राजेंद्र शुक्ल 8 मई 2026 को शहडोल जिले के प्रवास पर/ करोड़ों लोगों की जिंदगी, सुपर अल-नीनो का खतरा मंडरा रहा/अदाणी ने वियतनाम के राष्ट्रपति से की मुलाकात

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   मध्यप्रदेश शासन के उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल 8 मई 2026 को शहडोल जिले के प्रवास पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उप मुख्यमंत्री प्रातः 8:30 बजे रीवा से देवलोंद, जिला शहडोल के लिए प्रस्थान करेंगे। प्रातः 9:30 बजे देवलोंद पहुंचेंगे। उप मुख्यमंत्री सर्किट हाउस बाणसागर में प्रातः 10 बजे से जिला प्रबंध समिति की बैठक लेंगे तथा प्रातः 11 बजे जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक लेंगे। बैठकों के पश्चात उप मुख्यमंत्री दोपहर 12:30 बजे देवलोंद से रीवा के लिए प्रस्थान करेंगे।
नीति आयोग ने ‘भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली:रूपरेखा’ विषय पर रिपोर्ट जारी की

नीति आयोग के उपाध्यक्ष  सुमन बेरी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्रीमती निधि छिब्बर ने 6 मई, 2026 को ‘भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली: गुणवत्ता संवर्धन के लिए सामयिक विश्लेषण और नीतिगत रूपरेखा’ नामक एक रिपोर्ट जारी की। इस कार्यशाला में स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव समेत 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। प्रतिभागियों में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रधान सचिव, एनसीईआरटी और एससीईआरटी के निदेशक, जिला कलेक्टर, यूनेस्को, एनयूईपीए के प्रतिनिधि और विभिन्न नागरिक समाज संगठनों के पदाधिकारी शामिल थे।आज भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में 14.71 लाख स्कूल हैं। इनमें 24.69 करोड़ से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं और यह विश्व की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली है। रिपोर्ट में 13 व्यापक अनुशंसाओं सहित एक विस्तृत नीतिगत रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। 8 प्रणालीगत अनुशंसाओं में समग्र विद्यालयों और साक्ष्य-आधारित युक्तिकरण के माध्यम से विद्यालय संरचना में सुधार, विद्यालय अवसंरचना को सुदृढ़ करना, शासन सुधार और प्रशासनिक क्षमता निर्माण, विद्यालय गुणवत्ता पर राज्य और जिला कार्य बलों के माध्यम से समग्र समाज दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देना, विद्यालय प्रबंधन समितियों को सुदृढ़ करना, शिक्षकों की तैनाती और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देना, डिजिटल और प्रसारण-आधारित शिक्षा का विस्तार करना और समानता एवं समावेशन को बढ़ावा देना शामिल है। 5 शैक्षणिक अनुशंसाएं शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन और मूलभूत शिक्षा में परिवर्तन लाने, समग्र शिक्षा और छात्र कल्याण पर बल देने, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल एकीकरण की पुनर्कल्पना करने, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को सुदृढ़ करने और शैक्षणिक नवाचार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एकीकृत करने पर केंद्रित हैं।

गौतम अदाणी ने वियतनाम के राष्ट्रपति लाम से की मुलाकात

मुंबई: सात मई (भाषा)  गौतम अदाणी ने बृहस्पतिवार को यहां वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम से मुलाकात की। लाम भारत की यात्रा पर आए हुए हैं।बंदरगाह, ऊर्जा, सीमेंट और सेमीकंडक्टर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वाले अदाणी समूह के प्रमुख ने भारत-वियतनाम व्यापार मंच के समापन के तुरंत बाद लाम से मुलाकात की।

