
‘चौंकाने वाले आदेश’ न्यायपालिका के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करते हैं: न्यायालय
नयी दिल्ली: 22 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि अदालत द्वारा पारित ‘चौंकाने वाले आदेश’ न्यायपालिका के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करते हैं।प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह टिप्पणी गुजरात राजस्व न्यायाधिकरण के कार्यवाहक अध्यक्ष को प्रशासनिक अवकाश पर भेजने के लिए गुजरात सरकार को उचित निर्देश देने के आदेश को चुनौती देने के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
कॉकरोच जनता पार्टी के बढ़ते फॉलोअर्स पर थरुर की दो टूक
नई दिल्ली,(ईएमएस)।
देश की राजनीति में इन दिनों एक अजीब और अनोखे नाम ने सोशल मीडिया पर भारी हलचल मचा रखी है। यह नाम है कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी। भले ही यह कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं है और न ही इसके पास कोई चुनावी मशीनरी या जमीनी संगठन है, लेकिन डिजिटल दुनिया में इसका असर इतना व्यापक हो चुका है कि इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में इसने कई स्थापित बड़े दलों को भी पीछे छोड़ दिया है। अब इस पूरे अनोखे और व्यंग्यात्मक ऑनलाइन मूवमेंट पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। थरूर ने स्पष्ट किया है कि इसे सिर्फ एक वायरल मजाक या इंटरनेट ट्रेंड मानकर खारिज नहीं किया जा सकता, बल्कि यह देश के युवाओं की व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी और सिस्टम से बढ़ती दूरी का एक बड़ा और गंभीर संकेत है। थरूर ने एक विशेष इंटरव्यू के दौरान युवाओं के इस गुस्से और निराशा के मुख्य कारणों को रेखांकित किया। उनके अनुसार, हाल ही में हुए नीट पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी, बेकाबू महंगाई और युवाओं के सामने अवसरों की भारी कमी ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। यही वजह है कि एक सोशल मीडिया आधारित व्यंग्यात्मक अभियान अचानक देश के करोड़ों युवाओं की आवाज बनकर उभर आया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जब लोगों को अपनी बात रखने के सही मंच नहीं मिलते, तो वे नए रास्ते तलाशते हैं और सीजेपी उसी संचित गुस्से का एक डिजिटल विस्फोट है।
बाबा वेंगा की डरा रही है भविष्यवाणी-पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में अत्यधिक कमी
नई दिल्ली,(ईएमएस)। इस वक्त पूरा विश्व बड़े ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पहले से ही वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्त-व्यस्त थी, और अब अमेरिका व ईरान के बीच बढ़ता तनाव इस संकट को और गहरा कर रहा है। भू-राजनीतिक तनाव के इस माहौल के बीच, बुल्गारिया की भविष्यवक्ता बाबा वेंगा की एक कथित भविष्यवाणी इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है, जिसने आम जनमानस की चिंताओं को बढ़ा दिया है। अतीत में उनकी कई भविष्यवाणियों के सच होने के दावों के कारण लोग इस नई चेतावनी को लेकर भी आशंकित हैं। इंटरनेट पर चल रहे दावों के अनुसार, बाबा वेंगा ने वर्ष 2026 के लिए एक बड़ी चेतावनी दी थी, जिसके मुताबिक दुनिया को एक भीषण ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा। इस दौरान पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में अत्यधिक कमी आने की बात कही गई है। वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका इस डर को और पुख्ता कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रणनीतिक जलमार्ग बाधित होता है, तो यातायात के साधनों में ठहराव आ सकता है।
प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री जवाबदेह-सांसद जयराम
नई दिल्ली (ईएमएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक त्रासदी और दबाने के प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाबदेह ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और उसका तंत्र, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में सामने आई व्यापक अनियमितताओं के सबूतों को दबाने का प्रयास कर रहा है, और प्रक्रिया में प्रश्नपत्र लीक माफिया के साथ मिलीभगत कर रहा है। कांग्रेस नेता रमेश की कड़ी टिप्पणी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह के उन बयानों के बाद आई है, जिसमें उन्होंने एक संसदीय स्थायी समिति को बताया था कि नीट-यूजी परीक्षा का प्रश्नपत्र पूरी तरह से लीक नहीं हुआ था, बल्कि परीक्षा से पहले केवल कुछ प्रश्न ही सामने आए थे। इस दावे पर सवाल उठाकर कांग्रेस नेता रमेश ने कहा कि अगर परीक्षा में पूछे गए दर्जनों प्रश्नों वाला एक अनुमानित प्रश्नपत्र परीक्षा की तारीख से काफी पहले छात्रों के बीच प्रसारित हो रहा था, तब यह स्पष्ट रूप से लीक है। उन्होंने पूछा, अगर यह लीक नहीं है, तब क्या है? मोदी सरकार अब इसे क्यों नकारने की कोशिश कर रही है? कांग्रेस नेता ने 2018 में एनटीए के गठन के बाद से, मोदी सरकार पर एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में धोखाधड़ी की सच्चाई को दबाने के लिए प्रश्नपत्र लीक माफिया के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि नीट-यूजी 2024 में हुई पिछली अनियमितताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण 2026 के विवाद में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की घटनाएं फिर से सामने आईं।
‘सुपर एल नीनो’ जैसी खतरनाक जलवायु
वाशिंगटन (ईएमएस)। वर्ष 2026 के अंत तक ‘सुपर एल नीनो’ जैसी खतरनाक जलवायु स्थिति विकसित हो सकती है, जिसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर देखने को मिलेगा। यह गंभीर चेतावनी दी है विशेषज्ञों ने। प्रशांत महासागर में तेजी से बदलते समुद्री तापमान ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना सूखा, बाढ़, भीषण तूफान, खाद्य संकट और बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान जैसी स्थितियां पैदा कर सकती है। अमेरिका की नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन यानी एनओएए की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मई से जुलाई 2026 के बीच एल नीनो बनने की संभावना 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान इसके बने रहने की संभावना 96 प्रतिशत बताई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सुपर एल नीनो बनने की आशंका लगातार बढ़ रही है और कुछ मौसम मॉडल इसे अत्यधिक गंभीर स्तर तक पहुंचने की संभावना जता रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार सुपर एल नीनो उस स्थिति को कहा जाता है जब प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है। समुद्र के तापमान में यह बदलाव वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करता है। इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है और अत्यधिक गर्मी, बारिश या सूखे जैसी स्थितियां पैदा होने लगती हैं।

