
डीजल कालाबाजारी-जमाखोरी पर 90 दिनों-आदेश, 2026 अधिसूचित
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बेईमान तत्वों द्वारा डीजल की कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए “मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल (खुदरा दुकानों के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026” को अधिसूचित किया है।ये नियम अस्थायी उपाय हैं, जो शुरू में 90 दिनों तक वैध रहेंगे, और सभी खुदरा उपभोक्ताओं को डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।मई 2026 के महीने के आंकड़े, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (ओएमसी) के खुदरा आउटलेट्स के माध्यम से डीजल की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाते हैं, जिसमें 327 जिलों में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 80 जिलों में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई।नए नियामक उपाय विशेष रूप से खुदरा उपभोक्ताओं को खुदरा बिक्री केन्द्रों पर आपूर्ति में होने वाली अनियमितताओं से होने वाली असुविधा से बचाने के लिए बनाए गए हैं। इन उपायों का नागरिकों पर किसी भी तरह से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि कार या दोपहिया वाहन चलाने वाले औसत व्यक्ति के लिए 200 लीटर की सीमा किसी भी निजी वाहन की आवश्यकता से कहीं अधिक है।पश्चिम एशिया में जारी आर्थिक संकट के दौरान खुदरा उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान वहन कर रही हैं।
इस आदेश के अनुसरण में, अब केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों, अर्थात् इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को निम्नलिखित सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं:
- खुदरा बिक्री केन्द्रों पर डीजल केवल वाहनों के टैंकों या पीईएसओ द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ग्राहक/वाहन प्रति दिन 200 लीटर होगी। खुदरा दुकानों से खरीदा गया डीजल दोबारा बेचा नहीं जा सकता।औद्योगिक और प्रत्यक्ष उपभोक्ता या संस्थागत और वाणिज्यिक ग्राहकों को खुदरा दुकानों से ईंधन खरीदने की मनाही है और उन्हें अपनी आवश्यकताएं उपभोक्ता पंपों के माध्यम से ही पूरी करनी होंगी।
- तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) और खुदरा बिक्री केन्द्र संचालक निर्धारित प्रतिबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करने और आदेश के प्रावधानों को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास को रोकने के लिए जिम्मेदार होंगे।राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को निर्देश दिया गया है कि वे कालाबाजारी या अनधिकृत हेराफेरी जैसी किसी भी प्रकार की अनियमितताओं के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करें ताकि आम आदमी के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।इस आदेश के उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और लागू कानूनों के तहत दंड और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
“मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल ( खुदरा बिक्री केन्द्र के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026” को स्पष्ट रूप से एक अस्थायी उपाय के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे विशिष्ट, वर्तमान बाजार चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।यह कोटा आधारित आपूर्ति व्यवस्था का उपाय नहीं है, और देश में पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। गौरतलब है कि भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा तेल परिशोधक (रिफाइनर) और पांचवां सबसे बड़ा परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यातक है। सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए और ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखते हुए निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।12 JUN 2026 PIB Delhi
न्यायालय में नटराजन की याचिका खारिज होने के बाद अब राहुल को माफी मांगनी चाहिए: भाजपा
नयी दिल्ली: 12 जून (भाषा) मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर अपील को उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि राहुल गांधी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।शुक्रवार को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने साफ कहा कि एक बार निर्वाचन अधिकारी द्वारा नामांकन रद्द हो जाने के बाद उम्मीदवार के पास सिर्फ एक ही रास्ता बचता है, वह है निर्वाचन आयोग के पास जाना।
राहुल गांधी ने कहा कि आम बोलचाल की हिंदी में मरवा दिया
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में हुई बैठक में राहुल गांधी ने पीएम मोदी और उनकी नीतियों की कड़ी आलोचना की। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा कि बेरोजगारी युवाओं को परेशान कर रही है, परीक्षा पेपर लीक होने से छात्र परेशान हैं, विदेश नीति में कमियों की वजह से महंगाई बढ़ रही है, जिससे आम और गरीब नागरिक परेशान हैं। किसान अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर चिंतित हैं और संविधान की अनदेखी करके लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। इसी दौरान लोगों की मुश्किल हालत का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मोदी ने मरवा दिया। आम बोलचाल की हिंदी में मरवा दिया मुहावरे का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी पर भरोसा करने की वजह से किसी को नुकसान या मुश्किल का सामना करना पड़ता है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी इसी लाक्षणिक अर्थ में इस मुहावरे का इस्तेमाल कर रहे थे। राहुल पहले भी कह चुके हैं कि अर्थव्यवस्था की हालत इतनी खराब हो जाएगी कि एक साल बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे।

