अयोध्या के तर्ज पर लूटा शहडोल का राम मंदिर कलेक्टर ने कहा जिला न्यायालय निर्देश दें…-1

Share

       अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट का निर्माण सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हस्तक्षेप से हुआ निश्चित तौर पर वह भारतीय संविधान की भारतीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत जी इसका गठन किया गया होगा और उसे संचालन के लिए अपने विशिष्ट व्यक्तियों को ट्रस्टी भी बनाया गया समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के द्वारा ट्वीट की जाने के बाद वर्षों से चली आ रही है राम मंदिर में करोड़ों रुपए की हेरा फेरी को चर्चा का अवसर मिला। पहले पहले तो उक्त ट्रस्ट के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित चंपत राय बंसल ने एक सिरे से आरोपी को खारिज कर दिया की दो बाद में जो माहौल बना उससे उनका ट्रस्ट से विदा लेना पड़ा और आरोपी की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की मदद लेकर विशेष जांच दल एस आइ टी के जरिए जांच करवाना पड़ा इसका परिणाम यह हुआ कि अपने साथी अनिल मिश्रा के साथ ट्रस्ट से इस्तीफा देना पड़ा। ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष गिरी के द्वारा पत्रकार वार्ता कर यह जरूर बताया गया की जिम्मेदारी उनकी भी है किंतु इस्तीफा मैं क्यों दूं इस पर कई प्रश्न खड़े हो गए

हालांकि, हालिया विवाद ने ट्रस्ट की छवि पर सवाल खड़े किए। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने जिम्मेदारी संभाली है। ट्रस्ट ने SIT जांच का समर्थन किया और वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने का वादा किया। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने स्पष्ट किया कि दान की जिम्मेदारी सामूहिक है, लेकिन बड़े स्तर का घोटाला नहीं हुआ।कुछ इसी तर्ज पर शहडोल स्थित मोहन राम मंदिर में पब्लिक ट्रस्ट के अधीन महा घोटाला हुआ परिणाम स्वरूप दृष्टियों को हटाकर नए ट्रस्टी का गठन किया गया वह भी भ्रष्टाचार की उड़ान में जमीन नहीं देखते बहरहाल इसकी क्या प्रक्रिया अपनाई गई इस पर पहले चर्चा करते हैं

सम्पत्ति के रक्षक ही इसके भक्षक बन गये

        जिला न्यायाधीश महोदय, शहडोल,को मप्र लोकन्यास अधिनियम, 1951 की धारा 26 के तहत निर्देशों के तहत पत्र लिखा कि शहडोल नगर में स्थिति लोक न्यास श्री रामजानकी मंदिर पाण्डेय मोहनराम जी, शहडोल का पंजीयन म०प्र० लोक न्यास अधिनियम, जिला शहडोल के आदेश दिनांक8-7-1964 के द्वारा न्यास किया गया । इस न्यास के सम्पतिको खुर्द-चुर्द करने, मंदिर की देख-भाल एवं व्यवस्था ठीक से करने तथा भ्रष्टाचार की शिकायत को प्राप्त होने पर कलेक्टर शहडोल के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 1 / बी-113/87-88 में पारित आदेश दिनांक 28. 3. 88 के द्वारा अनुविभागीय अधिकारी, सोहागपुर को न्यास का कार्यकारी न्यासी नियुक्त कर उन्हें न्यास का उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए गए।

न्यास के आय-व्यय का पूर्ण आडिट कर साथही पिछले 20 वर्षो रिपोर्ट प्राप्त होने पर न्यास को हुई क्षति की बसूली अधिनियम की धारा 23 के तहत वर्तमानन्यासियों से करने के निर्देश भी दिये गये । इस आदेश के विरुद्ध न्यास के न्यासियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, म०प्र०जबलपुर के समक्ष विधि याचिका क्रमांक 2092/88 प्रस्तुत की गई, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 1.7.91 को आदेश पारित किया जाकर कलेक्टर शहडोल के उक्त आदेश दिन 28.3.88 को निरस्त किया गया एवं निर्देशित किया गया कि अनुविभागीय अधिकारी, सोहागपुर न्याय के लेखा की आडिट तीन माह के अन्दर करायें । आडिट रिपोर्ट प्राप्त होने पर पंजीयक, लोक उचित आदेश पारित करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे । अनुविभागीय अधिकारी, सह पंजीयक, लोक न्यास, तहसील सोहागपुर से प्राप्त प्रतिवेदन क्रमांक रीडर – 1/2001/799 दिनांक 22.6.2001 में बताया गया है कि न्यास के लेखा का वर्ष 1963-64 से वर्ष 1994-95 तक का आडिट कराया जा चुका है ।

