अमरकंटक साडा के नए अध्यक्ष राजेंद्र भारती: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की चुनौती

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अमरकंटक साडा के नए अध्यक्ष राजेंद्र भारती: पर्यावरण संरक्षण और विकास की चुनौती

     शहडोल निवासी राजेंद्र भारती को हाल ही में अमरकंटक विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि वाले समर्पित संघ परिवार के सदस्य राजेंद्र भारती अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में भी सक्रिय रहे हैं। उनकी नियुक्ति अमरकंटक के पर्यावरणीय संकट और विकास की मांग के बीच एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।इससे पहले शहडोल से पत्रकार रहे भोलानाथ राव कांग्रेस की ओर से अमरकंटक साडा के पहले अध्यक्ष बने थे। प्रशासनिक दृष्टि से संयुक्त शहडोल जिले के विभाजन के बाद राजेंद्र भारती को अमरकंटक साडा का पहला अध्यक्ष माना जाएगा।
अमरकंटक: पवित्रता और पर्यावरणीय चुनौतियां
अमरकंटक मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित है, जो नर्मदा, सोन और जोहिला नदियों का उद्गम स्थल है। यह आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जहां लाखों श्रद्धालु वर्ष भर आते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार अमरकंटक नगर पंचायत की जनसंख्या 8,416 थी (4,514 पुरुष और 3,902 महिलाएं), क्षेत्रफल लगभग 47 वर्ग किलोमीटर। घनत्व 181 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व (AABR) का हिस्सा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 3,835.51 वर्ग किलोमीटर (383,551 हेक्टेयर) है। इसमें कोर जोन 551.55 वर्ग किलोमीटर (छत्तीसगढ़ में), बफर और ट्रांजिशन जोन बाकी क्षेत्र में फैला है। रिजर्व का लगभग 63.91% हिस्सा वन क्षेत्र है। यह नर्मदा बेसिन का ऊपरी क्षेत्र है, जो मध्य भारत की जल व्यवस्था के लिए बेहद संवेदनशील है।
पिछले कुछ दशकों में अमरकंटक में तेजी से बदलाव आया है। 1980 से 2018 के बीच अध्ययनों से पता चलता है कि:
घने मिश्रित वनों (Dense Mixed Forest) में 11.63% की कमी।
सैल मिश्रित वनों में 2.11% की कमी।
जल निकायों में 5.08% की कमी।
खुली भूमि में 7.52% की वृद्धि।
कृषि क्षेत्र में 7.10% की वृद्धि।
मानव बस्तियों/व्यावसायिक भवनों में 4.18% की वृद्धि।
कुल मिलाकर लगभग 6.70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन से अन्य उपयोग में बदला गया। तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या, आश्रमों का निर्माण (ज्यादातर कंक्रीट), पर्यटन परियोजनाएं और अनियोजित विकास ने पर्यावरण को बुरी तरह प्रभावित किया है।
शिवराज सिंह चौहान सरकार ने क्षतिग्रस्त अमरकंटक में अनावश्यक निर्माण पर रोक लगाई थी, लेकिन PRASHAD योजना आदि के तहत कॉरिडोर, ग्लास ब्रिज और अन्य पर्यटन परियोजनाओं ने कंक्रीट के जंगल को बढ़ावा दिया। साधु-संतों और माफिया तत्वों द्वारा कथित कब्जे की शिकायतें भी आम हैं। मूल अमरकंटकवासियों के बजाय बाहरी बस्तियों का विस्तार एक बड़ी चिंता है।
राजेंद्र भारती के सामने चुनौतियां और अवसर
राजेंद्र भारती की पृष्ठभूमि में ईमानदारी, सादगी और अनुभव को देखते हुए यह नियुक्ति सकारात्मक मानी जा रही है। उनके लिए प्रमुख चुनौतियां हैं:
पर्यावरण संरक्षण: हजारों साल पुराने वृक्षों को बचाना, नर्मदा के उद्गम की पवित्रता बनाए रखना और बायोस्फियर रिजर्व की अखंडता सुनिश्चित करना।
सतत विकास: पर्यटन को बढ़ावा देते हुए अनियोजित निर्माण पर रोक, सीवेज ट्रीटमेंट और इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर।
स्थानीय vs बाहरी: मूल निवासियों के हितों की रक्षा करते हुए विकास कार्य।
आध्यात्मिक आयाम: जीवन के चौथे चरण में अमरकंटक की सेवा उनके लिए व्यक्तिगत अवसर भी है।
शहडोल के नागरिक के नाते वे इस संवेदनशील क्षेत्र में ‘मील का पत्थर’ साबित हो सकते हैं, बशर्ते वे संघ परिवार की सेवा भावना और प्रशासनिक कुशलता का संयोजन करें।अमरकंटक न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र भी। राजेंद्र भारती यदि कंक्रीट के जंगल को हरा-भरा बनाने, नदियों के उद्गम की रक्षा करने और सतुलित विकास करने में सफल होते हैं, तो यह मध्य प्रदेश ही नहीं, पूरे भारत के लिए उदाहरण बनेगा। उनकी सफलता अमरकंटक को पुनः प्राचीन गौरव और प्राकृतिक सौंदर्य लौटा सकती है।


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