
प्रयागराज के इस 2025 के महाकुंभ में भारतीय लोकतंत्र में पत्रकारिता का नकाब पहनकर जो “किन्नर-मीडिया” पैदा हुआ है उसका भी पर्दापास हो गया है। कह सकते हैं कोविड19 महामारी में दहशत न फैलाने के लिए मीडिया को किन्नर बनाया गया लेकिन पूर्व निर्धारित इस विशाल महाकुंभ की तैयारी के बाद भी मुख्य धारा का अत्यधिक एआई से और हेलीकॉप्टर के संसाधन से भी लैस मीडिया ने साबित किया है कि वह अब किन्नर हो चुका है। इस पत्रकारिता को यानी मीडिया गिरी के रूप में लाने का काम “2014 की आजादी “के बाद चालू हो गया था। कोविड महामारी में इसका भरपूर प्रयोग हुआ था. प्रयागराज में सिर्फ इसे दोहराया गया है। इसमें कोई शक नहीं है। क्योंकि उसने सच दिखाने का साहस नहीं रहा ,अपवाद कुछ चैनलों/सोशल मीडिया/ अखबारों को छोड़ दें..। किंतु एक पत्रकार भी अगर जिंदा है तो लोकतंत्र की संभावना को खत्म नहीं किया जा सकता… यह बात कुंभ की मीडिया-गिरी में साबित हुई है.. क्योंकि पत्रकारिता जमीर से जिंदा होती है
और इस बार जमीर झूसी में एक तान्या मित्तल नामक युवा लड़की के आत्मा में जिंदा हो गई.. यह अलग बात है कि उसे इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी .किंतु उसे इस बात का हमेशा संतोष रहेगा कि उसने मानवता के लिए अपना सब कुछ दांव में लगा दिया। उसके अदम्य साहस को सलाम, क्योंकि असल में वह अनजाने में पत्रकार बनकर प्रगट हो गई.. किंतु यह बात किन्नर-मीडिया के समझ में नहीं आएगी क्योंकि किन्नर-मीडिया का जन्म ही पत्रकारिता के पुरुषार्थ की नसबंदी करके हुआ है…. —-( त्रिलोकी नाथ )
कॉविड१९ वायरस ने महामारी दुनिया में जो तांडव मचाया उसे मानव हत्या की जो श्रृंखला पैदा हुई उन मौतौ को छुपाने के लिए तमाम प्रकार के षड्यंत्र रचे गए. कहां क्या हुआ उसका ठेका अपने पास नहीं है किंतु शहडोल में जिस प्रकार से लाशों कि संख्या में हेरा-फेरी की गई, कानून के संरक्षण में, उसी का दूसरा स्वरूप महाकुंभ के मेले में लाशों की हेरा-फेरी के मामले में शासन के संरक्षण में दोहराया गया है. अपनी नाकामी छुपाने के लिए शासन और प्रशासन ने मिलकर इस जगन्य अपराध को जिस प्रकार से पर्दा डाला है वह लोकतंत्र का सबसे बड़ा कलंक इस कुंभ में निकाल कर आया है। हो सकता है इसके पीछे कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने की अथवा मुआवजा की राशि न देने की मंसा काम करती रही हो किंतु जिस परिवार के सदस्य मर गए हैं अथवा गायब हो गए हैं उनकी वास्तविक जानकारी न देकर अत्यंत अमानवीय कार्य किया गया .
अमेरिका में हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर की दुर्घटना एक घटना है जो व्यक्तिगत वाशिंगटन शहर की सामान्य दुर्घटना के रूप में देखा जाना चाहिए वहां के राष्ट्रपति ने उसे पर चर्चा करना मुनासिब समझा वह उनकी चिंता को जाहिर करता है. लेकिन भारत में प्रयागराज के मेला को देखा है यानी दुनिया ही नहीं ब्रह्मांड भी इस कुंभमेला को देख रहा है ऐसा उत्तर प्रदेश की सरकार और भारत की सरकार भी मानती है कि वह दुनिया एक कुटुंबकम है यह प्रयागराज में कुंभ मेला में दिखता है. इसलिए कभी 20 करोड़ कभी 30 करोड़ कभी 40 करोड़ की जनता का आने का अनुमान भी वहां लगा यह अलग बात है की प्रयागराज की भौगोलिक संरचना में उसकी कितनी भीड़ संभालने की औकात है और कितनी जनसंख्या रह रही है बावजूद हवा हवाई उड़ान सरकारी हजारों करोड़ों रुपए खर्च करने के लिए दावे किए जा रहे हैं.
