
शीर्ष अदालत ने कॉजपा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियां रद्द कीं
नयी दिल्ली:1 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उन सभी प्राथमिकियों को रद्द कर दिया, जो देश भर में 20 से 25 जुलाई के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई थीं। इसके बाद कॉजपा ने राष्ट्रीय राजधानी में पांच सितंबर को होने वाले अपने प्रस्तावित मार्च को रद्द कर दिया।भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के कारण अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए।केंद्रीय मंत्री नड्डा की यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय द्वारा 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में कॉजपा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी रद्द किए जाने के कुछ ही समय बाद आई। इसके बाद संगठन ने पांच सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में प्रस्तावित अपना मार्च रद्द कर दिया।
नेपाल ने विनाशकारी बाढ़ के लिए जलवायु मुआवजे की मांग की, इसे ‘नैतिक जिम्मेदारी’ बताया
काठमांडू: एक सितंबर (भाषा)नेपाल ने हाल ही में अचानक आई जानलेवा बाढ़ से हुई तबाही के लिए हरित गैस उत्सर्जक देशों से जलवायु-संबंधी मुआवजा पाने के लिए कूटनीतिक कोशिशें शुरू की हैं। नेपाल का कहना है कि आपदा के बाद दी जाने वाली मदद को “नैतिक जिम्मेदारी” माना जाना चाहिए, न कि “दान”।विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि हरित गैस उत्सर्जन में “लगभग न के बराबर” योगदान देने के बावजूद, नेपाल वैश्विक तापमान के बहुत ज्यादा बुरे नतीजों का सामना कर रहा है जिनमें तेजी से पिघलते ग्लेशियर और पहाड़ों पर होने वाली भयंकर आपदाएं शामिल हैं।
नेपाल की वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के मुद्दों को देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाए जाने का आह्वान किया है। स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी।नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के कारण करीब 1,000 लोगों की मौत हो गई और लगभग 4,000 लोग लापता हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन और चट्टानों के ढहने से आई इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया है।
नेपाल बाढ़: सुरंगों में फंसे मजदूरों जान बचाने की जद्दोजहद, सैकड़ों अब भी फंसे
बट्टार (नेपाल): एक सितंबर (भाषा) बाढ़ का पानी जैसे-जैसे नीचे की हर चीज को अपने आगोश में लेता जा रहा था, शिव गिरी और छह अन्य लोगों के पास अपनी जान बचाने के लिए ऊपर की ओर चढ़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। मेलुंग जलविद्युत परियोजना से ऊंचाई वाले इलाके की ओर भागते समय उन्होंने अपनी आंखों के सामने घरों, बस्तियों और कई ढांचों को बाढ़ में बहते देखा। जिंदगी बचाने की इस जद्दोजहद में वे लगातार पहाड़ी की ओर बढ़ते रहे।वेबसाइट ‘नेपाल न्यूज’ को गिरी ने बताया कि उनके कई साथी मजदूर और उनका चचेरा भाई भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। तिमुरे और धुन्चे कस्बों तक जाने वाले सामान्य रास्ते बंद हो जाने के बाद, इस समूह ने करीब 12 घंटे तक जंगल के रास्ते पैदल यात्रा की। इसके बाद उन्हें एक गुफा मिली, जहां उन्होंने रात बिताई।

