
सच पूछा जाए तो नैतिकता की धरातल में आतिशी को उसी दिन मुख्यमंत्री बनने की घोषणा कर दी गई थी.. जिस दिन भारतीय जनता पार्टी के एजेंट के रूप में उभरे उपराज्यपाल(एल.जी.) वीके सक्सेना ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा जेल से लिखी गई एलजी को चिट्ठी में अतिशी को 15 अगस्त का झंडा फहराने की सहमति दी थी और किसी मोहल्ले के मनचले नेता की तरह एलजी सक्सेना ने उनके सहमति को खारिज करके अपने मन से दिल्ली के गृह मंत्री कैलाश गहलोत को झंडा फहराने के लिए कहा था। और यही बात अब एलजी सक्सेना के लिए सिर-दर्द साबित होने वाली है। क्योंकि जिस आतिशी को वह झंडा फहराने से रोक रहे थे और अपमानित किया था अब वह मुख्यमंत्री बनकर एलजी सक्सेना के नकचढ़ी हरकतों पर अंकुश लगाने वाली है। सक्सेना को अब आतिशी के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा या फिर कहना चाहिए उपराज्यपाल के तमाम राजनीतिक हथियारों का कुछ इस प्रकार से मुकाबला करने वाली हैं जैसे ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी…’ अतिशी भारत की दूसरी महिला मुख्यमंत्री वर्तमान दौर में कहलाएंगी ।
……………( त्रिलोकीनाथ )…………..
आतिशी का एक परिचय शहडोल से भी जुड़ा हुआ है वह शहडोल में अमरकंटक के मध्यस्थ दर्शन के प्रणेता ए नागराज की शिष्या रही है अक्सर शहडोल क्षेत्र में उनका आना-जाना लगा रहता था। क्योंकि अमरकंटक में बाबा का मुख्यालय था इस तरह दिल्ली की मुख्यमंत्री का एक रिश्ता शहडोल क्षेत्र से निकल ही आता है। बाबा नागराज का मध्यस्थ दर्शन वास्तव में लोकतंत्र में संपूर्ण स्वतंत्रता का आभास कराता है । जिसकी कल्पना महात्मा गांधी ने अपने सामाजिक जीवन में जी कर देखी थी नागराज ने अमरकंटक की धरातल में आध्यात्मिक की दुनिया में अनुभव के आधार पर लोकतंत्र में किस प्रकार से आध्यात्मिक की ऊंचाई को पाया जा सकता है उसे प्रशिक्षण के जरिए हर आम नागरिक के लिए सुलभ किया। इसी का अध्ययन और मनन के लिए जीवन में संपूर्ण सकारात्मक स्पष्ट था क्लियरिटी के साथ जीवन को और उसके मूल्य को समझने का प्रयास होने वाली दिल्ली की मुख्यमंत्री ने शहडोल जाकर किया था। बाबा नागराज 2016 में जीवन यात्रा को त्याग दिया ।उनके बताए रास्ते में जीवन के मूल उद्देश्य सत्य ,न्याय और धर्म के आधार पर आम नागरिक को कैसे जीवन पद्धति प्राप्त हो इसका प्रशिक्षण पाने वाले अतिशी आज दिल्ली के चक्रव्यूह में अब अपने नेतृत्व में राजनीतिक युद्ध में उतरेंगी।
रोचक होगा यह देखने की उसका परिणाम क्या होगा…? बहर हाल नैतिकता की धरातल में आज भी संभावनाएं मरी नहीं है इसका प्रयोग अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा देकर राजनीति में एक नए प्रयोग के रूप में जमीनी धरातल से एक महिला मुख्यमंत्री को भारत को जानने और समझने के लिए प्रकट किया है, ऐसा कह सकते हैं; क्योंकि निश्चित तौर पर जिस दिन मनचले उपराज्यपाल सक्सेना ने मुख्यमंत्री केजरीवाल की सहमति को खारिज करके अपनी मनमानी से अपना चमड़े का सिक्का चलाना चाहा उसी दिन आतिशी का अप्रत्यक्ष तौर पर मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर दी थी। मुख्यमंत्री केजरीवाल के मन में सुनिश्चित हो गया रहा होगा वह अब प्रकट हो रहा है। ऐसे में देश की राजधानी मुख्यालय दिल्ली की होने वाली मुख्यमंत्री को बहुत-बहुत बधाई और लगे हाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी क्योंकि उनका जन्मदिन आज ही है। इस तरह कहा जा सकता है कि अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी को बधाई का उपहार राजनीति में करारे जवाब के साथ दिया है। इसी को कहते हैं की करत करत अभ्यास थे जड़ मत हो सुजान…कभी केजरीवाल कहा करते थे राजनीति अगर सीखना है तो उसे भी सीख लेंगे…. शायद उन्होंने भाजपा से राजनीति करना सीख ही लिया है तो देखें होता है क्या आगे आगे….

