
2 अगस्त को दैनिक भास्कर अखबार की यह लीड न्यूज़ है भोपाल में ऐसा ही हुआ है लेकिन शहडोल नगर मध्य प्रदेश से या तो बाहर का नगर है या फिर आदिवासी विशेष क्षेत्र जैसा कि भारत के संविधान लिखते वक्त संविधान निर्माता ने शहडोल के तकदीर में संविधान की पांचवी अनुसूची मे शामिल होने का ठप्पा लगा दिया है, शायद इसलिए गैर आदिवासी वर्ग के लोग शहडोल नगर पालिका में बैठकर गैर कानूनी तरीके से मनमानी निर्णय लेते हैं माफिया गिरी के अंदाज में आदेश पारित करते हैं मकान के निर्माण के लिए अनुमति देते हैं और जो लाखों करोड़ों रुपए लगाकर नगर पालिका के पदों को नीलामी में खरीदतें है उनके लिए ऐसे नियम कोई मायने नहीं रखते….
(त्रिलोकी नाथ)
और इसीलिए शहडोल नगर की पहली राजेंद्र नगर आवासीय कॉलोनी जो शहडोल के पूर्व इलाकेदार कुंवर मृगेंद्र सिंह ने 1963 में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ज्योतिप्रभा सिंह की आराजी पर विकसित किया था जो वर्तमान में अंबेडकर चौक स्थित राजेंद्र टॉकीज के पीछे करीब 13 एकड़ की जमीन में विकसित की गई 20-9-1963 को के मध्य प्रदेश चीफ टाउन प्लानर के द्वारा अनुमोदित की गई राजेंद्र नगर आवासीय कॉलोनी पर लागू नहीं होती है और इसीलिए शहडोल नगर में उन नियमों का पालन नहीं होता जो भोपाल में दैनिक भास्कर अखबार में प्रकाशित नियमों का पालन हो रहा है, और भोपाल के नागरिकों में वहां के प्रशासन पर इतनी दहशत भी है कि वह स्वयं आगे आकर अपनी गलतियों को ठीक कर रहे हैं दैनिक भास्कर लिखता है रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक निर्माण के खिलाफ शनिवार को नगर निगम की कार्रवाई का असर उम्मीद से कहीं बड़ा दिखा। शनिवार सुबह नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम अरेरा कॉलोनी, 10 नंबर मार्केट और रोहित नगर में 19 प्रतिष्ठानों को बंद कराने निकली थी, पर कुल 65 प्रतिष्ठानों ने खुद ही व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दीं।
कई प्रतिष्ठानों के शटर पर बैनर लगा था- ‘भोपाल नगर निगम के आदेशानुसार इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं।’ ज्यादातर जगह निगम को ताला लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। जिन प्रतिष्ठानों को अंतिम नोटिस दिया गया था, उनमें कई कारोबारी टीम के पहुंचने से पहले शटर गिरा चुके थे। कुछ अन्य ने समझाइश के बाद बंद कर दिया। भोपाल में पहली बार इतने बड़े स्तर पर कार्रवाई हुई। नगर निगम ने प्रतिष्ठान बंद करने वाले कारोबारियों से पंचनामा भी भरवाया। उन्होंने लिखित रूप से आश्वासन दिया कि सक्षम मंजूरी के बिना दोबारा परिसर का व्यावसायिकउपयोग नहीं करेंगे। यदि फिर से कमर्शियल गतिविधि शुरू की गई तो निगम कार्रवाई कर सकेगा। हालांकि अभी अस्पताल, मेडिकल स्टोर और बैंकों को छूट दी गई है।
बहरहाल बताते चलें की वर्तमान में शहडोल नगर पालिका में राजेंद्र नगर आवासी कॉलोनी से संबंधित सभी दस्तावेज वहां के रिकॉर्ड से गायब कर दिए गए हैं या गायब हैं ऐसे रिकॉर्ड अन्य शहडोल के शासकीय संस्थाओं में भी फिलहाल तो गायब ही है जब इस बात की जानकारी तब के नगर पालिका अधिकारी अक्षत बुंदेला को लगी तो उन्होंने कॉलोनाइजर श्रीमती ज्योतिप्रभा सिंह को इस आशा का पत्र भी लिखा कि वह संबंधित रिकॉर्ड नगर पालिका में उपलब्ध करामें, किंतु दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराया जा सका क्योंकि श्रीमती ज्योति प्रभा सिंह बीमारी में चल रही थी और फिर उनका निधन भी हो गया।
यह अलग बात है की मौका स्थल पर उनके द्वारा विकसित की गई कॉलोनी के अनुरूप ही जो उपलब्ध नक्शा है. उसके अनुसार ही पूर्ण विकास हुआ है.
