
“प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्” भाजपा के केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री के खिलाफ दिया धरना….?
खबर तो चौंकाने वाली है ही की मध्य प्रदेश के चार दशक रहे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने जिले के अपने विधानसभा क्षेत्र बुधनी के आदिवासियों की (वोटरों) की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं.. और हालात इतने अराजक और बेकाबू हो गए कि उन्हें प्रधानमंत्री जी की भाषा में परजीवी वायरस और माननीय की भाषा में कॉकरोच या मक्खी के रूप में केंद्रीय मंत्री रहते हुए अवतरित होना पड़ा प्रकार से दैनिक भास्कर में छपा है अगर उसे सच माने तो घटना या दुर्घटना कुछ ऐसी ही है की मध्य प्रदेश में राजाधिराज के रूप में स्थापित होकर 18 वर्ष राज्य करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जो वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री हैं उन्हें अपने घर के यानी बुधनी के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए रोना और गिरगिड़ना पड़ रहा है पता नहीं बीजेपी के अंदर कौन सी पाकिस्तानी परंपरा पनप रही है कि जब उमा भारती आई तो उन्हें अपमानित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया…. हालात ऐसे हो गए कि वह सड़कों में पत्थर लेकर मारने लगीं, शराब की दुकान में…। जब बाबूलाल गौर आए तो उनकी दुर्गति को क्या कहा जाए ‘बड़े बेगाने होकर निकले, तेरे दर से…” की तर्ज पर उन्हें मौत जनक अपमान में धकेल दिया गया… अब जब 18 साल के राजवाड़े का आनंद ले चुके शिवराज सिंह कृषि मंत्री हैं तब यह दुर्गति हैक्योंकि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उसके अफसर केंद्रीय कृषि मंत्री को घास नहीं डाल रहे हैं तो जो छपा है उसके कुछ भाग को हम इस प्रकार से बता रहे हैं
(त्रिलोकीनाथ)
बुधनी में कार्रवाई … आदिवासियों के घर तोड़े, चौहान बोले- ये जुल्म है सीएस और भाजपा अध्यक्ष से बात के बाद भी चला बुल्डोजर, धरने पर बैठे शिवराज बुधनी विधानसभा के कोसमी गांव में वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई से भड़के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। देर रात उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में जुल्म की पराकाष्ठा हुई है। अन्याय किया गया है। सवेरे तक जो घर आबाद थे, जहां बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब उनकी चीखें हैं। महिलाएं छातियां पीट-पीटकर रो रही हैं। उनके घर गिरा दिए गए। फसल दबा दी गई। मेहनत कुचली गई। कुएं मिट्टी से भर दिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, यह कार्रवाई तब की गई, जब वे इसे रोकने के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से बात कर चुके थे। अब इस बारे में सीएम से बात करेंगे। शिवराज सिंह ने कहा, उनके बरसों पुराने घर थे। बुलडोजर चलाने वाले संवेदनशून्य और नरपिशाच की तरह हैं। उनके घर तोड़े जाएं, उनके बच्चे रोएं तब पता चलेगा। क्या उनकी मां-पत्नी नहीं सरकार बोली- प्लांटेशन नष्ट किया, इन पर केस सरकार ने कहा वन विकास निगम सीहोर के वन कक्ष 426 में 2021 में प्लांटेशन किया गया। इस एरिया में सिंहपुर के 10 आदिवासी परिवारों ने प्लांटेशन नष्ट कर खेती चालू कर दी। झोपड़ी बना ली। सभी के खिलाफ वन अपराध का केस दर्ज था। सबको बेदखली का नोटिस दिया गया। अब अवैध झोपड़ी को हटाने की कार्यवाही की गई। हैं। इन्हें भगवान माफ नहीं करेगा। हम पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की हर संभव कोशिश करेंगे। फॉरेस्ट स्टाफ के जितने लोगों ने उन लोगों के साथ तोड़- फोड़ की, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा, जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनवाए जाएंगे। साथ ही, जब तक उनके रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
