
शहडोल क्षेत्र(शहडोल अनूपपुर)। कहने के लिए शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र है इसे संविधान में पांचवी अनुसूची में शामिल किया गया है उस वक्त अनूपपुर जिला भी उसी का हिस्सा था। इस बात की तस्दीक स्वयं भारत के राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपति मुर्मू ने शहडोल में आकर दूसरी बार घोषित की थीं। इसके पहले मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश ने भी इंदौर में इसकी घोषणा किए थे। पांचवी अनुसूची का मुख्य उद्देश्य स्थानीय हितों की सर्वोच्च प्राथमिकता देना है चाहे वह पर्यावरण का मामला हो परिस्थितिकी का मामला हो अथवा अन्य रोजगार परक मामले हो बिना स्थानीय हितों की प्राथमिकता के कोई भी उद्योग या कोई भी कार्य यहां पर नहीं किया जा सकते। बावजूद इसे अनदेखा करके बाहरी उद्योगपति स्थानीय प्राकृतिक संसाधन के भरोसे शहडोल क्षेत्र में आकर अपने-अपने हिसाब से स्थानीय लोगों को शोषण का कारण बन रहे हैं। यह अलग बात है कि उसमें आदिवासी विशेष क्षेत्र के निवासी में आदिवासी समुदाय के लोग कितनी संख्या में हैं..? किंतु इसका पालन उद्योगपति करते नहीं दिखाई देते और ना ही इसका समीक्षा करने का काम कमिश्नर शहडोल अथवा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक शहडोल के द्वारा की जाती है उसके परिणाम स्वरूप शोषणवादी व्यवस्था प्रशासनिक अप्रत्यक्षसंरक्षण में होती रहती है शायद इसीलिए शासन के कूटनीतिक नेता लोग शहडोल क्षेत्र की ताकत को तीन टुकड़ों में तीन जिलों में विभाजित कर दिए हैं ताकि कमजोर लोकतांत्रिक विचार शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ खड़े ना हो सके…?
तो देखिए इस बार क्या हुआ। स्थानीय प्रदेश टुडे समाचार के अनुसारमध्य प्रदेश की सबसे बड़ी पावर प्लांट हिंदुस्तान मोजर बेयर कंपनी के द्वारा स्थानीय मोटर मालिकों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है जिसमें स्थानीय
मोटर मालिकों ने हिंदुस्तान पावर प्लांट के ऊपर भेदभाव किया जाता है मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी पावर प्लांट हिंदुस्तान मोजर बेयर कंपनी के द्वारा स्थानीय मोटर मालिकों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है जिसमें स्थानीय मोटर मालिकों ने हिंदुस्तान पावर प्लांट के ऊपर भेदभाव किए जाने एवं बेफिजूल का नियम निर्देश पालन करवाए जाने और पेमेंट की स्थिति को दो से तीन महीने में कीए जाने को लेकर द्वारा कलेक्टर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सोपा गया ।
ज्ञापन में स्थानीय मोटर मालिकों ने हिंदुस्तान पावर प्लांट के ऊपर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया उन्होंने बताया कि स्थानीय मोटर मालिकों के साथ पावर प्लांट के कर्मचारियों के द्वारा सौतेला व्यवहार किया जाता है। 2 से 3 महीने में वाहनों का भुगतान किया जाता है जिससे हम सभी मालिकों को ड्राइवर एवं मेंटेनेंस के खर्चे में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ऐसे कई विषय हैं जिनसे हम स्थानीय मोटर मालिक पावर प्लांट के नियम निदेशों के आधार पर आर्थिक रूप से तंगी के शिकार आ चुके हैं और आने वाले समय में मजबूरी में हमें वहां सप्लाई का कार्य बंद करना पड़ेगा।
मोजर वेयर के ऊपर गंभीर आरोप – स्थानीय वहान मालिकों ने मोजर वेयर कंपनी के ऊपर विभिन्न गंभीर आरोप लगाए हैं उन्होंने बताया कि मोजर वेयर कंपनी के द्वारा बाहरी गाड़ियों के माध्यम से राखड़ का परिवहन कराया जा रहा है जिससे स्थानीय मालिकों को भारी क्षति उठाना पड़ रहा है मोजर वेयर कंपनी के द्वारा वेडर के माध्यम से भाड़ा का निर्धारण किया जाता है जिसकी कोई भी रेट लिस्ट वाहन मालिकों को प्रदान नहीं की जाती है और ना ही कहीं चस्पा रहती है अतः कंपनी के द्वारा एक बोर्ड लगाया जाए जिसमें वेंडर के संपूर्ण दस्तावेज प्रदर्शित हो सके एवं भाड़ा की राशि बोर्ड पर चस्पा रहे। कंपनी के द्वारा वाहन मालिकों से टोल खर्च एवं अन्य रास्तों का खर्च वेंडर के माध्यम से लिया जाए कंपनी के अंदर
कर्मचारियों के द्वारा स्थानीय वाहन मालिकों के ड्राइवर को जोर जबरदस्ती देकर धमकी दिया जाता है कि ब्लैक लिस्ट किया जाएगा यदि कोई गलती हो जाती है तो कृपया समझाइए देकर एक और मौका भी दिया जाए
कंपनी के द्वारा अचानक ही नियम निर्देश जारी कर दिए जाते हैं ऐसी स्थिति में कंपनी के द्वारा एक सप्ताह पूर्व वेंडर के लिए नियम निर्देश जारी किए जाएं ताकि वाहन मालिकों को कोई दिक्कत का सामना न कर सके ना करना पड़े। ऐसे कई विषय है जिसमें मोजर बेयर पावर प्लांट के द्वारा स्थानी वाहन मालिकों के साथ जागृति की जाती है।