समस्या वहां आ गई जहां पर सड़क, प्लेग्राउंड या तालाब को छुपा कर उसे नगर पालिका के पदाधिकारी द्वारा बेचा जाना था नगर पालिका के अधिकारी और पदाधिकारी दोनों ही इस वस्तु स्थिति को जानते हैं की नगरपालिका परिषद ने गैर कानूनी तरीके से आवासीय क्षेत्र की सड़क पर भवन निर्माण की अनुमति दे दी है क्योंकि दोनों को यह मालूम था की 1963 का रिकॉर्ड नगर पालिका के रिकॉर्ड से गायब कर दिया गया है. शायद उन्हें यह भी मालूम था कि अन्य शासकीय शहडोल के रिकॉर्ड में भी यह रिकॉर्ड गायब है इसलिए करोड़ों रुपए के सड़क भूमि पर भवन निर्माण करने के लिए स्टेट बैंक अधिकारियों से मिली भगत कर एक ऐसा भवन निर्माण का अनुमति तैयार कराया गया जिसमें करोड़ों रुपए का भवन का कर्ज भी लिया जा सके और हुआ भी वैसे.. पूरी योजना के अनुसार राजेंद्र नगर आवासीय कॉलोनी क्षेत्र में सड़क और प्लेग्राउंड पर अवैध निर्माण की अनुमतियां दे दी गई
जहां भवन बनने लगे लोक आवासीय कॉलोनी द्वारा निर्धारित सड़कों में भू-माफियाओं को कब्जा दिखाकर ऊपर से नगर पालिका की भवन निर्माण की अनुमति का मोहर लगाकर बैंक वालों ने करीब ढाई करोड रुपए का ऋण भी मिनांशु मस्ता नामक व्यक्ति को दे दिया। और उसमें नगर पालिका को नियंत्रित करने वाला एक परमानेंट ठेकेदार भवन का निर्माण भी कर डाला। निश्चित तौर पर सब कुछ सामने आ जाने के बाद भी यदि नगर पालिका परिषद ऐसे गैर कानूनी अनुमतियों को निरस्त नहीं कर रही है उसे पर जांच नहीं कर रही है निर्धारित सड़क और प्लेग्राउंड को आम लोगों के लिए सुरक्षित नहीं कर पा रही है तो वह यानी पूरी नगर पालिका परिषद और से संबंधित अधिकारी और पदाधिकारी इस सड़क और प्लेग्राउंड जो करोड़ों रुपए के हैं उसकी जमीन की कीमत का आपस में बंदर बांट किए हैं…. क्योंकि स्पष्ट तौर पर राजेंद्र नगर आवासीय कॉलोनी जो भौतिक रूप से स्थापित है उसे डिजाइन के अनुरूप उसका विकास है उसके अंश भाग में सड़क और प्लेग्राउंड की जमीन नगर पालिका के द्वारा गैर कानूनी अनुमति दी गई है. तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारी अभी तक दंडित क्यों नहीं किए गए..? जबकि उनके संज्ञान में संपूर्ण स्थिति भली भांति ला दी गई है यह अलग बात है कि यह मामला न्यायपालिका में जाए और न्यायालय उसे सुनिश्चित करें… किंतु नगर पालिका परिषद में बैठे हुए करीब 40 पार्षद के सभी लोगों को इस भ्रष्टाचार में करोड़ों रुपए जमीन की हेरा-फेरी कर जो गैर कानूनी संग्रहण किया गया है,क्या पूरे पार्षदों को बारोबारी से पैसा बंटवारा किया गया…? क्योंकि हर पार्षद अपनी औकात के हिसाब से चुनाव जीतने के लिए पैसा खर्च करता है तो सिर्फ कुछ पदाधिकारियों, अधिकारियों को करोड़ों रुपए भ्रष्टाचार के जरिए क्यों मिलना चाहिए..? और अगर यह पारदर्शी भ्रष्टाचार नहीं है तो पूरे पार्षद या तो अयोग्य हैं या फिर इतने ईमानदार कि उन्हें यह सब बिल्कुल नहीं दिखाई दे रहा है… या उनमें क्षमता नहीं है कि पारदर्शी-भ्रष्टाचार पर वह नगर पालिका में बहस कर सकें… और इसीलिए शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र में इस सार्वजनिक लूट को अंजाम दिया गया है.. अगर परिषद अपने कानूनी व्यवस्थाओं के पालन में किसी भी अज्ञात कारण से कहीं फेल हो जाती है तो संबंधित प्रशासन यह जिम्मेदारी है कि वह उसका पालन करावे और स्वयं संज्ञान लें अगर वह सार्वजनिक हो चुका है तो… किंतु ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है इसीलिए यह आदिवासी विशेष क्षेत्र है इस क्षेत्र में आने के बाद हर व्यक्ति यह अधिकारी उतना ही अपने अधिकारों के प्रति सीमित हो जाता है जितना इस क्षेत्र के आदिवासी अपने अधिकारों के प्रति सीमित हैं ऐसा प्रतीत होता है.. और यही कारण है की करोड़ों रुपए की राजेंद्र नगर आवासीय क्षेत्र की सड़क और प्लेग्राउंड पर खुला भ्रष्टाचार करते हुए नगर पालिका परिषद ने निर्माण की अनुमति देता है और उसे जनित करोड़ों रुपए का बंदर बांट भी किया है कहना गलत नहीं होगा….?

