आखिर दिल्ली की स्वाति और शहडोल (सपटा) की नाबालिक महिला संवेदना में अंतर क्यों….?( त्रिलोकी नाथ)

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  Haldwani Observation Home Minor Girl Rape Case | Uttarakhand News | उत्तराखंड के सुधार-गृह में 15 साल की लड़की का रेप: दो महिला स्टाफ पीड़ित को बाहर ले जाकर दुष्कर्म ...   आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल के साथ तथाकथित अभद्रता मारपीट के लिए दिल्ली भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा संग्रहालय में रखे हुए अपने चूड़ियों खनखनाते हुए मीडिया में छाई रही। स्वाति मालीवाल उसे समय चर्चा में आई जब वह महिला आयोग दिल्ली की अध्यक्ष थी और करीब एक साल चले भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह के खिलाफ महिला यौन शोषण के मामले में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त महिला पहलवानों ने जंतर मंतर में धरना दिया था तब स्वाति मालीवाल महिला् पहलवानों के पक्ष में बात रखने के लिए प्रताड़ित भी हुई थी। फिर कहते हैं महिला आयोग की भर्ती के प्रकरण में कोई जांच सांसद स्वाति मालीवाल के खिलाफ लंबित है दिल्ली की मंत्री आतिशी ने कहा किसी प्रकरण के दबाव में स्वाति मालीवाल भाजपा से ब्लैकमेल हो करके अपनी ही पार्टी के खिलाफ योजना बध्य तरीके से 21 दिन की जमानत में छूटे आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को विवादित कर चुनाव में डाइवर्ट करने के उद्देश्य से केजरीवाल के घर गई थी। जहां पर केजरीवाल के निज सचिव विभव के साथ उनका विवाद हुआ और ना चाहते हुए भी भाजपा के दबाव में तीन दिन बाद रिपोर्ट हुई और अब विभव जेल में है। पार्टी की घेरे बंदी की जा रही है जिसमें भाजपा महिला मोर्चा ने चूड़ियां खनखनाने का काम किया है। आम आदमी पार्टी ने भी आज अपना बड़ा प्रदर्शन दिल्ली में किया है। प्रथम दृष्टि पूर्णत: राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल होती दिखाई देती स्वाति के साथ प्रताड़ना के मामले को न सिर्फ भाजपा ने बल्कि भाजपा समर्थित मीडिया ने भी प्रोपेगेंडा खड़ा कर रखा है। और इसकी सच्चाई में अगर ताकत है तो विभव को दंडित होना ही चाहिए।

……………( त्रिलोकी नाथ )……………..
स्वाभाविक है यह प्रोपेगेंडा उस वक्त नहीं खड़ा हुआ था जब स्वाति के साथ महिला पहलवानों के मामले में प्रताड़ना हुई थी। भारत के अन्य बहुचर्चित महिलाओं संबंधी प्रताडना के मामलों में महिला मोर्चा की चूड़ियां नहीं देखी गई थी। चाहे वह एक वर्ष चला महिला पहलवानों के यौन प्रताड़ना का मामला हो, बल्कि इन्हें और प्रताड़ित किया गया। यह नंगा नाच होता रहा। चाहे वह हाल में इसके पक्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वोट मांग कर सशक्त हो रहे थे कर्नाटक के सांसद प्रज्वल रेवन्ना का मामला हो, जिसमें करीब 400 महिलाओं के साथ यौन प्रताड़ना और बलात्कार के बाद वह देश से फरार हो गया अथवा पूरा का पूरा मणिपुर राज्य जिस आग में झुलस रहा है उसे आग में देश की सेना की पत्नी को निर्वस्त्र करके जुलूस निकालने व अन्य महिलाओं के साथ इसी प्रकार की अभद्रता के मामले में भाजपा की महिला मोर्चा ने कभी भी संज्ञान नहीं लिया। ऐसे में स्वाति मालीवाल का मामला सिर्फ महिला होने के कारण संवेदनशील हो जाता है

महिला मोर्चा के लिए यह समझ से परे है।
यह देश दुनिया की बातें हैं। हम शहडोल के सपटा गांव की सुबह के वक्त उठा ली गई नाबालिक युवती को अपहरण करके छतरपुर और फिर उत्तर प्रदेश भगाकर ले जाने के मामले में आज चर्चा करेंगे। जिसमें क्या मध्य प्रदेश की पुलिस सिर्फ इसलिए चुप हो गई है क्योंकि अपहरण करता का पूरा परिवार और रिश्तेदार यादव समाज के हैं…? इसलिए पुलिस ने नाबालिक युवती के अपहरण को नजरअंदाज कर ठंडा बस्ती में डाल दिया है… फिलहाल तो ऐसा ही दिखता है।
सूत्रों के अनुसार पपौंध थाना क्षेत्र में दर्ज शिकायत के अनुसार मानिक यादव छतरपुर द्वारा नाबालिक कुसुम (बदला हुआ नाम) को अपहरण किए जाने की शिकायत पिता द्वारा बताया गया नाबालिक लड़की दिनांक 5.5.24 के सुबह 5:30 सौंच करने के लिए गई थी फिर वह वापस नहीं लौटी

