शहडोल जैसे शोषित आदिवासी विशेष क्षेत्र से निकाल करके खेल की दुनिया में अपना विश्व व्यापी स्थान बनाने वाली पूजा वस्त्राकर करने अपने करियर का सबसे शानदार प्रदर्शन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ किया है। जिसकी चर्चा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अखबारों में जबरदस्त बनी हुई है। अपने छुटभैया नेताओं के बड़े-बड़े पोस्टर लगाने वाले अवसरवादी राजनीतिकों को इसका भी लाभ क्यों नहीं उठाना चाहिए.. दुर्भाग्य है कि ऐसे अवसरों को शहडोल के खेल प्रतिस्पर्धा में रोमांच उत्साह के लिए प्रायोजित नहीं किया जाता। उसे इन अवसरों पर विस्तार से खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए अवसर नहीं माना जाता । यही कारण है की शोषण के तमाम उद्योगों का शहडोल में अलग-अलग तरीके से उपयुक्त हो रहा है किंतु खेल प्रतियोगिता के लिए शहडोल में विश्व व्यापी अवसर तलाश में की और पैदा करने का काम ना के बराबर हो रहा है। चाहे तो जो उद्योगपति शहडोल में करोड़ों,अरबों बैध और अवैध तरीके से कमाने वाले लोगों को शहडोल में खेलों को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि युवा ऊर्जा का राष्ट्रीय गरिमा का अंश बनाया जा सके किंतु यह तभी संभव है जब इन उद्योगपतियों अथवा फिर राजनीतिकों को आदिवासी विशेष क्षेत्र के लोगों से प्यार हो…