
मालवीय नगर होटल अग्निकांड हृदयविदारक त्रासदी,
नयी दिल्ली: तीन जून (भाषा)दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके की एक तंग गली में स्थित एक होटल में बुधवार को भीषण आग लग गई, जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें वे विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनके बीमार रिश्तेदारों का पास के अस्पतालों में इलाज चल रहा था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मालवीय नगर के एक होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बुधवार को इस हादसे को ‘हृदयविदारक त्रासदी’ बताया और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

’’मालवीय नगर इलाके में स्थित ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ होटल में लगी भीषण से लोगों को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने कोई समय गंवाए इमारत की खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए और सड़क पर गद्दे बिछा दिए।शहर के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल ने कहा कि दक्षिण दिल्ली के हौज रानी इलाके में बुधवार को ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ होटल में लगी भीषण आग के बाद 18 लोगों को मृत अवस्था में लाया गया, जबकि 15 अन्य को गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराया गया।अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में कम से कम 21 लोगों की जान चली गई और घायलों की हालत गंभीर होने के कारण मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
नयी दिल्ली: तीन जून (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन के अधिकारों से वंचित रखना चाहते हैं।पार्टी के आदिवासी प्रकोष्ठ द्वारा कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह टिप्पणी की।
कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार
बेंगलुरु(ईएमएस)।
दक्षिण भारत के अहम दुर्ग कर्नाटक की सियासत में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा रहा है। कड़कड़ाती राजनीतिक धूप और लंबे इंतजार के बाद आखिरकार वो पल आ ही गया, जिसका कार्यकर्ताओं को बेसब्री से इंतजार था। आज (3 जून) राज्य के कद्दावर और संकटमोचक नेता डी.के. शिवकुमार कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने जा रहे हैं। इस महा-शपथ ग्रहण समारोह को लेकर पूरी सिलिकॉन वैली (बेंगलुरु) में उत्साह का ऐसा समंदर उमड़ा है कि मंगलवार रात से ही नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा हुआ है। मनोनीत मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के आवास के बाहर सुरक्षा के इतने कड़े और चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। इस बड़े नेतृत्व परिवर्तन पर दिल्ली से बेंगलुरु तक नेताओं के दिल भावुक और उत्साह से लबरेज हैं। महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने इस मौके पर खुशी जाहिर करते हुए इसे पार्टी के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, यह हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दिन है। मुझे बेहद खुशी है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को कार्यसमिति का सदस्य नियुक्त कर उनका मान बढ़ाया गया है, और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अब मुख्यमंत्री का पदभार संभाल रहे हैं, जो कर्नाटक में एक नई और सुनहरे सवेरे की शुरुआत का प्रतीक है। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन और पर्यटन मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ भी इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने बेंगलुरु पहुंच चुके हैं।
सोना बेचने की खबरें गलत, भौतिक भंडार 880.52 टन पर स्थिर: आरबीआई
मुंबई: तीन जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोने की बिक्री की खबरों को बुधवार को खारिज करते हुए कहा कि भौतिक स्वर्ण भंडार में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह 880.52 टन पर स्थिर बना हुआ है।आरबीआई ने उन खबरों के बाद यह स्पष्टीकरण जारी किया है जिनमें दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के प्रभाव से विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा के लिए केंद्रीय बैंक ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है।
देश की न्याय व्यवस्था–लंबित मुकदमों और जमानत संबंधी समस्याओं ने कारागारों में बढ़ाई भीड़ –
नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत की जेलों में बंद कैदियों का एक बड़ा हिस्सा अभी तक किसी अपराध में दोषी सिद्ध नहीं हुआ है। आंकड़ों के अनुसार देश की जेलों में बंद कुल कैदियों में से लगभग 73 से 74 प्रतिशत विचाराधीन (अंडरट्रायल) हैं, जिन्हें अपने मामलों में अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति देश की न्यायिक प्रक्रिया में देरी और जेल प्रबंधन की गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक देशभर की जेलों में पांच लाख से अधिक कैदी बंद हैं। इनमें लगभग तीन-चौथाई ऐसे हैं जिनके मामलों का अभी निपटारा नहीं हुआ है। वहीं दोष सिद्ध कैदियों की हिस्सेदारी केवल 25 से 26 प्रतिशत के आसपास है। इस असंतुलन का सीधा असर जेलों की क्षमता पर पड़ रहा है। विशेष चिंता की बात यह है कि विचाराधीन कैदियों में युवाओं की संख्या काफी अधिक है। रिपोर्टों के अनुसार करीब आधे अंडरट्रायल कैदी 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के हैं। सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण युवाओं का एक महत्वपूर्ण समय जेलों में बीत जाता है, जिसका उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। निर्धारित क्षमता से अधिक कैदी देश की अधिकांश जेलें अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक कैदियों का बोझ उठा रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर जेलों का औसत ऑक्यूपेंसी रेट 120 प्रतिशत से अधिक बताया जाता है। कई राज्यों में स्थिति और भी गंभीर है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की जेलों में क्षमता से लगभग दोगुने कैदी बंद होने की बात सामने आती रही है। इससे कैदियों के रहने, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार मामलों के लंबित रहने की बड़ी वजह अदालतों में मुकदमों का भारी बोझ है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अनेक आरोपी जमानत राशि जमा नहीं कर पाते या सक्षम कानूनी सहायता हासिल नहीं कर पाते, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ता है।
अब ममता के पास सिर्फ 22 विधायक, बागी गुट ने पत्र में ममता को अध्यक्ष बताया
कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में ममता की टीएमसी में फूट पड़ गई है। सोमवार को पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी के 58 बागी एमएलए ने विधायक दल का नेता घोषित कर दिया। बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मिलकर समर्थन पत्र भी सौंपा। जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता बनाया गया है। वहीं अखरुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल में हुए चुनाव में टीएमसी ने 80 सीटें जीतीं थीं। 58 विधायकों की बगावत के बाद अब ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। हालांकि बागी गुट ने अपने पत्र में ममता बनर्जी को अब भी पार्टी अध्यक्ष बताया है, लेकिन वे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और विधायक दल से जुड़े फैसलों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। सोमवार को अभिषेक बनर्जी के लेटर हेड पर स्पीकर को भेजे गए पत्र में शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने का प्रस्ताव भेजा था। विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने शिकायत की थी कि इस प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। शिकायत के बाद ममता ने दोनों विधायकों को पार्टी से निकाल दिया था। पार्टी के अंदर बगावत के बीच ममता बनर्जी ने बुधवार को राज्य की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी अब पूरे संगठन का पुनर्गठन करेगी।
बैंक और कर्जदार समझौता हुआ है, तो बाद उसी मामले में आपराधिकसही नहीं-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा- इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ता है बुरा प्रभाव नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी बैंक और कर्जदार के बीच लोन खाते को लेकर समझौता हुआ है, तो उसके बाद उसी मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना सही नहीं है। जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि बैंकिंग लेनदेन से जुड़े विवाद मुख्य रूप से व्यावसायिक और दीवानी प्रकृति के होते हैं। जब दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद का निपटारा कर लेते हैं, तब आपराधिक मुकदमा जारी रखना कर्जदार के लिए उत्पीड़नकारी होगा और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग भी माना जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक मामले में एक कारोबारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने बताया कि उसने बैंक के साथ डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल के समक्ष समझौता कर लिया था और 6.49 करोड़ रुपए की बकाया राशि के बदले 4.25 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद बैंक ने दो साल बाद धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया, जिसकी जांच सीबीआई ने की और चार्जशीट दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामला रद्द करते हुए कहा कि समझौते के बाद बैंक द्वारा मुकदमा शुरू करना सद्भावना की कमी को दर्शाता है। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में अभियोजन जारी रहने दिया गया, तो लोग और कारोबारी संस्थाएं बैंकिंग विवादों के समाधान के लिए समझौते की राह अपनाने से हिचकिचाएंगे। इससे व्यावसायिक विवादों के निपटारे की प्रक्रिया प्रभावित होगी और अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि समझौते के बाद दोषसिद्धि की संभावना बेहद कम थी, इसलिए मुकदमा जारी रखना न्याय हित में नहीं था।

