सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिका ने 10फीसदी ग्लोबल टैरिफ लागू/कांग्रेस के  उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा – लिखा-परिवार को समय नहीं दे पा रहा

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अमेरिका ने 10फीसदी ग्लोबल टैरिफ लागू

नई दिल्ली    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में जन्म आधारित नागरिकता पर सुनवाई तय | US Supreme  Court to hear case on birth-based citizenship  समाचार एजेंसी ईएमएस के अनुसार     मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका दिया। कोर्ट ने कहा कि 1977 के आईईईपीए कानून के तहत राष्ट्रपति को व्यापक आयात शुल्क लगाने का स्पष्ट अधिकार नहीं है। संविधान के मुताबिक यह शक्ति कांग्रेस के पास है। सीजेआई तीन न्यायाधीशों ने बहुमत का समर्थन किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भयानक और लुडिक्रस बताया। उन्होंने कहा कि मैं आईईईपीए के तहत 1 डॉलर भी नहीं ले सकता। मैं व्यापार बंद कर सकता हूं, देश की ट्रेड व्यवस्था खत्म कर सकता हूं, लेकिन 1 डॉलर शुल्क नहीं लगा सकता यह कितना हास्यास्पद है? ट्रंप ने आरोप लगाया कि अदालत विदेशी हितों से प्रभावित है और कहा कि अन्य देश इस फैसले से खुश हैं, लेकिन ज्यादा दिन नहीं नाचेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाने का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन करने की घोषणा की।टैरिफ को लेकर अमेरिकी अदालती घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के साहसिक कदम की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अदालत की वैचारिक बनावट के बावजूद 6-3 का यह निर्णय ट्रंप की पूरी टैरिफ रणनीति के लिए एक बड़ा झटका है। रमेश के अनुसार, यह फैसला राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश लगाने और लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा उदाहरण है। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस फैसले के बहाने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अमेरिकी अदालत में यह मामला लंबित था, तो भारत सरकार ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई?उधर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किए बिना मोदी सरकार ने इतनी जल्दबाजी में ट्रैप डील में शामिल क्यों हुए, इससे भारत से भारी रियायतें छीन लीं। बता दें अमेरिका ने 2 फरवरी को भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया था। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को बताया कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी के अंत तक फाइनल होगा। उधर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को अवैध बताकर रद्द किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाकर कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है। इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि मोदी जी को देशवासियों के सामने खड़े होकर सच्चाई बतानी चाहिए। किसने या किन कारणों ने आपको भारत के राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता करने के लिए दबाव डाला? क्या यह एप्सटीन फाइल्स थीं। 

5 ग्राम नमक का सेवन करना चाहिए

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एक व्यक्ति को प्रतिदिन अधिकतम 5 ग्राम नमक का सेवन करना चाहिए, जो लगभग एक छोटा चम्मच होता है। यह मात्रा केवल खाने में डालने वाले नमक की नहीं, बल्कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद छिपे सोडियम को मिलाकर तय की गई है। हालांकि भारतीय खानपान में रोजाना लगभग 10–12 ग्राम नमक लिया जाता है, जो सुरक्षित सीमा से दोगुना है। नमक की इस अधिकता से हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में सूजन, हड्डियों का कमजोर होना, यूरिक एसिड का बढ़ना, किडनी पर बोझ, शरीर में पानी की कमी और चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां जैसी समस्याएं पनपने लगती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नमक का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए।रात के समय अत्यधिक नमकीन चीजें खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि इससे अगले दिन चेहरे पर सूजन दिख सकती है। वहीं दही या लस्सी में भी सफेद नमक का उपयोग कम करना चाहिए; इसकी जगह हल्की मात्रा में नमक और भुना जीरा बेहतर विकल्प है।

कांग्रेस के  उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा – लिखा-परिवार को समय नहीं दे पा रहा

भोपाल (ईएमएस) । भिंड जिले की अटेर सीट से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे के मध्य प्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। कटारे ने इस्तीफा पत्र में लिखा कि परिवार और क्षेत्र की जनता को पर्याप्त समय नहीं दे पाने के कारण वे यह जिम्मेदारी छोड़ रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े को भेजे पत्र में लिखा कि संगठन जिसे चाहे इस पद की जिम्मेदारी दे, वे पूर्ण सहयोग करेंगे। पार्टी ने उन्हें इस योग्य समझा, इसके लिए वे हमेशा आभारी रहेंगे।

न्यायालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के असमान अनुपालन पर चिंता , निर्देश जारी 

नयी दिल्ली: 21 फरवरी (भाषा) ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियमों के देश भर में “असमान” अनुपालन को रेखांकित करते हुए, उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि मौजूदा कार्यान्वयन अंतराल के बने रहने के दौरान वर्तमान पीढ़ी आगे के विधायी सुधार की प्रतीक्षा नहीं कर सकती है।स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को जीवन के अधिकार का “अविभाज्य हिस्सा” मानते हुए न्यायालय ने पूरे भारत में लागू होने वाले अनेक निर्देश जारी किए, ताकि कार्यपालिका के पास एक अप्रैल से प्रभावी होने वाले एसडब्ल्यूएम नियम, 2026 को लागू करने के लिए आवश्यक तंत्र उपलब्ध हो।

 


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