
समय-सीमा में निराकरण नहीं होने पर प्रतिदिन 500 रूपए की दर से अर्थदण्ड
कलेक्टर ने समय-सीमा की बैठक में लोक सेवा गारण्टी अधिनियम के तहत सिटीजन चार्टर में निर्धारित समय-सीमा में दी जाने वाली चिन्हित सेवाओं के आवेदनों का निराकरण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। कलेक्टर ने समय-सीमा में प्रकरणों के निराकरण नहीं होने पर प्रति दिन 500 रूपए की दर से अर्थदण्ड लगाया जाएगा। कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने विभिन्न विभागों द्वारा लोक सेवा गारण्टी अधिनियम के तहत दी जाने वाली सेवाओं की विभागवार समीक्षा की। कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने बैठक में विभिन्न विभागों के लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को समय पर न्यायालय में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर ने फार्मर रजिस्ट्री के कार्य को गति देने आंगनवाड़ी के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं को प्रति मंगलवार टीएचआर का वितरण करने के निर्देश दिए। इसी तरह हिट एण्ड रन के लंबित प्रकरणों का निराकरण कर प्रभावित परिवार को सहायता राशि देने के साथ ही राहवीर योजना के प्रकरणों का समय पर निराकरण के निर्देश दिए हैं।
स्वत: संज्ञान लेने के अधिकार का अधिक सक्रियता से इस्तेमाल करे एनजीटी : संसदीय समिति
नयी दिल्ली: 25 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से कहा है कि वह राजमार्गों के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई, अवैध रेत खनन और राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण जैसे गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लेने के अपने अधिकार का ज्यादा सक्रियता से इस्तेमाल करे।समिति ने अधिकरण और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा नियमित कार्रवाई रिपोर्ट के माध्यम से मामलों की मजबूत निगरानी, संयुक्त समितियों के प्रभावी इस्तेमाल, जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय करने और एनजीटी के आदेशों को समयबद्ध तरीके से लागू कराने के बेहतर उपाय करने की सिफारिश भी की है।
“पिकनिक” पर जा रहे गुरमीत ,फरलो पर सख्त, अकाल तख्त
राम रहीम को को 21 दिनों का फरलो दिए जाने पर अकाल तख्त और एसजीपीसी ने आलोचना की
चंडीगढ़: 25 अगस्त (भाषा) दुष्कर्म के दोषी ठहराये जा चुके डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर फरलो (जेल से निर्धारित अवधि के लिये अस्थायी रिहाई) दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए मंगलवार को अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में सजा काट रहे लोगों को इस तरीके से “बार-बार” निर्धारित अवधि के लिये रिहा किया जा रहा है, जैसे वे “पिकनिक” पर जा रहे हों।अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज ने कहा कि दूसरी तरफ सिख कैदी हैं, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है, लेकिन उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा रहा है।