सम्पत्ति के रक्षक ही इसके भक्षक बन गये

अपने निष्कर्ष में कलेक्टर शहडोल प्राप्त शिकायतों का अध्ययन करने के बाद जिला न्यायालय से निवेदन किया कि ट्रस्ट किया अराजी अधिकांशतः सम्पत्ति नगर के मुख्य मार्ग लगी हुई है । इस न्यास न्यासी द्वारा नगर के धनी व्यापारियों से सांठ-गांठ की जाकर न्यास की बहुमूल्य भूमि उनके पक्ष में अवैध रूप के अंतरित कर दी गई है, जिस पर इन व्यापारियों के द्वारा बड़ी बड़ी दूकाने एवं होटल निर्मित कर लिये गये । न्यास की चल एवं अचल सम्पत्ति करोड़ो रूपये की है, जिसकी सुरक्षा कर न्यास की आय बढ़ाने के बजाय न्यासियों द्वारा खुर्द-बुर्द करने का पूर्ण प्रयास किया जा रहा है। स्थिति यह है कि सम्पत्ति के रक्षक ही इसके भक्षक बन गये है। न्यासी द्वारा न्यास विलेख दि–29.1.1911 की मूल भावनाओं के विरूद्ध कार्य किया जा रहा है।इनकी कार्यवाहियों के इस न्यास के गठन का उद्देश्य ही विफल हो गया है ।
इस प्रकार न्यासीगण के द्वारा न्यास की सम्पत्ति का उचित प्रबन्ध एवं प्रशासन नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण न्यारा से सम्पत्ति एवं उससे प्राप्त होने वाली आय की क्षति हो रही है । प्रकरण की परिस्थितियों को देखते हुये यह उचित प्रतीत होता है कि न्यास की संपत्ति का यथाशीघ्र उचित प्रबन्ध एवं प्रशासन सुनिश्चित करने हेतु माननीय न्यायालय से निर्देशों
के लिये कार्यकारी न्यासी को आवेदन करने का निर्देश देने के स्थान पर इस कार्यालय द्वारा आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाये । तदनुसार अधिनियम की धारा-26(2) के तहत यह जावेदन पत्र प्रस्तुत कर धारT-27 के तहत न्यास के वर्तमान न्यासीगण को तत्काल हटाते हुए न्यास की सम्पत्ति के उचित प्रबन्ध एवं प्रशासन के लिये निर्देश देने की कृपा की जाए
12 मई 2003 को तत्कालीन कलेक्टर एवं पंजीयक लोक न्यास के द्वारा जिला न्यायालय से निर्देश चाहे गए यही किसी भी ट्रस्ट में विवाद होने की स्थिति में जबकि पूरा ट्रस्ट ही भ्रष्ट कार्यों में लिप्त हो कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है ऐसा अयोध्या स्थित प्रसिद्ध राम मंदिर ट्रस्ट स्ट के मामले में नहीं किया गया। जबकि वहां भी करोड़ों रुपए की चोरी की बरामद की जा चुकी थी संपत्ति के खुर्द-बुर्द होने के भी आरोप लग रहे थे ऐसा बताया गया जब से ट्रस्ट बना है उसके पूर्व से ही भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा बहरआल देखेंगे कि शहडोल का रघुनाथ जी राम जानकी शिव पार्वती मोहन राम मंदिर ट्रस्ट जिसे हम मोहन राम मंदिर ट्रस्ट कहते हैं कमोबेश या ट्रस्ट भी भ्रष्टाचार की चरागाह बन गया है चाहे ट्रस्टी पूर्व के हो या वर्तमान के दोनों हाथ से ट्रस्ट को क्षति पहुंचा रहे हैं और जगह-जगह संबंधित न्यासा से जुड़े लवकुश जैसे लोग अपनी प्रॉपर्टी बना रहे हैं जो जांच का विषय है आगे हम यह बताएंगे कि जिला न्यायालय ने कलेक्टर का आवेदन प्राप्त करने के बाद क्या निर्देश दिए और उसका क्या परिणाम हुआ (जारी-2)

                                                                                                     (त्रिलोकी नाथ)


Share

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

राशिफल

- Advertisement -spot_img

Latest Articles