7 नागरिक मरे , कोई नई बात नहीं….भाग 1

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Shahdol News : बंद कोयला खदान धनपुरी में रेश्क्यू के दौरान तीन शव और निकले  - Three more dead bodies recovered during rescue in closed coal mine  Dhanpuri

दोषी कौन..? बड़ा सवाल..-1

————– (त्रिलोकीनाथ )—————–

मैंने शायद 1986 में भोपाल के एक समाचार पत्र “हिंदी हेराल्ड” में तब  शहडोल में कोयला की माफिया गिरी के कारण जरवाही के पास मरजाद ग्राम में मंजा कोल के मारे जाने की खबर की हेडिंग दी थी “मंजा कोल मारा गया कोई नई बात नहीं..” करीब 35 साल बाद इसी कोयला की माफिया गिरी में एक कोल नहीं बल्कि 4 कोल राहुल कोल को,भुग्गु कोल,हग्गू कोल और राज कोल (सभी निवासी धनपुरी ) ,
और अब चार लोगों के शव मिलने के बाद प्रत्यक्षदर्शी ने 3 व्यक्तियों के और दबे होने की आशंका जाहिर की थी।  8 घंटे तक चले रेस्क्यू के बाद तीनों के शव बरामद किए गए।3 मरने वालों की शिनाख्त मनोज पादरी, रोहित बर्मन और राजेश मिश्रा के रूप में हुई है। तीनों की संबंधित थानों में गुमशुदी की रिपोर्ट दर्ज है। बंद खदान से 7 शव मिलने से इलाके में सनसनी फैली हुई है। 7 लाशें कोयला खदानों से निकलने के बाद भी शहडोल का खनिज विभाग कलयुग का सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र  की तरह सत्यवादी बनकर मौनव्रत से है| जिस खनिज विभाग की जिम्मेदारी खनिज अधिनियम के अधीन सुरक्षित खदानों को संचालित होने की गारंटी होनी चाहिए वह उसका उसकी चुप्पी बेहद खतरनाक है…?

कल ही जब यह प्रश्न पुलिस अधीक्षक प्रतीक कुमार से किया गया की  सात नागरिकों के हत्या का बुरहार एसईसीएल के प्रबंधन ग्रुप पर इसलिए किया गया क्योंकि उसका एक अनुबंध शासन के साथ था और दोषी चिन्हित हुए किंतु शहडोल के रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अभी तक गैस खनन के लिए खनिज विभाग से कोई अनुबंध नहीं किया है अगर इसमें दुर्घटना होती है तो उसका दोष किस पर जाएगा या कोई दोषी ठहराया नहीं जाएगा…? पुलिस अधीक्षक में इस पर प्रशासन से पत्राचार कर जानकारी देने की बात कही|

तो क्यों ना  एसईसीएल ग्रुप प्रबंधन के साथ खनिज विभाग के संबंधित दोषी खनिज अधिकारी और खनिज निरीक्षक इस 7 मौतों के लिए दोषी ठहराया जाए…? क्योंकि रेत की खुली माफिया गिरी मेंअलग-अलग प्रकार की दुर्घटनाओं में कई लाशें शहडोल की नागरिकों की  अब तक मिल चुकी है| राजा हरिश्चंद्र खनिज अधिकारी चुपचाप दोषमुक्त हुआ संत की तरह बैठा हुआ है वास्तव में शहडोल में एक भी खनिज से संबंधित हत्याएं होती हैं अथवा दुर्घटनाएं होती हैं और लोग मारे जाते हैं उसके लिए प्रथम दृष्टिकोण में खनिज विभाग के व्यक्ति पर भी कार्यवाही क्यों नहीं होना चाहिए …?मध्य प्रदेश, बंद भूमिगत खदान में चोरी के इरादे से घुसे चार युवकों की खदान  के अंदर मौत - Sabkuchgyan

माफिया गिरी में इस तरह मरने वालों की संख्या में सिर्फ आदिवासी समाज के व्यक्ति नहीं रह गए बल्कि ईसाई, ओबीसी और ब्राह्मण भी शामिल हो गए हैं सिर्फ मुसलमान रह गए | मुसलमान इन मरने वालों कंट्रोलर थे ,ऐसा मानना चाहिए|धनपुरी यूजी माइंस में चार युवकों का शव मिलने के बाद पुलिस को पूछताछ में राजा कबाड़ी का नाम सामने आया था। राजा सरगना है  राजा कबाड़ी उर्फ गुलाब हुसैन, पप्पू टोपी व गुड्डू कबाड़ी का नाम भी सामने आया था।  पप्पू टोपी व गुड्डू लंबे बुढ़ार में अभी  गुड्डू खान उर्फ नुरुल हुसैन, रहीम कबाड़ी, अनीश अंसारी, तौसीफ ,अब्दुल कदीर| तो एक तरह से लोकतंत्र के इस पकोड़ा तलने वाले रोजगार में पूरा समाजवाद समता मूलक तरीके से भारतीय संविधान की उद्देशिका को पूरा करता हुआ मर रहा है|

बहराल  पुलिस की माने तो कबाड़ चोरी करने के लिए बंद खदान घुसे थे और वहां पर जहरीली गैस होने के कारण मर गए| कोल समाज के दृष्टिकोण में 35 साल बाद कोल समाज के देखें तो ऐसा नहीं है समाज मैं हमारे मुख्यमंत्री आकर नाचे भी नहीं है विकास की उमंग और उत्साह में उन्होंने कई बार डांस भी किया है, किंतु जब भी चले जाते हैं तब विकास अपनी वास्तविक रफ्तार में शहडोल का विकास विशेष तौर से कोल समाज का विकास अपनी वास्तविक रफ्तार के आंकड़ों की ऊंचाइयां छूने लगता है|

