
“प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्” मृत्यु सत्य नहीं… फिर इस्तीफा किस बात का; नहीं मोहन इस्तीफा नहीं देना..
नहीं, मोहन यादव मुख्यमंत्री को क्यों इस्तीफा देना चाहिए…. क्योंकि जबलपुर में एक नाव डूब गई उसमें कुछ लोग मर गये… क्योंकि नाव में सेफ्टी जैकेट का इस्तेमालनहीं हुआ, क्योंकि बचाव दल वहां नहीं था, इसलिए इस्तीफा क्यों देना चाहिए… मोहन यादव नहीं उनके शोरबा संबंधित मंत्री को भी इस्तीफा क्यों देना चाहिए…? वैसे भी भाजपा में नयी व्यवस्था में इस्तीफा देने का प्रचलन नहीं है.. जब तक की आका की इच्छा ना हो, किसी घटना के कारण कभी किसी को इस्तीफा देते देखा भी नहीं गया है।भाजपा के सत्ता का इतिहास तो यही बतलाता है ।फिर सही बात यह भी है कि इस्तीफा देने से कोई जिंदा तो होने वाला नहीं…..
————————( त्रिलोकी नाथ)————————-
क्या हम भूल गए की रीवा अमरकंटक सड़क मार्ग को कांग्रेस पार्टी के दिग्विजय सिंह ने बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर सिस्टम (बीओटी) में सिर्फ 110 करोड रुपए में तब बनवाया था और उसका समय के बाद 10 साल का मेंटेनेंस में रखने का सरकारी का कार्यकाल भी पूरा नहीं हुआ था और इस सड़क की कमी के चलते बाणसागर के पास सोन नदी के नहर एक पूरी बस समा गई थी, जिसमें 56 यात्री जल समाधि लेकर मर गए थे तब क्या किसी ने इस्तीफा दिया था, नहीं दिया था… इसलिए मोहन यादव को या उसके शोरबा को इस्तीफा नहीं देना चाहिए…।
सत्ता एक अलग चीज है सत्ता से इतर होने वाली घटनाएं एक अलग चीज है… गुजरात में पुल टूटा था वहां तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंचे थे, जो मर चुके थे उनकी छोड़िए.. जो बच गए थे उनको देखने के लिए अस्पताल में गए थे तब अस्पताल को चमकाया जा रहा था यह तो याद है… किंतु क्या यह याद है कि गुजराती किसी ने इस्तीफा दिया था… और अगर गुजरात मॉडल है सत्ता में रहने का तो इस्तीफा क्यों देना चाहिए….. किसी को।
क्या योगी आदित्यनाथ ने या उसके सोरबा ने इस्तीफा दिया था जब वृंदावन में नाव डूब गई थी और कई लोग मर गएथे, नहीं दिया था। यह सब जल दुर्घटनाएं की सूचियां हैं और अलग-अलग। छोड़िए लोग मरते रहते हैं जीवन का सत्य यही है जो आया है उसको मरना ही है तो क्या इस बार इस्तीफा इसलिए देना चाहिए मोहन यादव या उसके शोरबा को क्योंकि मरने वाले भारत के कई हिस्से के लोग हैं… हो सकता है उसमें कुछ भाजपा के लोग भी हो किंतु इसमें भेदभाव नहीं करना चाहिए।
जीवन मुक्त बाबा प्रेमानंद जी की कहते हैं मृत्यु सत्य नहीं है क्योंकि मृत्यु में कोई मरता नहीं है, जीवन पांच तत्व का बना होता है वह समय पूरा होने पर अपने-अपने स्वरूप में चला जाता है.. मिट्टी, मिट्टी में ,आकाश आकाश में, वायु वायु में, अग्नि अग्नि में, जल जल में, पराविज्ञान ऐसा ही कहता है। तो कहां कोई मरा…? समय पूरा हुआ घटनाएं घटी लोग चले गए… पंचतत्व स्वयं में विलीन हो गया… चेतना, चेतना में चली गई…. तो शोक किस बात का…? इसलिए भी मोहन यादव को अपने बौद्धिक शाखा से आने वाले ज्ञान के हिसाब से इस्तीफा नहीं देना चाहिए।
क्योंकि वह इलेक्ट नहीं है सिलेक्टेड हैं और सिलेक्टेड व्यक्ति आका के प्रति वफादार होता है। जब आका कहेंगे तब आदेश का पालन होगा यही नियम है।रह गया घटनाएं तो होती ही रहती हैं और होंगी इन्हें कोई नहीं रोक सकता। रीवा अमरकंटक सड़क मार्ग में बाणसागर के पास जो 56 लोग डूब के मर गए उसमें क्या एक चपरासी ने भी जिम्मेदारी उठाई थी या उसे जिम्मेदार ठहराया गया, नहीं… जिम्मेदारी भी एक भ्रम है लोकतंत्र में बैठे हैं इसलिए इन शब्दों का उपयोग करना पड़ता है… अन्यथा लोकसभा में होते तो इस शब्द को भी प्रतिबंधित करदिया गया क्योंकि शासन चलाने के लिए कुछ कड़े नियम लागू करने पड़ते हैं ,अन्यथा अनुशासन नहीं चल सकता।
