
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज कहा कि किसानों के मुद्दों का समय पर समाधान अत्यन्त आवश्यक है और इस बात पर बल दिया कि देश किसानों की चिंताओं को कम प्राथमिकता देना गवारा नहीं कर सकता है।धारवाड़ में कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय के अमृत महोत्सव और पूर्व छात्र मिलन समारोह के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन देते हुए, श्री धनखड़ ने कहा कि, “किसानों की समस्या पर तत्काल राष्ट्रीय ध्यान देने की आवश्यकता है। किसानों को आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता है। हम इस देश में, जो आगे बढ़ रहा है और जिसका विकास रोका नहीं जा सकता है और इसका इतना विकास पहले कभी नहीं हुआ है, किसानों की चिंताओं को कम प्राथमिका नहीं दी जा सकती। समय सभी मुद्दों के समाधान का सार है। लेकिन मैं कहूंगा कि जब किसानों की समस्याओं का समाधान खोजने की बात आती है, तब समय की कीमत अत्यन्त महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार काम कर रही है। हम चाहते हैं कि सभी लोग एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करें और समाधान खोजने के लिए एक सकारात्मक सोच के साथ एकत्रित हों।‘‘उन्होंने आगे कहा, “हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि जब किसान आर्थिक रूप से ठीक होता है, तब अर्थव्यवस्था अपने आप आगे बढ़ती है, क्योंकि किसान के खर्च करने की क्षमता यही है और इसलिए, हम एक और सकारात्मक प्रभाव देखेंगे। अगर कृषि क्षेत्र जीवंत, समृद्ध, स्नेहित, जिसका ध्यान रखा जा रहा है, तो कृषि क्षेत्र में कोई गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां नहीं होंगी। हमें किसानों पर उसी तरह ध्यान देना चाहिए, जैसे हम आईसीयू में अपने मरीजों पर देते हैं।16.1.25 PIB Delhi
आरबीआई ने भारतीय रुपये में सीमा पार लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को सीमा पार लेनदेन निपटाने के लिए भारतीय रुपये और स्थानीय/राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए उदार मानदंडों की घोषणा की।यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब घरेलू मुद्रा में गिरावट आ रही है और सोमवार को यह 86.70 प्रति अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक निम्नतम स्तर पर पहुंच गई।रिजर्व बैंक ने भारतीय रुपये सहित स्थानीय मुद्राओं में सीमा पार लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और मालदीव के केंद्रीय बैंकों के साथ पहले ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
तीन विश्वविद्यालयों में पीएचडी पाठ्यक्रम शुरू करने पर रोक लगाई नयी दिल्ली: 16 जनवरी (भाषा) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने राजस्थान के तीन विश्वविद्यालयों को अगले पांच साल तक पीएचडी पाठ्यक्रम प्रदान करने से रोक दिया है, क्योंकि उन्हें डिग्री की शुचिता से समझौता करते पाया गया है।अधिकारियों ने बताया कि इन तीन विश्वविद्यालयों में – ओपीजेएस विश्वविद्यालय, चूरू; सनराइज विश्वविद्यालय, अलवर और सिंघानिया विश्वविद्यालय, झुंझुनू शामिल हैं।

