कभी के मॉडल, अब अफसर-शाही के शिकार हो गरीब-जाति स्कूल बन बदतर हो गए…

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          शहडोल क्षेत्र व नगर का शायद ही कोई ऐसा बड़ा नागरिक, नेता या अफसर या तीरंदाज बचा होगा जो विकसित होने वाले शहडोल के इस मॉडल स्कूल में अपनी शिक्षा ग्रहण न किया हो… कई पीढियां को इस मॉडल बेसिक स्कूलों ने भविष्य का रास्ता दिखाया और जब लोग पढ़ लिखकर यहां से निकल गए कि इस मॉडल स्कूल की वही हालत कर दिए जो शहडोल के भविष्य को दिखता प्रतीत होता है
क्योंकि तब यही मॉडल बेसिक स्कूल एकमात्र ऐसा स्कूल था जो तत्कालीन समय में उच्च स्तरीय प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था का उत्कृष्ट मॉडल प्रतीक माना जाता था। और शहडोल नगर का गौरव पूर्ण विद्यालय रहा । ठीक इसके बगल में अर्बन बेसिक स्कूल भी है जो इसी तर्ज पर उत्कृष्ट विद्यालय हुआ करता था। अब दोनों विद्यालय इस बात की प्रतियोगिता कर रहे हैं की कौन किससे ज्यादा बदतर हालत में अपने विद्यार्थियों को शिक्षा दे सकता है।
 मॉडल बेसिक स्कूल में यह सही है कि उसकी छत गिरने से एक मुस्त बच्चे इस दुर्घटना में प्रभावित नहीं हुए, किंतु वह प्रभावित नहीं होंगे इसकी गारंटी प्रधानमंत्री मोदी भी नहीं ले सकते… जो दुर्दशा यहां दिख रही है उसे देखने के लिए ना तो सांसद को फुर्सत है और ना ही विधायकों को.. शहडोल में 20 साल तक नगरपालिका परिषद में भाजपा की सरकार रही है इस तरह पिछले 10 साल तो “ट्रिपल इंजन” की सरकार शहडोल, राज्य और केंद्र में चलती रही है, इसके बावजूद भी इस मॉडल स्कूल का जो कभी शहडोल का गौरव हुआ करता था अपनी बद से बदतर होती जर्जर हालात से उभर नहीं पा रहा है।
क्योंकि वास्तव में नेता, विधायक या मंत्रियों की इच्छा प्राइमरी स्कूल को ठीक करने की नहीं है… यही शहडोल जिले के दूरस्थ विद्यालयों का मॉडल कहा जा सकता है..? अथवा इतने नए विद्यालय करोड़ों और अरबों रुपए में बनने लगे हैं कि जिस विद्यालय ने शहडोल के बुनियादी विकास की संरचना रखी हो और नागरिक पैदा किए हो उन्हें शिक्षित किया हो वह इतनी अशिक्षित, गैर जिम्मेदार अथवा गद्दार हैं कि उन्हें अपने इस प्राइमरी गुरुकुल से कोई लेना-देना नहीं है..?
क्योंकि शहडोल नगर इस स्कूल में अब गरीब-जाति के बच्चे पढ़ते हैं गरीब-जाति को सिर्फ वोट-बैंक का दिखने वाला एक वस्तु मात्र है उसे अच्छी शिक्षा उच्च स्तरीय व्यवस्था और प्रबंधन में जीने का कोई हक नहीं है.. यही शहडोल नगर के मॉडल बेसिक स्कूल का मॉडल बन गया है।
   इस संबंध में जब संबंधित अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने यह कहा कि तकनीकी तौर पर कुछ बड़ी गलतियां हुई हैं जिसकी वजह से इस स्कूल को सजाया या समारा नहीं जा सका है लेकिन उम्मीद रखना चाहिए की जल्द मॉडल बेसिक स्कूल का स्वरूप बदल जाएगा। अधिकारी की इच्छा शक्ति से प्रतीत होता है कि उनके कार्यकाल में शायद मॉडल बेसिक स्कूल अपनी बीमार और मृत् प्राय: अवस्था से कुछ स्वस्थ हो लेकिन यही हाल अर्बन बेसिक स्कूल का भी है उसका कोई माई-बाप है अथवा नहीं यह पता नहीं चला है… क्योंकि वह भी उसी तर्ज पर जा रहा है जहां शहडोल का कभी उत्कृष्ट प्राइमरी और मिडिल स्कूल बने।
यह दोनों विद्यालय आज अपने गद्दार नागरिकों के कारण और गैर जिम्मेदार अफसर के कारण बर्बाद हो चले हैं और यहां पढ़ने वाले बच्चे सिर्फ बंधुआ-मजदूर कहे जा सकते हैं जिन्हें पढ़ना है तो इसी हालत में रहना होगा… फिर भी “आशा में आकाश टिका है, स्वास्थ्य तंतु कब टूटे… शायद जिम्मेदार कलेक्टर, अधिकारी अपनी नींद सेजागेंगे और यहां पढ़ने वाले बच्चों को जीवन दान देंगे।


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