इसलिए भी मोहन यादव जी या उनके सोरवा जी इस्तीफा मत देना। अधिकारी कर्मचारी यह कीड़े मकोड़े इस तरह के हैं जैसे उपभोक्ता होता है जरूरत पड़ेगी यह बलिदान उनसे ले लिया जाएगा। अब शहडोल को ले ले मान ले रिलायंस इंडस्ट्रीज की गैस पाइपलाइन में जो इलाहाबाद फूलपुर तक जाती है उसमें कहीं कोई विस्फोट हो गया कुछ लोग मर गए तो कौन जिम्मेदारी लेगा कोई नहीं लेगा…. क्योंकि यहां सिस्टम कानून अनुशासन के दायरे में काम करता है.. जब गैस निकालने का अनुबंध खनिज विभाग यह संबंधित विभाग से नहीं है तो होने वाले एक्सीडेंट के लिए कौन जिम्मेदार होगा…? कोई नहीं होगा। ऐसा अनुभव में आया है। अमलई के पास इसी रिलायंस की एक गड्ढे में कुछ बच्चियों लगभग मरते मरते बच गई थाना अमलई ने रिपोर्ट दर्ज भी कर लिया। तब के एसपी साहब ने कहा, गलत किया और और दोषी बनाए गए रिलायंस के कर्मचारी एफआइआर से बाहर हो गए। सही भी है जब अनुबंध ही नहीं है तो जिम्मेदार कौन होगा..? कोई नहीं होगा। 2009 से रिलायंस खोदा खादी करके गैस निकाल रही है 2026 तक कोई अनुबंध नहीं। दुर्घटना में मरने वालों की स्वाभाविक मौत होती है। मृत्यु थी, इसलिए हुई। इसमें कोई क्यों दोषी होगा..? यही विकास का नया मॉडल है।
शहडोल में सीवर लाइन में पिछले साल दो आदिवासी मजदूर दब कर मर गए हमारे विधायक और भाजपा संगठन के लोग उन गुजरातियों के हवाले से कुछ लाख रुपए का चेक लेकर घूंस के तौर पर, राहत के तौर पर जैसी इच्छा हो मान लीजिए मजदूरों के घर तक पहुंच गए जैसे सीवर लाइन वाले गुजरातियों की गुलाम हो… स्वाभाविक ज्ञान से तो संभव नहीं आका ने कहा होगा इसलिए यह किया… आज तक गुजराती कंपनी के किसी मालिक या उसके शोरबा के खिलाफ पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं हुआ… जब इन पिद्दी और पिद्दी के शोरबों के खिलाफ जिम्मेदारी तय करने की हिमाकत हममें नहीं है तो मोहन जी मुख्यमंत्री हैं उनके संबंधित मंत्री उनके शोरबा है इन्हें इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है। यह गौरवशाली विकसित हो रही परंपरा के खिलाफ होगा। यह नया लोकतंत्र है जो मृत्यु को असत्य मानता उसे स्वाभाविक मानता है और उसके आधार पर काम करता है इसलिए भी मोहन बाबू… इस्तीफा मत देना और अपने शोरबा को भी बोलना कि वह इस्तीफा न दे…।
भविष्य में कोई अवसर मिलेगा जब उनकी ही पार्टी का कोई आका स्तर का व्यक्ति,अधिकारी या मालिक ऐसी किसी मृत्यु को प्राप्त होगा तब वह सत्य होगी.. यह बड़े नसीब वालों को अवसर मिलता है तब इस्तीफा दे देना…. अभी जरूरत नहीं है…. अभी और दुर्घटनाएं होने दीजिए क्योंकि गुड गवर्नेंस कायम है जैसे अंधेरा कायम है जब रोशनी आएगी तब देखा जाएगा…. फिलहाल तो 4 तारीख का यह जश्न मनाना बाकी है रही शहडोल वालों के लिए बाल न्यायालय के बगल में यही जेल भवन के पास जहां भाजपा का चुनाव कार्यालय लगता था शराब की दुकान खुलने वाली है चाहे तो एडवांस से बुला ले जश्न तो जश्न है..
कहा ही गया है
शराब चीज ही ऐसी है, ना छोड़ी जाए.
तू मेरे यार के जैसी है ना छोड़ी जाए…
फिर इस्तीफा क्यों देना जस्न का समय आ गया है फिर इस्तीफा क्यों देना, कभी शिव को श्मशान में नाचते नहीं देखा क्या… यही अवसर है… जब बाणसागर में लाशों पर इस्तीफा नहीं हुआ है तो मध्य प्रदेश तो यही है जबलपुर की लाशें तो फिलहाल कम है 56 से ज्यादा हो तो कुछ और बात होती अभी तो इस्तीफा बिल्कुल नहीं देना यही आज का प्रत्यक्षम् किम प्रमाणम् है
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जबलपुर के बरगी क्रूज़ हादसे पर प्रधानमंत्री की संवेदनाएंभोपाल : शुक्रवार, मई 1, 2026, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबलपुर जिले के बरगी में नर्मदा नदी पर क्रूज़ पलटने की दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इस हादसे को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर इस दुखद घटना में अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन प्रभावितों की हर संभव सहायता में जुटा हुआ है।प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से राहत राशि की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हादसे में प्रत्येक मृतक के परिजन को 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। वहीं घायल लोगों को 50-50 हजार रुपये आर्थिक सहायता दी जाएगी।
श्री काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी के पावन परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने अपनी सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आभा से डिजिटल दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अनूठी पहल ने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर 78 लाख 42 हजार 167 से अधिक लोगों तक अपनी डिजिटल रीच दर्ज कराई है।

