तमिलनाडु लोकतंत्र में ताजगी की एक किरण तय प्रारूप से हटकर शपथ ग्रहण,राज्यपाल ने टोका

तमिलनाडु लोकतंत्र में ताजगी की एक किरण
भारतीय लोकतंत्र इन दिनों अक्सर रटे-रटाए स्क्रिप्टेड नाटकों का मंच बनता जा रहा है। शपथ ग्रहण समारोह भी ज्यादातर औपचारिकता बनकर रह जाते हैं—कुछ भाषण, कुछ मुस्कानें, कुछ तस्वीरें और फिर वही पुरानी कठपुतली वाली राजनीति। लेकिन 10 मई 2026 को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में जो माहौल देखने को मिला, वह कुछ अलग था। अभिनेता से राजनेता बने थलपति सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और साथ में एक अनोखा उत्साह, जन-जोश और अप्रत्याशितता का मिश्रण भी।
विजय का यह उदय महज एक और सिनेमा स्टार का राजनीतिक सफर नहीं है। यह उस थकान भरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक ताजा हवा का झोंका है, जिसे कई लोग अब उबाऊ और पूर्व-निर्धारित मान चुके थे। TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) के नेतृत्व में विजय ने पहली ही बार में सत्ता तक पहुंच बनाई। ड्राविड़ पार्टियों (DMK-AIADMK) की दशकों पुरानी द्वंद्व वाली राजनीति को चुनौती देते हुए उन्होंने न सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी बनाई, बल्कि गठबंधन के सहारे बहुमत हासिल कर लिया। शपथ ग्रहण का समारोह भव्य था—जनता का उल्लास, संगीत, राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ का पूरा गान, जो प्रोटोकॉल से थोड़ा इतर भी लगा। विजय ने शपथ के दौरान खुद भाषण शुरू कर दिया, जिस पर राज्यपाल को उन्हें टोकना पड़ा—यह छोटा सा प्रसंग भी उनकी ‘अचानक धमाल’ वाली छवि को मजबूत करता है।
( त्रिलोकी नाथ )
लोकतंत्र की संभावनाएं फिर जिंदा
लेखक की बात सही है कि भारतीय राजनीति में युवा चेहरे अक्सर ‘आर्थिक साम्राज्यवाद’ या सत्ता के खेल के सामने जल्दी ही थक जाते हैं या समझौता कर लेते हैं। राहुल गांधी के साथ जुड़े कई युवा नेता समय के साथ या तो गायब हो गए या स्थापित ताकतों के सामने नतमस्तक। ऐसे में विजय जैसे एक नये, ऊर्जावान और जन-प्रिय चेहरे का उदय कांग्रेस समेत
[ लोकतंत्र की संभावनाएं फिर जिंदा
बात सही है कि भारतीय राजनीति में युवा चेहरे अक्सर ‘आर्थिक साम्राज्यवाद’ या सत्ता के खेल के सामने जल्दी ही थक जाते हैं या समझौता कर लेते हैं। राहुल गांधी के साथ जुड़े कई युवा नेता समय के साथ या तो गायब हो गए या स्थापित ताकतों के सामने नतमस्तक। ऐसे में विजय जैसे एक नये, ऊर्जावान और जन-प्रिय चेहरे का उदय कांग्रेस समेत विपक्षी खेमे के लिए भी एक नई उम्मीद की किरण बन सकता है। राहुल गांधी खुद समारोह में मौजूद रहे, जो दक्षिण में INDIA गठबंधन की एक नई शुरुआत का संकेत देता है।
विजय का अभियान ‘विजय’ पाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने सिनेमा की लोकप्रियता को राजनीतिक जागरूकता और युवा आकर्षण में बदला। उनकी पार्टी ने युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों को खास तौर पर जोड़ा। जब पुरानी पार्टियां थकान और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई थीं, तब विजय ने परिवर्तन का नारा दिया। उनका शपथ ग्रहण महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र के उत्सव जैसा लगा—जहां जनता अपनी पसंद को सत्ता तक पहुंचाते हुए खुश नजर आई।
चुनौतियां भी कम नहीं
