा गया।
क्योंकि विभाग को यह मालूम है कि उसके करने से भी कुछ होने जाने वाला नहीं है यह 50 साल के अनुभव में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डीएनए का हिस्सा हो चुका है। फिर भी लोकतंत्र में दिखाने का दांत लेकर सोन नदी की बर्बादी के आलम को देखने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिखाई दिया। किंतु कार्यवाही क्या कि यह वह कभी भी प्रेस या मीडिया को बताने की जरूरत नहीं समझता बल्कि जब भी कोई पत्रकार इस केंद्र पर जानकारी लेने पहुंचते हैं तो उन्हें अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम का हवाला देकर धमकाने का प्रयास किया जाता रहा है। और इस तरह शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र अपने अनुसूचित जनजाति के हितों के लिए ही बने कानून के सुरक्षा के मकड़ जाल में पर्यावरण की हत्या करवा रहा है। अन्यथा अब तक सोन नदी में प्रदूषण के बहाने के लिए ओरिएंट पेपर मिल पर पुलिस प्रकरण दर्ज कर दिया गया होता है। जो फिलहाल ना तो हुआ है और ना होगा…. ऐसा मानकर चलना चाहिए।
नगर परिषद बरगवां अमलाई की अध्यक्ष गीता गुप्ता ने पेपर मिल की शिकायत मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की थी। उन्होंने अपने शिकायत में बताया था कि कंपनी गंदा पानी सोन नदी में छोड़ता है। गंदा पानी जनजीवन एवं पर्यावरण को प्रभावित करता है। वही बरगवां के रहने वाले राजू ने बताया कि हम मछली पकड़ने के लिए तालाब गए थे।वहां पहुंचने पर अधिकांश मछली तड़प रही थीं । कुछ की मौत हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि ओरिएंट पेपर मिल कास्टिंग सोडा यूनिट ने गंदा पानी सोन नदी में छोड़ने के कारण मछलियां तड़प रही थी। गंदा पानी सोन नदी में मिलता है ,तो यह नुकसान दायक होती हैं। निरीक्षण के लिए पहुंचे वैज्ञानिक ने 6 फरवरी को ही ओरिएंट पेपर मिल को गंदा पानी सोन नदी में नहीं छोड़ने का निर्देश दिया था ,लेकिन उसके बाद भी कंपनी गंदा पानी सोन नदी में छोड़ रहा है।

