6 को प्रस्थान,11 मार्च 26 को लखनऊ में धर्म युद्ध शंखनाद -शंकराचार्य; स्पष्ट किया गौ-ब्राह्मण की रक्षा को सनातन धर्म का मूल

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  शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कल होगा माघ मेले में आगमन,  करेंगे गौ संसद - Dainik Janjagran News  काशी (वाराणसी) के ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 1 मार्च 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस (पत्रकार वार्ता) में मुख्य रूप से गौ माता की रक्षा और उत्तर प्रदेश सरकार को अंतिम चेतावनी दी।”गौ” का अर्थ केवल गाय नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से गौ-ब्राह्मण की रक्षा का प्रतीक है। गौ-ब्राह्मण की रक्षा को सनातन धर्म का मूल माना जाता है,
उन्होंने कहा किमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गौ माता को राज्य माता (या राष्ट्रमाता) घोषित करने और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए 40 दिन का समय दिया गया था (यह अल्टीमेटम जनवरी 2026 में शुरू हुआ था)।अब 30 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई या संकेत नहीं मिला। इसलिए 11 मार्च 2026 को गोप्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध शंखनाद यात्रा का ऐलान किया जाएगा। लखनऊ में धर्मयुद्ध का शंखनाद होगा, और यदि जरूरत पड़ी तो आगे का फैसला लिया जाएगा।
यात्रा का कार्यक्रम: 6 मार्च को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर काशी से प्रस्थान (संकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसा पाठ के बाद), जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली होते हुए लखनऊ पहुंचेंगे।
उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को ‘गो-ब्राह्मण प्रतिपालक’ बताया, जिनकी जयंती (चैत्र कृष्ण तृतीया, 6 मार्च 2026) पर काशी के शंकराचार्य घाट पर गंगा पूजा के साथ गो प्रतिष्ठार्थ वैचारिक धर्मयुद्ध का संकल्प लिया जाएगा।उन्होंने कहा कि सनातन गौ की रक्षा के लिए वे सदा लड़ेंगे, और इस धर्मयुद्ध में सभी प्रहारों का सामना करने को तैयार हैं। इसमें हिंसा का कोई स्थान नहीं होगा, बल्कि यह वैचारिक और शांतिपूर्ण आंदोलन होगा।

यह प्रेस वार्ता मुख्य रूप से गौ रक्षा और धर्मयुद्ध के मुद्दे पर केंद्रित थी। साथ ही, हाल के यौन शोषण के आरोपों (जो फरवरी में चर्चा में थे) का सीधा जिक्र नहीं मिला, लेकिन संदर्भ में यह प्रेस कॉन्फ्रेंस गौ संरक्षण आंदोलन को आगे बढ़ाने वाली लगती है।शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि “गौ” का अर्थ केवल गाय नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से गौ-ब्राह्मण की रक्षा का प्रतीक है। गौ-ब्राह्मण की रक्षा को सनातन धर्म का मूल माना जाता है, और इसे धर्मयुद्ध के रूप में देखा जा रहा है।

 

 

 


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