ऐसा भी नहीं है पुलिस विभाग की  सेवाओं को सराहा नहीं जाता, क्षेत्र में हमारी राष्ट्रपति ने 2 दिन पहले ही शहडोल के एडीजीपी डी.सी.सागर को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पदक प्रदान किया है | तो सबसे पहले समझ ले कि 2 दिन पहले कितने घटनाक्रम शहडोल के संदर्भ में हमारे लिए समाचार में प्रमुखता से लगे और सिर्फ 2 दिन में ऐसा लगा कि जैसे मुड़ मुड़ाए ओले गिरे के हालात अपनी पारदर्शी परिस्थिति को जोर-जोर से बताने लगे|

केंद्र सरकार ने  को गैलेंटरी पुलिस मेडल और 4 अधिकारियों को विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस मेडल प्राप्त हुआ है। इस विशिष्ट सेवाओं के लिए इन अधिकारियों को मिले प्रेसिडेंट पुलिस मेडल दिनेश चंद्र सागर एडीजीपी शहडोल जोन, आलोक रंजन एडीजीपी भोपाल, संजय तिवारी आईजीपी भोपाल, राम सिया बघेल CT 2nd बटालियन एसएएफ ग्वालियर।

27जनवरी पुलिस भर्ती उत्सव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा है यह वर्दी है देश और प्रदेश की सुरक्षा, अपराधियों को नेस्तनाबूद करने, निर्बलों को ताकत देने, अपराधियों को कुचलने और सज्जनों का उद्धार करने की। इसकी मर्यादाओं को कभी भूलना नहीं और इस पर कभी कलंक मत लगने देना। अपनी माँ और भारत माँ के दूध की लाज रखना, आपका दायित्व है।

धनपुरी थाना क्षेत्र  स्थानीय जनों को बताया,7  लोगों की मौत की खबर  ।जिस स्थान पर कबाड़ निकाला जा रहा था वहां अमलाई  राजा कबाडी और धनपुरी के पप्पू कबाड़ी  नाम सामने आए हैंजिन लोगों के मौत की खबर सामने आई है उसमें राहुल को ,भुग्गु कोल,हग्गू कोल और राज कोल सभी निवासी धनपुरी  हैं जबकि चिड़ा कोल नाम का व्यक्ति गंभीर रूप से घायल था जो बच गया है | गए। इसी तरह अन्य    3 मरने वालों की शिनाख्त मनोज पादरी, रोहित बर्मन और राजेश मिश्रा के रूप में हुई है।

सब कुछ जैसे सिस्टमैटिक है, कुछ ही दिन पहले ग्राम खाड़ा मे एक 12 वर्ष की लड़की के साथ एक शिक्षक बलात्कार करता है और उसे पुलिस एसआईटी जांच करके प्रेम प्रसंग में हत्या का रूप देती है| आदिवासी समाज के लोग 7 लोग कोयला माफिया गिरी में मर गए हैं पुलिस की माने कबाड़ के उद्देश्य से यह  दुर्घटना हो सकती है , कई अखबार तो साफ लिखते हैं क्षेत्र की पुलिस और कावड़ियों की मिलीभगत के कारण आदिवासी समाज के लोगों की मौत हुई है| तो अब अगर मान भी ले कि यह लोग चोरी के उद्देश्य घुसे थे और एसआईटी अपनी यह रिपोर्ट भी देती है… तो क्या यही सिस्टम है शहडोल क्षेत्र के आदिवासियों के विकास का…?

जहां पर भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू शहडोल आकर आदिवासियों के उत्थान के लिए पेसा एक्ट लागू करने की दोबारा घोषणा करती हैं इसके बावजूद भी आदिवासियों की इतनी बदतर हालात और इसके बीच में यदि पुलिस को सेवाओं के लिए पदक मिलता है, तो क्या माना जाए कि सब कुछ सिस्टमैटिक है…?

ब जबकि बिना संरक्षण के यह कबाड़ी अथवा कोयला माफिया अथवा रेत माफिया अथवा वन माफिया य तमाम प्रकार के भूमाफिया आदि अपनी माफिया गिरी को जिसमें करोड़ों अरबों रुपए वह दिन रात कमाने की मशीन बन गए हैं चला रहे हैं| वह बिना उच्च संरक्षण के संरक्षण के होगा.. निश्चित तौर पर नहीं होगा…? क्षेत्रीय राजनीतिज्ञों का बिना संरक्षण के पुलिस, खनिज, विभाग , एसईसीएल का सुरक्षा तंत्र इस प्रकार के माफिया को संरक्षण नहीं दे सकता है..? नेताओं का संरक्षण इन 7 मौतों में चुप्पी आखिर क्या संदेश देती है…?

और इसका प्रमाण भी पिछले दिनों में देखने को मिला है  तत्कालीन डीजीपी और  माफिया का ऑडियो वायरल हुआ जिसमें एडीजीपी को पुलिस वालों की तरह डांटता हुआ अपने कबाड़ के कारोबार में पारदर्शी व्यवहार को प्रकट करता है…इसी तरह का एक अन्य  वन विभाग के रेंजर के साथ एक रेत माफिया का ऑडियो वायरल हुआ था जिसमें खुलेआम इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की लूट का बंदरबांट साबित होता था….

(-जारी भाग 2..)

 

 

 

 


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