
दिल्ली| कहीं डेढ़ साल चल किसान आंदोलन में 750 किसानों की मौत के बाद शासन ने तीन काले कानून की वापसी की घोषणा की थी साथ में किसानों के साथ कुछ वादा भी किया था यानी गारंटी ली थी और वह मोदी की गारंटी फेल हो जाने के कारण किसानों ने शासन को याद दिलाने के लिए दिल्ली का रुख किया है ताकि वह शासन को बता सके कि नागरिकों के प्रति उसने जो घोषणाएं की थी उनको वह पूरा करेंऔर इसलिए वह आज दिल्ली आ रहे हैं.लेकिन शासनमें बैठी मोदी सरकार किसानों के साथ किए गएअपने वादों की गारंटी से मुकरने के बाद अब उन्हें दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए जबरदस्त घेराबंदी की है यानी एक प्रकार का ऐसा माहौल बनाया है कि वह किसान भारत के नागरिक ना हो करके किसी बाहरी देश केदुश्मन देश के आक्रमणकारी हो और उनसे भयभीत होकर पुलिस की कड़ी सुरक्षाबंदी कर दी गई है जिससे आम नागरिक भी परेशान हो रहा है|
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बार दिल्ली पुलिस किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगी। दिल्ली की सीमाओं पर दिल्ली पुलिस व पैरा मिलिट्री फोर्स की 122 कंपनियां तैनात की गई हैं। एक कंपनी में 70 से ज्यादा पुलिस जवान होते हैं। इस हिसाब से दिल्ली की सीमाओं पर 8500 हजार से ज्यादा पुलिस जवान तैनात किए गए हैं।दिल्ली पुलिस किसानों को रोकने लिए आए दिन सिंघु व टीकरी बॉर्डर पर मॉक ड्रिल कर रही हैं। मॉक ड्रिल से देखा जा रहा है कि किसानों को कैसे रोका जा सकता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बॉर्डर को रात में ही सील कर दिया जाएगा। पुलिस कर्मियों को आदेश दिए गए हैं कि अगर किसान कानून व्यवस्था को बिगाडऩे की कोशिश करते हैं तो उन्हें तुरंत हिरासत में लेने के आदेश दिए गए हैं।किसानों को किसी भी सूरत में दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। परिस्थितियों के अनुसार जरूरत पड़ने पर कम से कम बल का इस्तेमाल किया जाएगा।