कुछ लोगकहते हैं जब करोड़ों रुपए कर्ज लेकर लाडली बहन के नाम का योजना के नाम पर वोट की लूट की गई तब जाकर पांचवी पंचवर्षीय के लिए शिवराज सिंह कि बीजेपी मध्य प्रदेश में घर वापसी की, किंतु इस महान जीत के बाद भी उन्हें केंद्र की मोदी सरकार ने खारिज कर दिया और एक प्यादे मोहन यादव को उठाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी में बैठा दिया.. जिससे शिवराज सिंह जी के तोते उड़ गए, फिर किसी प्रकार शिवराज की इज्जत बचाने के लिए उन्हें संघ परिवार ने कृषि मंत्री के ओहदे तक पहुंचाया किंतु जब कृषि मंत्री को अपने ही विधानसभा क्षेत्र के नागरिक अधिकारों के लिए कॉकरोच और मक्खी के रूप में धरना आंदोलन का सहारा लेना पड़ा तब स्पष्ट हुआ की साहब बड़ी बेइज्जती और अपमान से कृषि मंत्रालय संभाल रहे हैं… अन्यथा हिम्मत किसकी थी की 18 वर्ष के अपनी ही भाजपा के गौरवशाली पूर्व मुख्यमंत्री को कोई इस हालात तक पहुंचा दे।
माना यह भी जाता है की मध्य प्रदेश के तमाम प्रशासनिक कंट्रोल शासन के कंट्रोल में नहीं है बल्कि किसी ब्यूरोक्रेट्स के जरिए यह मोदी जी के अधीन कार्य कर रहे व्यवस्था से नियंत्रित होता है। और शायद इसीलिए यह अपमानजनक हालत हमारे पूर्व मुख्यमंत्री को देखना पड़ा….
पता नहीं बीजेपी के अंदर कौन सी पाकिस्तानी परंपरा पनप रही है कि जब उमा भारती आई तो उन्हें अपमानित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया…. हालात ऐसे हो गए कि वह सड़कों में पत्थर लेकर मारने लगीं, शराब की दुकान में…। जब बाबूलाल गौर आए तो उनकी दुर्गति को क्या कहा जाए ‘बड़े बेगाने होकर निकले, तेरे दर से…” की तर्ज पर उन्हें मौत जनक अपमान में धकेल दिया गया… अब जब 18 साल के राजवाड़े का आनंद ले चुके शिवराज सिंह कृषि मंत्री हैं तब यह दुर्गति है कि उन्हें अपने ही विधानसभा क्षेत्र के बुधनी के आदिवासियों की रक्षा के लिए धरना आंदोलन करना पड़ रहा है यानी कॉकरोच और मक्खी बनना पड़ रहा है तो कह सकते हैं सब कुछ ठीक नहीं है भाजपा के अंदर…,, कॉर्पोरेट बनाम संघ का यह परिणाम है यह और कितना खींचेगा भगवान राम जाने यह अलग
बात है कि अयोध्या के चंपत राय बंसल के राम जाने या फिर शहडोल के राम जो घट-घट में बसते हैं।
लेकिन हालात इतने बदतर हैं…. तो हमारी भी विनती है अपने प्रिय नेता शिवराज सिंह जी से कि आप शहडोल लिए यहां भी धरना आंदोलन करिए, जहां लंबे समय से रेत खनिज निकासी का ठेका नहीं हुआ है फिर भी पूरी सफलता से भोपाल तक लिंक रखने वाला माफिया प्रतिदिन उसी रफ्तार से रेत निकाल रहा है… जैसे ठेके में निकलता है, पकड़ा धकड़ी भी होती रहती है आखिर किस तंत्र के लिए यह उगाही होती है..? आप धरने में बैठेंगे तो हम भी कहेंगे हमारा नेता कैसा हो..? शिवराज सिंह जैसा हो… यही वर्तमान का प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् होगा। क्योंकि यहां भी संविधान की पांचवी अनुसूची में कानून की सुरक्षा में संरक्षित जंगल काटे जा रहे हैं इस नीतिगत तरीके से जीस नीतिगत तरीके से आपके बुधनी क्षेत्र के आदिवासी हटाए जा रहे हैं…. और कोई बात नहीं, दिली इच्छा है जमीर को जगाइए हम भी जागरूक हो सके… और कह सकें “हमारा नेता कैसा हो…? शिवराज सिंह जैसा हो……