बहरहाल कुंभ के मौनी अमावस में कई प्रकार करोड़ों आदमियों को तकलीफ हुई. 28 और 29 जनवरी की रात को जो भयानक मंजर कुंभ मेले में हुआ, कुंभ का जिला अधिकारी ही नहीं उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री और भारत के मंत्रिमंडल भी इसे लीपा-पोती करने में संलग्न दिखा.. पहले तो मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों ही इस पर विमर्श करने की खबर आई अंततः मुख्यमंत्री योगीनाथ को रात को बताना पड़ा की कितने लोग मरे हैं संगम की दुर्घटना में किंतु वह इस बात को छुपा ले गए की झूसी की दुर्घटना में कितने लोग मरे हैं…?
अमावस को दो दुर्घटनाएं कुंभ मेला क्षेत्र में घटी. संगम में आंकड़े 30 मृत और 90 घायल मुख्यमंत्री योगी ने घोषित किया. साथ में कहा मृतक को 25 लाख रुपए परिजन को दिए जाएंगे घायलों को क्या दिया जाएगा उन्होंने कुछ नहीं बताया.. हां मुफ्त इलाज की बात जरूर कही है। लेकिन झूसी में करीब इतनी ही संख्या में मर गए लोगों को क्या दिया जाएगा मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं कहा..बल्कि झूसी में कोई मर भी है इस बात को भी उन्होंने स्वीकार नहीं किया,जबकि झूसी की घटना में भीड़ की भगदड़ में कथित तौर पर सोशल मीडिया ने करीब 30 लोगों के मरने की खबर सामने आ रही है.
दुर्घटना के मामले में देखें तो अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के विदेश मंत्री की नजर में राष्ट्रवादी है इसलिए उसमें यह दिलेरी है कि विमान दुर्घटना को उन्होंने तत्काल अपने विचार प्रकट किया कि भारत में ना प्रधानमंत्री राष्ट्रवादी देखते हैं और ना ही मुख्यमंत्री अगर जयशंकर प्रसाद की बात माने तो. क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप जैसा दुर्घटना में टिप्पणी देने वाला साहस भारत के नेताओं में पैदा ही नहीं होता बल्कि वह कुंभ के पाखंड को बनाए रखने के लिए मृतकों की संख्या या घटना को ही छुपाने का प्रयास करते हैं.. कम से कम झूसी प्रयागराज में भगदड़ में मारे गए और घायल लोगों को भारतीय नेताओं ने छुपा ही दिया ऐसा क्यों होता है. क्योंकि भारत की राजनीति अत्यंत नैतिक रूप से पतित हो चुकी है।
दिल्ली में विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी को शिकस्त देने के लिए पूरी भारत सरकार का मंत्रिमंडल सक्रिय है वह दिल्ली में आप-दा यानी आम आदमी पार्टी ही एक आपदा है ऐसा प्रधानमंत्री परिभाषित कर रहे हैं गृहमंत्री अमित शाह भी अपने विधानसभा चुनाव में आप-दा नामक परिभाषा को खोज लिए और जमकर पूरी रात दिन राजनीति आपदा को ढूंढने में लगी रही और जब उन्होंने आपदा को खोज तो प्रयागराज की कुंभ में अमावसके एक दिन पहले संगम में आकर आपदा के विचार के साथ आकर स्नान किया परिणाम स्वरूप इन प्रकार के वीवीआईपी प्रबंधन सुरक्षा देने के कारण भारत के ही नहीं दुनिया के करोड़ों आदमियों को असुरक्षित कर दिया गया और आपदा मेला क्षेत्र में टूट पड़ी राजनीति की भाषा में कह सकते हैं जो आपदा दिल्ली में भारतीय राजनीति में खोज उसे लाकर प्रयागराज इलाहाबाद में छोड़ दिया और उसके कारण मौनी अमावस को सैकड़ो लोगों की हत्या हो गई, कुछ लोग संगम में मारे तो कुछ लोग झूसी में मर गए संगम में मीडिया था हल्ला हो गया, झूसी में मीडिया था नहीं इसलिए पूरा मेला प्रबंधन करने और दुर्घटना की पूरे साक्षी को नष्ट करने के लिए पूरी ताकत से काम किया इसके बावजूद सत्य प्रकट हो गया.
हालांकि सिर्फ संगम की मौत की दुर्घटना के मामले को लेकर हमेशा मुखर रहने वाले शंकराचार्य अविमुक्ताशरानंद सरस्वती ने कल प्रहार किया और मुख्यमंत्री योगी नाथ को झूठ बोलने के लिए तत्काल इस्तीफा देने की सलाह दी और मांग की यह अलग बात है की मुख्यमंत्री योगी नाथ झूसी की हत्या के मामले में पूरी तरह से प्रमाणित झूठ बोला और उसे छुपाने का काम किया उसे पर अभी चर्चा बाकी है
आज भारत के प्रमुख अखबारों से झूसी की दुर्घटना में मृत/ हत्या की घटना को जगह नहीं मिली है कह सकते हैं भारत का किन्नर-मीडिया का अपना एक राष्ट्रवाद है और वह भारत के तथाकथित राष्ट्रवादियों के लिए काम करता है इसलिए झूसी की हत्या के मामलों को सामने आने के बावजूद भी प्रकाशित करना उचित नहीं समझा.
