भारत कर सकता है संसार में नई ऊर्जा का संचार : प्रो. डेनिस

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विकास के मार्ग पर मूल्यों का ध्यान रखना है : डॉ. राजीव कुमार
जी-20 के थिंक 20 कार्यक्रम में “लाइफ वेल्यू एण्ड डेव्हलपमेंट फॉर्मेशन” पर हुआ प्लेनरी सेशन

भोपाल | जी-20 में थिंक-20 के दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन ‘‘लाइफ, वेल्यू एण्ड डेव्हलपमेंट फॉर्मेशन’’ विषय पर पहले प्लेनरी सेशन में ग्लोबल सॉल्यूशन इनिशिएटिव, जर्मनी के अध्यक्ष प्रोफेसर डेनिस जे. स्नोवर ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि जी-20 का नेतृत्व करते हुए भारत में वह शक्ति है कि वह स्थापित उच्च मूल्यों के आधार पर संसार में नई ऊर्जा का संचार करे। सेशन की अध्यक्षता कर रहे “पहले इंडिया फाउंडेशन” के अध्यक्ष एवं भारत सरकार के नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि मूल्यों को ध्यान में रख कर ही हमें विकास के मार्ग पर चल कर उन्नति की ओर अग्रसर होना है।

मुख्य वक्ता प्रो. डेनिस ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का लाभ समाज के सभी लोगों को मिलना चाहिए। विकास की दौड़ में हमें सदैव स्मरण रखना चाहिए कि हम सामाजिक प्राणी भी हैं। इस सब में हमें हमारे सामाजिक मूल्य मदद करेंगे। प्रभावी देश अपनी शक्ति का उपयोग कर वैश्विक बाजार को प्रभावित करते हैं, जिससे असमानता को बढ़ावा मिलता है। वर्तमान समय की माँग है कि हम नीतियों को मानव केन्द्रित बनाएँ क्योंकि समानता जरूरी है। जी-20 मुख्यत: आर्थिक गतिविधियों पर आधारित संगठन है। हमें इकोनॉमी इनवायरमेंट के साथ सोशल इनवायरमेंट पर भी ध्यान देना होगा। हमें दूरगामी सोच अपनाते हुए मूल्यों के साथ आगे बढ़ना होगा, जिसमें समाज, राष्ट्र और विश्व का कल्याण शामिल हो न कि अपनी सोच को व्यक्ति केन्द्रित रखना है। हमारे जीवन मूल्य हमारी जीवन यात्रा का एक हिस्सा होना चाहिए न की मंजिल। मूल्य आधारित समझ हमें बेहतर और खुशहाल बनाती है।

सेशन के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि “पर्यावरण सम्मत जीवन-शैली, नैतिक मूल्य तथा सुमंगलमय युक्त वैश्विक सुशासन’’ की स्थापना के लिये समाज की सहभागिता अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश की संस्कृति की अवधारणा “वसुधैव कुटुम्बकम” का निरंतर वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उन्होंने प्लेनरी सेशन का संचालन करते हुए समापन पर कहा कि जीवन मूल्यों को हर स्तर पर स्थापित करना होगा। अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं को समग्र हित में दृष्टिगत रखते हुए कार्य करना होगा। हर व्यक्ति को व्यापक हित में अपनी भूमिका निर्धारित करनी होगी। अपना सोच वैश्विक स्तर का रखना होगा। वर्तमान में हमारे सामने आयी बहुत सारी चुनौतियों का सामना मूल्य आधारित समाज विकसित करके ही किया जा सकता है।

सेन्टर फॉर प्रोफेशनल्स एथिक्स यू कलॉन, यूनाइटेड किंगडम और स्कूल ऑफ लॉ, यू कलॉन, साइप्रस की डायरेक्टर प्रो. डोरिस श्योरेडॉर ने अपना संबोधन नमस्ते से शुरू किया। उन्होंने पर्यावरण-संरक्षण के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। भारतीय संस्कृति में मूल्य आधारित जीवन पद्धति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जी-20 के समक्ष मूल्यों संबंधी कई चुनौतियाँ हैं।

थिंक-20 इंडिया की टास्क फोर्स 6 के अध्यक्ष और विजिटिंग फेलो आरआईएस, नई दिल्ली श्री जी.ए. टडास ने कहा कि जी-20 में विकसित और विकासशील दोनों ही प्रकार के विभिन्न राष्ट्र शामिल है। हमें वर्ष 2030 तक अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये संसाधनों में वृद्धि करनी होगी। कोरोना पेंडेमिक से विकास की दौड़ प्रभावित हुई है। हमें विकास के मार्ग पर मूल्यों का ध्यान रखते हुए उन्नति करना है।

ओईसीडी डेव्हलपमेंट सेंटर, पेरिस के पूर्व निदेशक डॉ. मारियो पेज़िनी ने कहा कि विश्व के विभिन्न देशों में कई समस्याएँ हैं। ऐसे में सोशल ट्रांसफार्मेशन किये जाने की आवश्यकता है। हमें विकास को सिर्फ जीडीपी के नजरिये से ही नहीं देखना चाहिए, बल्कि ग्रास इन्वायरमेंट प्रोडक्टिविटी (जीईपी) के अनुसार काम करना होगा।

इंडोनेशिया विश्वविद्यालय के आर्थिक और सामाजिक शोध संस्थान की निदेशक प्रोफेसर रिआतु क़िबथियाह ने कहा कि हम सभी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और इंडिया की ओर देख रहे हैं। भारत को देश में किये जा रहे नवाचारों को विश्व के साथ साझा करने का एक बेहतर अवसर प्राप्त हुआ है।

एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी आँफ चीन के लीड चेयर प्रोफेसर ली. शियाओ युन ने सेशन में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती असमानता को दूर करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने सभी को जीवन के लिये समान अवसर मिलने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज (आईएसएएस) सिंगापुर के निदेशक डॉ. इकबाल सिंह सेविया ने कहा कि औद्योगिक क्रांतियों ने विश्व को बदला है। जीवन मूल्यों के साथ तकनीक का उपयोग कर सिस्टम को विकसित करने की सोच के साथ अनुसंधान करना चाहिए। हम तकनीक को जीवन मूल्यों से अलग नहीं कर सकते हैं।


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