हमारे युवा उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहें,राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

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भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 80वें स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश

  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज अल्जीरिया में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगी | आकाशवाणी न्यूज़ स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को मैं इस राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई देती हूं। अब से कुछ ही घंटों बाद, हमारे देश की स्वाधीनता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होगा। देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीय यह पर्व उल्लास के साथ मनाते हैं। हमारा तिरंगा हमारी स्वाधीनता का प्रतीक है। इसे हम पूरी शान से फहराते हैं।15 अगस्त 1947 के दिन भारतमाता पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुई। सभी देशवासी, स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बने। हम भारत के लोग, अपने सपनों को साकार करने के अवसरों का उपयोग कर सकें, और भारत को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की भावना से कार्य करें – इसी में स्वतन्त्रता की सार्थकता है। सभी नागरिक, राष्ट्र-निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। मैं उन सभी की हृदय से सराहना करती हूं। तीनों सेना

ओं के जवानों, सभी सशस्त्र पुलिस बलों एवं पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा के लिए मैं उनकी विशेष सराहना करती हूं।

आज 14 अगस्त के दिन को हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं। हम उन लाखों देशवासियों को याद करते हैं जो वि

nasa captures rare total solar eclipse over spain, shows multiple stages in one image

भाजन से जुड़ी हिंसा में मारे गए या विस्थापन की त्रासदी झेलने को मजबूर हुए। सांप्रदायिक हिंसा की वजह से लाखों लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा और बंटवारे की विभीषिका सहन करनी पड़ी। फिर भी, उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ीजब हमारा देश स्व

तंत्र हुआ, उस समय देश के विभाजन के गंभीर परिणामों के साथ-साथ, 550 से अधिक रियासतों को नवस्वाधीन भारत के साथ जोड़ना भी एक असाधारण चुनौती थी। सरदार पटेल ने राजशाही व्यवस्थाओं को समाप्त करके हमारे स्वाधीन लोकतन्त्र में उनका विलय किया। 

प्यारे देशवासियो,प्राकृतिक संपदाओं पर हमारी भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है जितना हमारा है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे किसी भी कार्य से, आने वाली पीढ़ियों द्वारा इस अधिकार के प्रयोग में तनिक भी कमी न हो। हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम उनको और अधिक समृद्ध प्राकृतिक संपदाएं प्रदान करें। पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी आस्था हमारी परंपरा का हिस्सा है। संताली भाषा के एक सरल गीत में हमें गहरा संदेश मिलता है। पंडित रघुनाथ मुर्मु द्वारा रचित उस गीत में, एक पेड़ के पूरी तरह सूख जाने के कारण रोते हुए एक तोते का वर्णन करते हुए कवि कह रहे हैं – ‘हे मेरे भाइयो! मरते हुए पेड़ को देखकर तोता-पक्षी दुख भरी आवाज में रो रहा है। हे मेरे भाइयो! मानव-संस्कृति रूपी वृक्ष का विनाश होता देखकर हम, मानव समाज के लोग, विलाप क्यों नहीं कर रहे हैं?’ इस गीत का संदेश यह है कि सभी मनुष्यों को मानवीय मूल्यों और प्रकृति के संरक्षण के लिए तत्पर रहना चाहिए। एक हरा-भरा पेड़, मानव समाज के नैतिक और स्वस्थ रहने का प्रतीक है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ तथा ‘Lifestyle for Environment’ यानी LiFE जैसे अभियानों की भावना के अनुरूप सभी को पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास करना चाहिए।

हमारे अनेक युवा स्वरोजगार के मार्ग पर चलते हुए रोजगार प्रदान करने की संस्कृति को अपना रहे हैं। युवा उद्यमियों की भागीदारी से हमारे देश में एक मजबूत start-up ecosystem विकसित हुआ है। विश्व के बड़े-बड़े उद्यम भारत के युवाओं की प्रतिभा और लगन से प्रभावित रहते हैं तथा उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं में नियुक्त करते हैं। ऐसे युवाओं ने विश्व समुदाय में भारत की युवा शक्ति की साख बढ़ाई है। हमारी युवा पीढ़ी भारत के स्वर्णिम भविष्य के प्रति मेरी आस्था को और प्रबल बनाती है।हमारे विद्यार्थी, भारत के भविष्य निर्माता हैं। जिस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार और समाज का एकजुट रहना जरूरी है, उसी तरह विद्यार्थियों के वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी सभी के सम्मिलित प्रयास जरूरी हैं। सार्वजनिक परीक्षाएं, विद्यार्थियों के लिए अवसरों के द्वार खोलती हैं। इसलिए, सरकार इन परीक्षाओं में सुधार के लिए व्यापक कदम उठा रही है। इन सुधारों का उद्देश्य है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर पूरी तरह से अंकुश लगे, परीक्षा प्रणाली और अधिक पारदर्शी, तथा युवाओं के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद हो।सरकार के प्रयासों तथा नई आर्थिक गतिविधियों से युवाओं के लिए अनेक प्रकार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। ऐसे अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त करके हमारे युवा सफलता के नए मार्ग चुन सकते हैं।हमारे युवाओं का शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य देश के भविष्य का आधार है। परिवार और समाज की भी जिम्मेदारी है कि हमारे युवा उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहें।

देश से प्रेम करो; भलाई को बढ़ाओ;देश का अर्थ केवल मिट्टी ही नहीं है।देश का अर्थ समस्त जनसमुदाय है।

मुझे विश्वास है कि समाज की भागीदारी और सरकार के प्रयासों से गांव-गांव में, नगर-नगर में, भारत के घर-घर में रहने वाले सभी लोग स्वस्थ, सुखी और समृद्ध बनेंगे।आइए, देश प्रेम की इसी सर्व समावेशी भावना के साथ हम सब स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय-साधना में स्वयं को समर्पित करें।


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