भारत के नए राष्ट्रवादियों की नजर में 2014 के बाद जो आजादी आई है उसमें झूठ बोलना राष्ट्रवाद की पहली पहचान बनती चली जा रही है.. महाकुंभ का यह भी एक बाद निष्कर्ष प्रकट होता दिख रहा है शायद इसीलिए भारतीय नेता अपने राष्ट्रवाद को हर संभव बचाने का काम कर रहे हैं और कोई बात नहीं है… और भारत का किन्नर मीडिया उसे राष्ट्रवाद की रक्षा के लिए अपना नया-सनातन-धर्म की रक्षा करता दिख रहा है। बाकी सोशल मीडिया और आम आदमी जो कुछ बोलना कहता है वह कानून नहीं होता इसलिए सच गंगा के तट में कैसे मर रहा है या मारा जा रहा है यह देश की नई आजादी का सबसे बड़ा आपदा है. इस पर जरूर विचार करना चाहिए.
कहते हैं 1954 में इसी इलाहाबाद के कुंभ में जब पंडित जवाहरलाल नेहरू वीवीआईपी की व्यवस्था के कारण भगदड़ मची थी तो 200 लोग मर गए थे। तू क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल ने पंडित जवाहरलाल नेहरू की उसे रिकॉर्ड को वीवीआईपी (अति विशिष्ट व्यक्ति) कल्चर के समक्ष या उससे ज्यादा स्वयं को दिखाने के लिए प्रबंधन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया था। यह बात तो खड़ा होगा क्योंकि अनुभव से प्रशासन ने सबक क्यों नहीं लिया था..? यह सिर्फ मानवीय भूल नहीं कहलाई जा सकती, जानबूझकर भारत में पूंजीवादी व्यवस्था को फैलाने के लिए 144 साल बाद आए इस महाकुंभ का दुरुपयोग था। यह अलग बात है की पंडित नेहरू के कार्यकाल के कुंभ में जितने लोग मारे थे उससे ज्यादा इस बार के कुंभ में मारे हैं या कम अथवा उसे कम दिखने के चक्कर में मानवीय त्रासदी के रूप में घटित इस दुर्घटना में लाशों को गायब करने का अथवा उनके आंकड़ों में हेर फेर करने का काम राजनीतिज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने किया है।
लेकिन चिंता की बात नहीं जिस उद्देश्य के लिए दिल्ली की चुनाव जीतने के लिए इतना बड़ा धार्मिक इवेंट जो किया गया उसे चुनाव को जितने के बाद प्रयागराज में भगदड़ की अव्यस्था को उससे होने वाली मौतों की की सच्चाई को चुनाव की जीत से सही साबित करने का काम किया जाएगा .जिसमें संभव है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट देने के दिन प्रयागराज में स्नान करते हुए किन्नर-मीडिया के भव्य मंच में नहाते हुए दिखायी दे… क्योंकि चुनाव निष्कर्ष ही लोकतंत्र का प्रमाण पत्र बन गया है. किंतु प्रयागराज की कुंभ में जो निष्कर्ष निकल कर आया है वह इतिहास के पन्नों में कड़वा सच और योगी और संत मुख्यमंत्री योगी नाथ और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं का स्थाई कलंक बन गया है . उसे कोई नहीं झुठला सकता क्योंकि यह सच गंगा , जमुना और सरस्वती को साक्षी बनाकर घटित हुआ है. हां प्रायश्चित मानव धर्म के नाते कर सकते हैं किंतु कई मानव प्रायश्चित भी नहीं करते हैं उन्हें पाप का फल प्रारब्ध बन जाता है.. यह भविष्य तय करेगा तीर्थराज प्रयाग क्या परिणाम देते हैं।यह ठीक है कि दिल्ली में ठीक चुनाव के 3 दिन पहले महालक्ष्मी के अवतार में कुंभ से वित्त मंत्री को धन उड़लते हुए दिखाया जा रहा है किंतु प्रयागराज के कुंभ में कितनी लाशों इसकी कीमत चुका रही हैं यह भी बताना चाहिए था बाकी बजट का सच आयकर12 लाख की छूट उसे वक्त प्रमाणित होगी जब सरकारी आंकड़ों में जल्द ही तनख्वाह बढ़कर 12 लाख रुपए कर्मचारियों की सहज हो जाएगी.. टैक्स तो देना ही पड़ेगा. कुछ दिन की मस्ती है दिल्ली और बिहार का चुनाव के बाद इसके परिणाम देखने को मिलेंगे. आम गरीब आदमी तो 81 करोड़ लोग के हिस्से में 5 किलो पेट भर जिंदा रखने की कयावद इस कुंभ के सच की परछाई हमेशा पीछा करता ही रहेगा।