करीब 20 लाख कैश बैगों को नौवीं मंजिल से नीचे फेंक दिया ,12 जगह तलाशी ली

चंडीगढ़,(ईएमएस)। प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को पंजाब के सीएम भगवंत मान के ओएसडी के करीबी सहयोगियों के पंजाब के एसएएस नगर और चंडीगढ़ स्थित तीन ठिकानों की तलाशी ली। खरड़ स्थित एक आवासीय सोसायटी वेस्टर्न टावर्स में छापेमारी के दौरान ईडी ने दो बैग जब्त किए, जिनमें करीब 20 लाख कैश थे। इन बैगों को इमारत की नौवीं मंजिल से नीचे फेंक दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईडी के अधिकारियों ने खरड़ के पास छज्जू माजरा स्थित वेस्टर्न टावर्स के फ्लैट नंबर 906 में जांच के लिए जैसे पहुंचकर नकदी से भरे उन बैगों को अपने कब्जे में ले लिया। एक अधिकारी ने बताया कि फ्लैट में मौजूद लोगों ने तुरंत नकदी से भरे दो बैग नीचे फेंक दिए। ईडी अधिकारियों ने तत्काल उन बैगों को अपने कब्जे में ले लिया और मौके पर बिखरे हुए नोटों के बंडलों को इकट्ठा कर लिया। ईडी ने सनटेक सिटी प्रोजेक्ट के सिलसिले में मोहाली और चंडीगढ़ में 12 जगहों पर तलाशी ली है। इस मामले में अजय सहगल, एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड, एटलस बिल्डर्स, धीर कंस्ट्रक्शंस और उनके सहयोगी शामिल हैं।

करोड़ों लोगों की जिंदगी, सुपर अल-नीनो का खतरा मंडरा रहा

टोक्यो,(ईएमएस)। एशिया को संकट एक साथ कई दिशाओं से घेरते नजर आ रहे हैं। एक तरफ मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को झटका लग रहा है, तो दूसरी तरफ अब सुपर अल-नीनो का खतरा मंडरा रहा है। यह एक ऐसा संभावित झटका है जो करोड़ों लोगों की जिंदगी, अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। गर्मी की चरम स्थिति, सूखा, बाढ़ और ऊर्जा संकट ये सभी मिलकर एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों की मानें तो अगर अल-नीनो मजबूत रूप में विकसित होता है, तो एशिया के कई देशों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। इसका सीधा असर बिजली की मांग पर पड़ेगा, क्योंकि लोग कूलिंग के लिए ज्यादा ऊर्जा का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन समस्या यह है कि पहले से ही ऊर्जा आपूर्ति बाधित है, खासकर तेल और गैस के मामले में। ऐसे में बिजली कटौती, महंगे ईंधन और आर्थिक दबाव का खतरा और बढ़ जाएगा। अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो कुछ सालों में सामने आती है, लेकिन इस बार इसके सुपर होने की आशंका जताई जा रही है। यह घटना हवा के दबाव, समुद्र के तापमान और बारिश के पैटर्न को बदल देती है, इससे कुछ इलाकों में सूखा और कुछ में भारी बारिश होती है। यही असंतुलन एशिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। ऊर्जा क्षेत्र पर इसका असर सबसे पहले दिखाई देगा। मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते पहले ही तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। अगर तापमान और बढ़ता है, तो बिजली की मांग आसमान छू सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ऊर्जा ग्रिड पर भारी दबाव पड़ेगा और कई देशों को बिजली कटौती या रेशनिंग करनी पड़ सकती है। इसका असर उद्योगों और आम लोगों दोनों पर पड़ेगा। जलविद्युत उत्पादन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। एशिया के कई देश, खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया और हिमालयी क्षेत्र, बिजली के लिए जलविद्युत पर निर्भर हैं, लेकिन सूखे की स्थिति में नदियों का जलस्तर गिर सकता है, इससे बिजली उत्पादन कम हो जाएगा। सूखा और अनियमित बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर उत्पादन घटता है और लागत बढ़ती है, तो खाद्य कीमतों में उछाल आएगा। इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा, जिससे भुखमरी का खतरा बढ़ सकता है। कुछ इलाकों में इसके उलट भारी बारिश और बाढ़ का खतरा भी रहेगा। दक्षिणी चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के हिस्सों में अल-नीनो के दौरान अचानक तेज बारिश देखी जाती है। इससे फसलें बर्बाद हो सकती हैं और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है। एक तरफ सूखा और दूसरी तरफ बाढ़ दोनों ही स्थितियां आर्थिक नुकसान को बढ़ाएंगी। जलवायु परिवर्तन इस पूरे परिदृश्य को और जटिल बना रहा है। वैज्ञानिक अभी पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि ग्लोबल वार्मिंग अल-नीनो को कैसे प्रभावित करती है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि देश अपनी ऊर्जा व्यवस्था को विविध और टिकाऊ बनाएं। सौर और पवन ऊर्जा जैसे विकल्प भविष्य में ऐसे संकटों से बचाव का रास्ता बन सकते हैं।

 


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