
नई दिल्ली: , ।
19 जनवरी को प्रयागराज के कुंभ में टेंट में आग लगने के बाद से अराजकता का दौर रुकने का नाम नहीं ले रहा है.. महाशिवरात्रि तक यह प्रयागराज का वीआईपी कल्चर का कुंभ न जाने कितने कितने लोगों की बली लेकर दम छोड़ेगा। बहरहाल 29 जनवरी को भीड़ की भगदड़ किया अराकता ने मुख्यमंत्री आदित्य नाथ के कथन अनुसार 30 लोग मर गए थे और 60 लोग घायल हो गए थे हालांकि यह भगवा वस्त्र में रह रहे गोरखनाथ के महंत का सफेद झूठ था, वास्तव में मरने वालों की आंकड़े और घायल होने वालों के भी आंकड़े इससे बहुत ज्यादा थे। प्रयागराज के झूंसी की भगदड़ मैं मरने वाले कथित तौर पर 40 से 50 लोगों की मौत को छिपा लिया गया है इस बीच मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कुंभ की भीड़ और भगदड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग प्रकार के आदेश दिए केंद्र सरकार की तरफ से भी यातायात नियंत्रण के अधिकारी ने इस पर काम किया बावजूद देश से बुलाई गई भीड़ के लिए भारत में अराजकता का आलम रहा है। परिणाम स्वरूप बीते शनिवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन में पूर्णिमा की कुंभ समाप्त हो जाने के बाद भी जो भीड़ प्रयागराज के लिए आ रही थी वह भगदड़ के रूप में बदल गई परिणाम स्वरुप कथित तौर पर 18 निरपराध भारतीय नागरिकों की मौत हो गई इसी दौरान अलग-अलग जगह सड़क दुर्घटनाओं में कई जगह कई लोगों की करने की खबर भी आई है जो प्रयागराज के कुंभ को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ से संबंधित थी। प्रयागराज के महाकुंभ में हुई मौतौं के लिए जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने इस्तीफा नहीं दिया ना ही किसी सरकारी अमला का इस्तीफा देखा गया ऐसे में अधिकारी स्तर से रेल मंत्री के रूप में स्थापित अश्विनी बैस की स्थिति की आशा ही बेमानी है। कह सकते हैं जब लोकतंत्र भीड़ तंत्र के भेड़तंत्र में बदल जाए तो भगदड़ में करने वाले अपनी मौत मारे जा रहे हैं यह कोई नई बात नहीं है ऐसी अवधारणा यदि सफलता से स्थापित कर दी गई है तो नैतिकता के नाम पर क्यों किसी को इस्तीफा देना चाहिए.. वह तब पिछड़ा पन था जब छोटी सी दुर्घटनाओं में रेल मंत्री इस्तीफा दे देते थे
‘शनिवार रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई, रविवार को इस दुखद घटना में जीवित बचे लोगों ने अपनी आंखों के सामने हुई भयावहता को याद किया।प्रयागराज स्पेशल’ के प्लेटफॉर्म 16 पर पहुंचने की घोषणा के कारण प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, क्योंकि प्रयागराज एक्सप्रेस पहले से ही प्लेटफॉर्म 14 पर थीसूत्रों ने बताया कि प्लेटफॉर्म 14 पर पहुंचने वाले लोगों को लगा कि उनकी ट्रेन प्लेटफॉर्म 16 पर आ रही है और वे उसकी ओर दौड़ पड़े, जिससे भगदड़ मच गई।पुलिस सूत्र ने बताया कि इसके अलावा, प्रयागराज जाने वाली चार ट्रेनें थीं, जिनमें से तीन देरी से चल रही थीं, जिससे अप्रत्याशित रूप से भीड़भाड़ हो गई।एक प्रत्यक्षदर्शी ने पीटीआई को यह भी बताया, “ट्रेन के नाम और प्लेटफॉर्म बदलने को लेकर यात्रियों में भ्रम की स्थिति थी। जिसके कारण आखिरकार यह हादसा हुआ।”पिछले शनिवार शाम को मची भगदड़ में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई।दिल्ली पुलिस ने अपनी शुरुआती जांच में पाया है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ की वजह यात्रियों का ‘प्रयागराज एक्सप्रेस और प्रयागराज स्पेशल’ के बीच भ्रमित होना था, और उन्हें लगा कि शायद उनकी ट्रेन छूट जाएगी, पुलिस सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।प्रारंभिक जांच के अनुसार, भ्रम की स्थिति ट्रेनों के नाम ‘प्रयागराज’ होने की घोषणा के कारण हुई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्टेशन पर भगदड़ के कारण हुई लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया है। श्री मोदी ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।, प्रधानमंत्री ने कहा;“नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ से व्यथित हूं। मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। अधिकारीगण इस भगदड़ से प्रभावित हुए सभी लोगों की सहायता कर रहे हैं।”घटना में हुई मौतों पर शोक व्यक्त करते हुए सीपीआई (एम) ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “लोगों से अभूतपूर्व प्रचार अभियान के माध्यम से भाग लेने का आग्रह करना और फिर आवश्यक व्यवस्था न करना ही इस जान के नुकसान के पीछे की सच्चाई है। प्रथम दृष्टया, यह केंद्र और राज्य अधिकारियों द्वारा घोर कुप्रबंधन की ओर इशारा करता है।”
भगदड़ में 18 लोगों की मौत के बाद कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने इस घटना को बदइंतजामी और लापरवाही करार देते हुए सरकार से जवाब मांगा. इस पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पलटवार किया है.उन्होंने कहा, “राहुल गांधी कोई महान पंडित नहीं हैं. उन्होंने कभी सरकार नहीं चलाई है, फिर भी ऐसी बातें कर रहे हैं.अब तक 52 करोड़ लोग आ चुके हैं और प्रबंधन पूरी तरह सही तरीके से चल रहा है. अगर कोई और सरकार होती, तो और भी हादसे हो सकते थे. यूपी प्रशासन ने अच्छा काम किया है.”
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के घर में 13वें दिन के धर्मपत्नी कलावती का निधनब्यौहारी। मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता एवं मंत्री पं. राम किशोर शुक्ला के दो पुत्रों का निधन कुछ दिनों पहले हुआ था। बताया गया कि वनमाली एवं सुरेंद शुक्ला का 13वीं का कार्यक्रम शनिवार को था। इसी बीच सुबह उनकी माता कलावती शुक्ला का भी 99 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। दो पुत्रों के निधनके बाद उन्होंने खाना पीना छोड़ दिया था। उनके निधन की खबर सुनकर लोगों ने घर पहुंचकर शोक श्रद्धांजलि अर्पित की।

