
शहडोल 26 जुलाई 2024- कलेक्टर तरूण भटनागर द्वारा लोगों की समस्याओं को सुनने एवं निराकरण करने का नवाचार किया गया है। कलेक्टर श्री तरूण भटनागर प्रत्येक शुक्रवार को दोपहर 3 बजे से सांय 5 बजे तक दूरभाष के माध्यम से आमजनों की शिकायतों को सुनेंगे तथा निराकरण के निर्देश तत्काल संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिए जाएंगे। आमजन प्रत्येक शुक्रवार को दोपहर 3 बजे से सांय 5 बजे तक दूरभाष क्रमांक 07652-241700 पर कलेक्टर शहडोल से सीधा संवाद कर अपनी शिकायतांे से अवगत करा सकेंगे।गौरतलब है कि उक्त नवाचार से शहडोल जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले लोगों का समय बचेगा और अन्य परेशानियों का सामना न करना पड़ेगा। साथ ही आसानी से कलेक्टर से घर बैठे सीधा संवाद कर अपनी समस्याओं को अवगत करा सकेंगें।
कलेक्टर श्रीभटनागर ने शहडोल जिले में उद्योग स्थापित करने एमपीआईडीसी के यू.के. तिवारी, प्रबंधक अजय श्रीवास्तव, खनिज विभाग व अन्य विभागीय अधिकारियो से चर्चा की। चर्चा के दौरान कलेक्टर ने कहा कि शहडोल जिले में रेत से कांच बनाने के उद्योग स्थापित करने के लिए प्रयास किये जाए जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि कांच के उद्योग स्थापित करने के लिए रेत की टेस्टिंग कराई जाए। कलेक्टर ने कहा कि मुन्गे के पत्ते का पाउडर बनाने, अदरक, हल्दी का उत्पादन बढाने के प्रयास करंे तथा प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित किये जाए। बैठक में अधिकारियों ने कलेक्टर को अवगत कराया गया कि ओपीएम अमलई में यूकेलिप्टस से ऑयल बनाया जाता है जिसका उपयोग बिक्स और बांम के रूप में किया जाता है, टिसू पेपर भी बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि मक्का और कना से ऑयल निकालने के लिए ग्राम पटासी में 120 करोड़ रूपये की लागत से प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि संभागीय मुख्यालय शहडोल में महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई व महिलाओं के लिए अन्य कार्याें हेतु एक काम्पेलेक्स बनाया जा सकता है। जिस पर कलेक्टर ने डिप्टी कलेक्टर को निर्देश दिए कि उक्त कार्य के लिए भूमि का चिन्हाकंन कर लें।
चार बैगा जनजाति परिवारों की है, जिन्होंने कुछ दिन पहले तक सिर्फ अभावों और कठिनाईयों का जीवन जिया था। जीवन की दुश्वारियों से परेशान ये बैगा परिवार अपनी जिन्दगी बदलना तो चाहते थे, पर कोई राह नहीं मिल रही थी। इनकी कई परेशानियों के इन्ही कड़वे दिनों में एक नई मिठास लेकर आई पीएम जनमन योजना। भारत सरकार ने देश की 75 विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) के उत्थान के लिये यह योजना प्रारंभ की है। इसमें (पीवीटीजी) परिवारों को पक्का घर, पोषण आहार, स्वच्छ जल, बिजली, अच्छी शिक्षा, रोग उपचार, गांव तक पक्की सड़क, संचार कनेक्टिविटी जैसी तमाम सुविधाओं एवं इन जनजातियों के रोजगार का प्रबंध भी किया जा रहा है। भारत सरकार के साथ मध्यप्रदेश सरकार भी प्रदेश की तीन विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया एवं सहरिया के समग्र कल्याण के लिये विशेष उपाय कर रही है। इन जनजातियों के सभी परिवारों को पक्का घर एवं इन घरों को बिजली से रौशन करने के लिये सरकार तेजी से प्रयासरत है। इन चार बैगा परिवारों को भी पीएम जनमन की ‘सबको घर’ और ‘हर घर बिजली’ योजना का लाभ मिला है।
शहडोल एक जनजातीय विशेषकर बैगा जनजाति बाहुल्य जिला है। जिले के ग्राम टेटका निवासी श्रीमती रामरती बैगा पहले एक कच्चे मकान में अपने परिवार के साथ रहती थीं। कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण रामरती बैगा को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मजदूरी तक करना पड़ी। मजदूर परिवार के लिए खुद के घर का सपना देखना मानो बेमानी था। पीएम जनमन योजना ने रामरती और उसके परिवार का यह सपना पूरा कर दिया। रामरती को अब पक्का घर मिल चुका है। पहले रामरती का परिवार ठंड, गर्मी, बरसात में जैसे-तैसे गुजर-बसर करता था, पर आज वे सभी खुशहाल जीवन जी रहे हैं। उनका जीवन स्तर भी सुधर रहा है। इन्हें अनेक शासकीय योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। कच्चे घर की कठिनाईयाँ भी अब दूर हो गयी हैं।
ग्राम पंचायत मसियारी की मुन्नीबाई बैगा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पहले वे कच्चे मकान में गुजर-बसर करती थीं। बरसात में आये दिन ऊपर से पानी ठपकता रहता था। ठंड में तो जीना मुहाल हो जाता था। काफी परेशानियां झेलनी पड़ती थीं। दूसरों के पक्के घर देखकर वे सोचती थीं कि इस जीवन में क्या वह भी कभी अपने पक्के घर में रह पायेगी। पर पक्के घर के मुन्नीबाई के सपने को जन-मन आवास योजना ने पूरा कर दिया है। योजना से मुन्नीबाई का पक्का घर तैयार हो गया है। अब वे इसी पक्के घर में रहती हैं। कच्चे घर की उन तमाम समस्याओं से भी उन्हें हमेशा के लिये निजात मिल गई है। वर्षा और ठंड की दिक्कतें भी अब नहीं उठानी पड़तीं।
बुढ़ार की ग्राम पंचायत भमला निवासी आइतू बैगा भी इस योजना से पक्के घर की सौगात के लाभार्थी हैं। आइतू बैगा बताते हैं पहले उनका परिवार कच्ची झोपडीनुमा घर में रहता था। जिसमें काफी परेशानियां झेलनी पड़ती थीं। पीएम जनमन से मेरा पक्का मकान तैयार हो गया है और अब मैं इसी मकान में खुशी-खुशी रहने लगा हूं।
जयसिंहनगर की ग्राम पंचायत बनसुकली निवासी श्रीमती सरोजनी बैगा को भी पीएम जन-मन आवास योजना से पक्के घर का लाभ मिला है। कच्चे घर और उसकी परेशानियों को सरोजनी अब एक बुरे सपने की तरह भूल चुकी हैं। क्योंकि इन सबके जीवन में पीएम जन-मन योजना से एक नई डगर, एक नया उजाला जो आ गया है।