फिर भी, यह रोमांस कितना टिकाऊ होगा, यह समय बताएगा। विजय को अब सत्ता संभालनी है—200 यूनिट फ्री बिजली जैसे वादों को पूरा करना, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और विकास को संतुलित करना होगा। गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दलों (कांग्रेस, वीसीके आदि) को संभालना, प्रशासन को सुधारना और ड्राविड़ मॉडल की सकारात्मक विरासत को आगे बढ़ाते हुए नई दिशा देना आसान नहीं होगा। सिनेमा की चमक राजनीति की कसौटी पर कितनी टिकती है, यह उनके कार्यकाल पर निर्भर करेगा।
फिर भी, इस एक घटना ने साबित कर दिया कि लोकतंत्र अभी पूरी तरह मुरझा नहीं गया है। अप्रत्याशित चेहरे, नई पार्टियां और जन-उत्साह अभी भी पुरानी व्यवस्था को हिला सकते हैं। तमिलनाडु का यह ‘विजय अभियान’ न सिर्फ दक्षिण भारत बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है—लोकतंत्र में असली रोमांस तब आता है जब जनता की इच्छा स्क्रिप्ट से आगे निकलकर सत्ता तक पहुंच जाती है।जैसा कि कहा गया—“विजय” ने लोकतंत्र को संभावनाओं से खाली होने से बचा लिया है। अब देखना यह है कि यह नया अध्याय कितना प्रेरणादायक और कितना टिकाऊ साबित होता है। लोकतंत्र का आनंद इसी में है—हर बार उम्मीद बंधती है, कभी-कभी टूटती भी है, लेकिन फिर नई शुरुआत होती है।लोकतंत्र में कल क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन आज जिंदा है लोकतंत्र को हम बचा हुआ देख रहे हैं तो उसका आनंद जरूर लेना चाहिए… बाकी इस देश में राम राज्य लागू हो चुका है होईहै वही राम रचि राखा…..
तय प्रारूप से हटकर शपथ ग्रहण,राज्यपाल ने उन्हें टोका
चेन्नई: 10 मई (भाषा) तमिलनाडु में टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय ने रविवार को पूर्व निर्धारित प्रारूप से हटकर और अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य को दर्शाने के लिए हाथ के इशारे करके शपथ ग्रहण समारोह को एक प्रभावशाली शपथ भाषण में बदलने का प्रयास किया। हालांकि, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने हस्तक्षेप किया और उन्हें आधिकारिक शपथ के प्रारूप तक ही सीमित रहने को कहा।राज्यपाल द्वारा शपथ दिलाना शुरू करते ही विजय ने पूर्व निर्धारित प्रारूप से हटकर बोलना शुरू किया, ‘‘मैं, सी. जोसेफ विजय, भारत के विधिवत स्थापित संविधान के प्रति निष्ठावान रहूंगा… तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में, मैं ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वाह करूंगा। मैं कानून के शासन का पालन करूंगा, ईमानदारी से काम करूंगा, घृणा को दूर करूंगा और जनता के सभी वर्गों के लिए ईमानदारी से काम करूंगा। मैं ईश्वर की कसम खाकर यह शपथ लेता हूं।’’
बेंगलुरु:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कर्नाटक में अंदरूनी सत्ता संघर्षों के कारण वह सुशासन देने में ‘नाकाम’ रही है, और उसने लोगों को ‘धोखा’ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज यह एक ‘परजीवी पार्टी’ बन गई है। तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK के रिश्तों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस सालों तक DMK के समर्थन की वजह से ही राजनीतिक रूप से टिकी रही, लेकिन अब जब सत्ता के समीकरण बदले, तो उसने इस क्षेत्रीय पार्टी की “पीठ में छुरा घोंप दिया”।वह कांग्रेस द्वारा DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होने के बाद, अभिनेता-राजनेता विजय के नेतृत्व वाली TVK को तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की बात कर रहे थे।कमल हासन और आर माधवन सहित कई हस्तियों ने टीवीके अध्यक्ष चंद्रशेखर जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी और इसे ‘‘ऐतिहासिक जीत’’ बताया।
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