
बतौर प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी का यह पहला संसदीय भाषण था और अपने पहले ही भाषण में उन्होंने आरएसएस, बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा हमला किया । यह अलग बात है कि प्रधानमंत्री ने जो उत्तर दिया वह पद की गरिमा के अनुरूप नहीं था शोले फिल्म की मौसी प्रधानमंत्री के भाषण में संसद में जगह पा सकी।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए कहा जो खुद को हिंदू कहने वाले हर समय हिंसा और नफरत फैलाने में लगे हैं। जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में खड़े होकर विरोध किया। राहुल गांधी यही नहीं चुप हुए उन्होंने कहा हर समय हिंसा की बात करने वाले हिंदू नहीं है, भाजपा सरकार पर गृह युद्ध थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा मणिपुर में भाजपा की नीतियों ने गृह-युद्ध की ओर धकेल है… भारत के करोड़ों परिवारों को प्रभावित करने वाली किशोर विद्यार्थियों के “नीट” की परीक्षा में पेपर लीक हो जाने के कारण जो वर्तमान हालात पैदा हो गए हैं उस अराजकता के बीच में राहुल ने कहा इस सरकार ने एक पेशेवर परीक्षा को व्यावसायिक परीक्षा में तब्दील कर दिया है ।
दरअसल राहुल गांधी नीट परीक्षा के मामले पर राष्ट्रपति के अभिभाषण से हटकर विस्तार से चर्चा करना चाहते थे किंतु नियमों का हवाला देकर न सिर्फ उन्हें चुप करने का काम किया गया बल्कि सदन को दो दिन बाद के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्थगित कर दिया था।
शुक्रवार को सदन स्थगित हो जाने के बाद शनिवार को कांग्रेस पार्टी ने नीट परीक्षा पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा परीक्षा आयोजित करिए किए जाने के तौर तरीके पर हमला किया। पत्रकार वार्ता में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ परिचय लीक करने वाले गुजरात के गोधरा के शैक्षणिक संस्थाओं व अन्य राज्यों की संस्थाओं के करीबी रिश्तों को प्रदर्शित किया गया राहुल गांधी इसी की व्याख्या करते समयाभाव के कारण इस नीट पेशेवर परीक्षा को व्यावसायिक परीक्षा के रूप में परिवर्तित कर देने का आरोप लगाया।सब जानते हैं की किस प्रकार से करोड़ों रुपए लेकर के राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित नकल माफिया ने नीट के पेपर लीक कराया जिसे पर्चा फोड़ भी कहा जाता है।
इसके अलावा प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने अपनी उस पुरानी छवि को नष्ट करने का काम किया जिसमें पिछले 10 साल में उन्हें पप्पू कहकर चिढ़ाया जाता था हालांकि प्रधानमंत्री ने इसे पुनः स्थापित करने का असफल प्रयास किया। लोकसभा के अंदर राहुल गांधी ने क्रिकेट की भाषा में कहें तो छक्के पर छक्का लगाते चले गए और सत्ता पक्ष के तमाम विकेटकीपर खड़े होकर कैच पकड़ने का असफल प्रयास करते देखे गए।
अंतिम छक्का भी उन्होंने बाउंड्री वॉल में आरएसएस और भाजपा रणनीति में जाकर जंप किया और वापस मैदान में आकर कैच कर लिया। राहुल गांधी के इस मानवीय अवतार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बायोलॉजिकल अवतार धराशाई हो गया। हालात इस कदर खराब हुई कि कल तक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जो स्वयं को शेर समझते थे भीगी बिल्ली की तरह राहुल गांधी के आक्रमण को झेलते रहे।
इस तरह कहा जा सकता है की सत्ता में राहुल गांधी का ना आना एक मजबूत विपक्ष के प्रशिक्षण संस्थान के रूप में लोकसभा में देखा जाएगा। और आने वाले समय में जब तक भारतीय जनता पार्टी कि यह एनडीए सरकार सत्ता में है उन्हें पिछले 10 सालों का हिसाब देना होगा। जैसा कि राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर कहा कि 10 साल का कार्यकाल फिल्म का ट्रेलर था फिल्म अभी बाकी है…
18वीं लोकसभा में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश सिंह ने अपने शांत स्वभाव के स्टाइल पर लोकसभा में सत्ता-पक्ष को बेजुबान कर दिया पिछले लोकसभा में लोकसभा से निकल गए सांसद संजय सिंह और महुआ मोइत्रा ने सत्ता पक्ष को उनकी कर प्रणाली के लिए जबरदस्त खरी-खोटी सुनाई। कुल मिलाकर सत्ता पक्ष और विपक्ष की 18वीं लोकसभा में पंचायती पंचायत की तरह पंचायत होता रहा फिलहाल निष्कर्ष वाली लोकसभा देखने को नहीं मिली यह आने वाले समय में और भी रोमांचक तथा अंदर बाहर के युद्ध का कारण बनेगी जैसा की टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने खुलकर कहा, युद्ध संसद के अंदर भी होगा और बाहर भी, संवाद का युद्ध।

