
राजेंद्र नगर आवासीय कॉलोनी में प्रमुख सड़क पर बन गई डबल स्टोरी कॉमर्शियल बिल्डिंग… ठेकेदार पजेशन देकर फरार होने की फिराक में..
शहडोल,
नगर पालिका परिषद ने टाउन प्लानर के तहत घोषित 30 फीट की सड़क पर भवन निर्माण की अनुमति देकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार के आरोपों को बल दे रहा है, बल्कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठा रहा है। शहडोल के राजेंद्र नगर कॉलोनी, जो 1963 पटवारी हल्कासोहागपुर की आराजी खसरा नंबर 1849 और 1847 सहित अन्य भाग पर बनाया गया था में टाउन प्लानर के तहत स्थापित शहर की पहली कॉलोनी सोहागपुर के राजा मृगेंद्र सिंह के द्वारा विधिवत टाउन प्लैनिंग के तहत बनवाई गई थी, यह कॉलोनी कमिश्नर बंगले और कमिश्नर कार्यालय के बीच में बनवाई गई थी जिसमें राजेंद्र टॉकीज के पीछे एक 30 फीट चौड़ी सड़क पर नगर पालिका परिषद भवन निर्माण की न सिर्फ अनुमति दी बल्कि बहुचर्चित ठेकेदार द्वारा यह कार्य भी हाथ में लिया गया। अनुमति मिनांशु मस्ता नामक व्यक्ति को दी गई, जो कथित तौर पर एक बैंक के लिए किराए पर देने हेतु लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से भवन बना रहा है। क्षेत्रीय पार्षद संजीव सिंह का कहना है उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। क्योंकि यह सड़क कॉलोनी की मुख्य सड़कों में से एक है और टाउन प्लानिंग नियमों के तहत इसे खाली रखा जाना चाहिए था।
भ्रष्टाचार के आरोप और सवाल-स्थानीय जन चर्चा में यह सवाल गूंज रहा है कि मिनांशु मस्ता को इस अनुमति के लिए किस नेता का संरक्षण प्राप्त है। सूत्रों के अनुसार, जिस ठेकेदार द्वारा यह निर्माण किया जा रहा है, वह पूर्व में एक प्रमुख भाजपा नेता के लिए न सिर्फ काम करता था बल्कि नगर पालिका में वह नेता का पर्यायवाची माना जाता है। अब सवाल उठता है कि क्या भ्रष्टाचार के अवसर कम पड़ गए हैं कि नगर पालिका को सड़क जैसे सार्वजनिक स्थान पर भवन निर्माण की अनुमति देनी पड़ी?आरोप यह भी है कि नगर पालिका मे इस निर्माण से संबंधित सभी फाइलें गायब कर दी हैं, जो इस मामले को और संदिग्ध बनाता है। यह पारदर्शिता की कमी और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की अनुमति न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि कॉलोनी के निवासियों के लिए यातायात और सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरा पैदा कर सकती है।
कानूनी स्थिति-यह मामला वर्तमान में शहडोल जिला न्यायालय में लंबित है। 31 जुलाई 2025 को इस मामले की सुनवाई हुई थी, जिसमें यह तय किया जाना था कि इस निर्माण पर स्थगन आदेश जारी किया जाए या नहीं। अदालत का फैसला न केवल इस विशेष मामले को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि नगर पालिका ने सड़क पर निर्माण की अनुमति क्यों और कैसे दी। निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की नजर इस फैसले पर टिकी है, क्योंकि यह भविष्य में इस तरह के मामलों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
नगर पालिका की भूमिका पर सवाल- शहडोल नगर पालिका पहले भी विवादों में रही है। 2022 के निकाय चुनाव परिणामों के अनुसार, शहडोल नगर पालिका में भाजपा ने 17 वार्डों में जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस ने 12 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 9 सीटें जीती थीं। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इस तरह की भ्रष्टाचार पूर्ण
अनुमतियों के पीछे राजनीतिक संरक्षण का खेल चल रहा है? क्योंकि अनुमति देने वाला संबंधित इंजीनियर इस मामले की जांच करने से पूरी तरह से बच रहा है और फाइल की अनदेखी करके मामले को दबाने के तमाम प्रयास करता दिख रहा है। नगर पालिका द्वारा फाइलें गायब करने और नियमों की अनदेखी करने के आरोप न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए सिस्टम का दुरुपयोग किया जा रहा है।
जनता की मांग और भविष्य- स्थानीय निवासियों ने इस निर्माण के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है और मांग की है कि इसकी निष्पक्ष जांच हो। वे चाहते हैं कि नगर पालिका न केवल इस अनुमति को रद्द करे, बल्कि इस तरह के भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करे। किंतु देखा गया है कि कांग्रेस पार्टी के पार्षद भी इस मामले में मूकबधिर हो गए हैं क्योंकि वह नेता से भयभीत रहते हैं। शहडोल के राजेंद्र नगर कॉलोनी में सड़क पर भवन निर्माण की अनुमति का मामला नगर पालिका की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह घटना न केवल टाउन प्लानिंग नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का भी प्रतीक है। जिला न्यायालय का आगामी फैसला इस मामले में महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह न केवल इस निर्माण को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए एक मिसाल भी कायम कर सकता है।
इस प्रकार राजेंद्र नगर कॉलोनी निवासी खनिज विभाग से सेवानिवृत्ति माईनिंग सर्वेयर 73 वर्षीय वयोवृद्ध का चंद्रिका प्रसाद शुक्ला और उनके परिवार नगर पालिका के इस पारदर्शी भ्रष्टाचार से न सिर्फ उनके इस आवासीय कॉलोनी में कमर्शियल भवन निर्माण हो जाने पर अपने आवासीय कॉलोनी के प्रमुख सड़क मार्ग को खो दिया है बल्कि नगर पालिका की इस पारदर्शी भ्रष्टाचार में शुक्ल की करीब 1000 वर्ग फीट जमीन मिनांशु मस्ता ने नगर पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार से पैदा नेता और उसके ठेकेदार के कारण मानसिक प्रताड़ना के साथ अपनी संपत्ति भी छुड़ाने की लड़ाई विभिन्न राजस्व न्यायालय में लड़ने को बाध्य हैं।कांग्रेस का नगर पालिका अध्यक्ष है तो भाजपा का भ्रष्ट नेता यह काम कैसे होने दे रहा है इससे यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार के मामले में दोनों नेताओं की एक ही जाति है और वह है भ्रष्टाचार की जाति। शायद इसी जातिगत दोष के कारण शहडोल कलेक्ट्रेट में माईनिंग सर्वयर पर पद पर शहडोल अनूपपुर और उमरिया जिले में पूरी नाप करने वाले चंद्रिका प्रसाद शुक्ला को अब 73 वर्ष की उम्र में न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। देखना होगा कि क्या न्यायालय उन्हें राहत भी देता दिख रहा है….निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि इस मामले की गहन जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए। यह देखना बाकी है कि क्या शहडोल नगर पालिका इस विवाद को सुलझाने और अपनी विश्वसनीयता बहाल करने में सक्षम होगी, या यह मामला भ्रष्टाचार के एक और काले अध्याय के रूप में दर्ज हो जाएगा।

