
भारतीय राजनीति के दृष्टिकोण में यह तय नहीं हो पा रहा है कि वर्ष 2024 में प्राथमिकता-क्रम विरासत में क्या मिला है..? देश को, देश के मान-सम्मान को अथवा किसी भी कीमत पर जीतने वाली वोट-राजनीति के लिए धर्म को आगे रखा जाएगा…? अथवा युवा देश की योग्यता को बूढ़ा होने तक और फिर मर जाने के लिए मनुष्यों को ऐरा-प्रथा की तरह पशुओं की भांति छोड़ दिया जाएगा…इस गुमान में कि भारत सोने की अब भी चिड़िया है और जब तक पूरा सोना ना निकाल लिया जाए तब तक इसे लगातार एक शोषणकारी व्यवस्था का विषय-वस्तु माना जाए ।गरीबों की गरीबी, अमीरों के लिए वरदान हो .., धर्म की उपयोगिता कार्ल मार्क्स की भाषा में अफीम की तरह उपयोग हो… इस पर लिखा जाए या फिर चुप हो जाया जाए…?
इस डर से के संसद में अगर सांसद रहेंगे तो तानाशाही के कानून पर हल्ला होगा इसलिए संसद में जब तथाकथित बेरोजगार धुआं-धुआं हो तो 146 सांसदों को निष्कासित कर चुपचाप कानून बनाकर राजतंत्र की तरह इस्तेमाल किए जाएं ; ताकि लोकतंत्र में चुनाव जीत जाने की कला में कोई बाधा ना हो…. क्या इस पर लिखा जाए…..? आदि-आदि कई इस प्रकार के विषय वस्तु हैं।
लेकिन सर्वाधिक पीड़ा युवा भारत के युवा महिलाओं और उन महिलाओं जो की ओलंपियाड पर भारत का मान सम्मान रखें भारत भी उन्हें मान-सम्मान के प्रमाण पत्र के बतौर पदक, अर्जुन पुरस्कार आदि आदि दिया और बाद में एक बलात्कारी के आरोपी पर जांच के विषय को लेकर इन युवा खिलाड़ियों और भारत के प्रमाण पत्र स्वरूप दिए गए सम्मान पदक को सड़क में रख दिए जाने यानी फेंक दिए जाने की घटना ने पूरे विमर्श को बदल दिया है।, इसे तवज्जो दिया जाए या फिर एक महिला की यौन प्रताड़ना समझ कर उसे नजर अंदाज किया जाए। क्योंकि चुनाव जीत जाना और सत्ता में आ जाना यही एकमात्र लक्ष्य रह गया है।
30 दिसंबर पहलवान बजरंग पूनिया के बाद विनेश फोगाट ने भी अपने पुरस्कार लौटा दिये हैं। दो बार की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता पहलवान विनेश ने शनिवार को पुरस्कार लौटाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस पर उन्होंने अपनी अर्जुन पुरस्कार ट्रॉफी, खेल रत्न पदक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक पत्र कर्तव्य पथ पर ही छोड़ दिया। बाद में दिल्ली पुलिस ने इन्हें उठाया।घुटने की सर्जरी के बाद विनेश बेंगलुरू स्थित लक्ष्य एकेडमी ऑफ स्पोर्ट्स में स्वास्थ्यलाभ के दौर से गुजर रही हैं।
वह बेंगलुरु से विमान के जरिये दिल्ली पहुंचीं और पुरस्कार लौटाने के बाद सीधे एयरपोर्ट चली गयीं। एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता विनेश ने मंगलवार को अपना खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार सरकार को लौटाने का ऐलान किया था। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री के नाम एक पत्र में कहा था कि ऐसे समय में इस तरह के सम्मान वेमतलब हो गए हैं, जब पहलवान न्याय पाने के लिए जूझ रहे हैं।विनेश ने ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया के साथ मिलकर भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह के चुनाव का विरोध किया था। इन तीनों ने बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। संजय सिंह के महासंघ अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद साक्षी ने कुश्ती से संन्यास की घोषणा कर दी थी। इसके बाद पूनिया ने पद्मश्री लौटा दिया था।