तमाम तलाश करने के बाद जिसकी शिकायत थाना पपोंध में करीब 5:45 बजे किया था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस के द्वारा बताए गए स्थिति पर मोबाइल ट्रेस आउट किया गया और राजन तिवारी ए एस आई तथा नवी खान पुलिस तथा एक महिला आरक्षक संगीता साहू मुझे लेकर उक्त स्थल पर गए जो उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश की सीमा स्थित महोबा जिले के श्रीनगर थाना अंतर्गत ग्राम बरा में गए। जहां पर कथित आरोपी मानक यादव जो ड्राइवर है वह नहीं मिला और ना ही लड़की मिली बल्कि उसका क्लीनर अहिरवार मिला जिसने बताया कि वह मानक यादव उसका मोबाइल लेकर उपयोग किया है। और पूछताछ में उसने कहा कि मेरी लड़की को लेकर मानक यादव वहीं पास में अपने फूफा मुरलीधर यादव जो होमगार्ड में काम करता है उसके यहां मेरी लड़की को मानक यादव रखा था। जहां पर पता चला की मानक यादव, लड़की को लेकर आया था और अपने मामा की लड़कीहै वह 2 दिन रहने के बाद चला गया। लड़की काफी सुस्त थी और बीमारी हालत में बताई गई थी।
नाबालिक के पिता के अनुसार हम मानक यादव के घर मध्य प्रदेश के बलया थाना बड़ा मलहरा जिला छतरपुर गए जहां उसकी पूरे परिवार के लोग मेरी लड़की के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दिए। जिससे प्रतीत होता है की मानक यादव मेरी लड़की का अपहरण करके अपने फूफा के परिवार में ले गया और इसके बाद परिवार के साथ मिलकर के षड्यंत्र करके मेरी लड़की को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। जिससे मुझे खतरा लगता है कि कहीं लड़की की हत्या न कर दी जाए।
अपहृत लड़की के पिता ने कहा उक्त सभी लोग मेरी नाबालिक लड़की को मेरे गांव से अपहरण करके षडयंत्र पूर्वक छुपा कर रखे और उसमें शामिल रहे हैं। अगर उनसे कड़ाई से पूछताछ की जाएगी तो पूरी स्थिति सामने आ जाएगी। लड़की भी सुरक्षित मिल सकती है।
बेहद दुखी मन से भवानी के पिता ने कहा गांव में ही मेरी लड़की सुरक्षित नहीं रह पाई और दिनों बाद भी लड़की को अपहरण कर्ताओं से मुक्ति नहीं मिलने से मेरे वह गांव के अन्य परिवार के लोगों के लड़कियों के लिए भी एक बड़ा खतरा हो गया है।\

राजनीतिक हथियार न बनने के कारण अपहृत नाबालिक का अब तक नहीं चला पता..
ऐसा नहीं है कि व्यवहारी क्षेत्र की महिला मोर्चा या शहडोल जिले की महिला मोर्चा इस मामले में संवेदनशील नहीं हो सकती हैं । किंतु ऐसा देखा नहीं गया क्योंकि उनके आका ने ऊपर से इसमें कोई राजनीतिक उद्देश्य पूर्ति नहीं देखी है।इससे यह साबित होता है की महिला मामले की प्रताड़ना की संवेदना का मामला सिर्फ राजनीतिक उपयोग और हित के लिए ही शासन के लिए संवेदनशील है । इससे ज्यादा कुछ भी नहीं। फिलहाल तो मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव का प्रशासन काम नहीं कर रहा है। क्योंकि चुनाव फर्स्ट है। फिर भी मध्य प्रदेश की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शहडोल जिले के इस नाबालिक युति के अपहरण किए जाने के मामले में संजीदा क्यों नहीं दिखाई देती है, तो क्या प्रशासन भी राजनेताओं के तरह उनकी मन्सा के हिसाब से जातियों को देखकर कार्रवाइयों को अंजाम देता है …? अन्यथा देखा गया है कि जब एक भाजपा के नेता की लड़की गायब हो गई तो उसे दिल्ली में जप्त कर लिया गया था ट्रेस आउट करके अथवा जब तक उसका राजनीतिक उद्देश्य पूर्ति के मामले में विषय वस्तु उपयोगी ना हो ऐसे में सपटा की नाबालिक युति को उसके गांव से उठाकर अपहरण करके ले जाकर दुराचार अथवा बलात्कार किए जाने के मामले को आंखें क्यों नजर अंदाज किया जा रहा है…?
क्या शहडोल का प्रशासन और पुलिस भी राजनीतिक उद्देश्य पूर्ति के हिसाब से मामले की संवेदना को चिन्हित कर प्राथमिकता करती है यह संदेह इसलिए भी प्रबल होता है की एक पखवाड़ा बीतने को हो रहे हैं। सपटा गांव की नाबालिक अपहरण को आखिर पुलिस और प्रशासन का तंत्र क्यों नहीं पकड़ पाया…? जबकि व्यवहारी क्षेत्र के विधायक शरद कोल हो या फिर सांसद रीति पाठक हो अथवा शहडोल प्रशासन क्षेत्र की महिला सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह हो अपहृत नाबालिक के मामले में क्यों संवाद नहीं ले पा रही हैं।
तो क्या समझना चाहिए की पूरे आदिवासी क्षेत्र का जिले मे जब जिसकी जहां इच्छा पड़ेगी वह लड़कियों को अपहरण करके उसके गांव घर से बाहर ले जाएगा। वह चाहे तो बेच दे, वह चाहे तो बलात्कार करें, वह चाहे तो यौनाचार करें उसके प्रति हम एक नपुंसक समाज के हिस्सा होते जा रहे हैं…? ऐसा भी क्यों नहीं समझना चाहिए। 20 साल भाजपा की राजनीति में क्या पुलिस और प्रशासन को अक्षम बना दिया है या फिर वह यादव जाति से भयभीत हो रही है…?


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