
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने श्रीनगर के बादामी बाग कैंट में 15 मई, 2025 को भारतीय सेना के वीर जवानों को संबोधित करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को फिर से परिभाषित किया है, जिसके अनुसार अब भारत की धरती पर किए जाने वाले किसी भी हमले को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।” रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने हमेशा शांति को प्राथमिकता दी है और कभी भी युद्ध का समर्थन नहीं किया है, हालांकि, जब इसकी संप्रभुता पर हमला होता है, तो इसका जवाब देना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन जारी रखता है, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।उन्होंने कहा, “हमारी सेनाओं ने दुनिया को दिखा दिया है कि उनका निशाना सटीक और कारगर है तथा गिनती का काम दुश्मनों पर छोड़ दिया गया है।”कर्नल कुरैशी पर टिप्पणी: न्यायालय ने मप्र के मंत्री से किया प्रश्न, याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को
नयी दिल्ली: 15 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कर्नल सोफिया कुरैशी के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को बृहस्पतिवार को फटकार लगाते हुए कहा कि जब देश में ‘‘ऐसे हालात हैं’’ उस वक्त किसी मंत्री के मुख से निकला एक-एक शब्द जिम्मेदारी भरा होना चाहिए।प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई ने शाह के वकील से कहा, ‘‘आप (याचिकाकर्ता) किस तरह के बयान दे रहे हैं? आप सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री हैं।’’
ट्रंप ने एक और बड़ी घोषणा की है। हमारे प्रधानमंत्री पूरी तरह चुप-कांग्रेस
नयी दिल्ली: 15 मई (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस घोषण पर पूरी तरह चुप हैं कि भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर सभी शुल्क हटाने की पेशकश की है।कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘वाणिज्य मंत्री वाशिंगटन डीसी में हैं और राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहा से एक और बड़ी घोषणा की है। हमारे प्रधानमंत्री पूरी तरह चुप हैं। उन्होंने क्या सहमति दी है? और ऑपरेशन सिंदूर को रोकने से इसका क्या संबंध है?’’कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को सरकार की ओर से उच्चतम स्तर पर खारिज करते हुए स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए क्योंकि भारत-पाकिस्तान के बीच ‘‘अमेरिकी मध्यस्थता’’ और आतंकवाद के बजाय कश्मीर मुद्दे को उछालना कभी स्वीकार नहीं हो सकता।

