माफिया गिरी में जंगल कटते जा रहे हैं…

Share

  • लंबे अरसे से सक्रिय वन माफिया पर नहीं किसी का जोर

    धनपुरी
  • सोहागपुर कोयलांचल अंतर्गत बंगवार, बेम्हौरी का जंगल पेड़ों के कब्रिस्तान का रूप लेता जा रहा है, यदि यही आलम रहा तो वह दिन दूर नहीं जब बेम्हौरी के बियाबान जंगल में कब्रिस्तान की भांति पेड़ों के ठूंठ ही ठूंठ नजर आएंगे और कब्रिस्तानों में जगह-जगह बने चबूतरे का एहसास कराएंगे। एक लंबे अरसे से सक्रिय लकड़ी और वन माफिया के साथ विभागीय मैदानी अमले की कथित सांठगांठ ने लकड़ी के अवैध कारोबार एवं पेड़ों के कत्लेआम को एक मामूली घटना मात्र बनाकर रख दिया है जिसके परिणाम निकट भविष्य में भयावह हो सकते हैं।
    बीट गार्ड की लापरवाही
    बुढार वन परिक्षेत्र अंतर्गत बम्हौरी व धनपुरी बीट गार्ड की लापरवाही के चलते आए दिन लकड़ी माफिया से जुड़े लोग जिन्हें देखने वाला कोई नहीं है, पेड़ को काटकर गिरा देते हैं और जमीन में बचे लकड़ी के ठूंठे पर आग लगा देते हैं। इस तरह से बंगवार के जंगल में लकड़ी माफियाओं के द्वारा सरेआम मनमानी कर लकड़ियां नगर के आसपास गलाया जा रहा है। अवैध कटाई काफी दिनों से चल रही है बीट गार्ड जान कर भी अंजान बना हुआ है जिससे बेशकीमती सरई पेड़ों का जंगल धीरे-धीरे ठूठे में तब्दील होता जा रहा है
    लुप्त हो रहा घनत्व
    प्राप्त जानकारी के अनुसार आज से 15- 20 वर्ष पूर्व बंगवार का जंगल पेड़ों की अधिकता के कारण इतना घना था कि आगे की ओर दिखाई नहीं देता था, अब ऐसा हो गया है कि चहुंचोर कहीं भी देखा जा सकता है। लकड़ी माफिया द्वारा अगर इसी तरह से जंगल से हरे भरे पेड़ों की कटाई जारी रही तो लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र में फैला जंगल आने वाले दिनो मे वीरान दिखने लगेगा। बड़ी तेजी के साथ लुप्त होते जंगल में पेड़ों के घनत्व को लेकर स्थानीय जनमानस बुरी तरह से चिंतित है और वन विभाग की ओर टकटकी लगाए बैठा है कि शायद कभी तो विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों के कानों तक यह बात पहुंचेगी और जंगल की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
    कागजों में हो रहा संरक्षण
    सरकार एक तरफ जल, जलवायु और जंगल को बचाने के नाम पर लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, आए दिन अखबारों में पटा रहता है कि पेड़ लगाओ जल, जंगल, जलवायु बचाओ वहीं दूसरी तरफ वन माफिया और उससे जुड़े लोग हरे भरे वृक्षों का कत्लेआम कर ईंधन के रूप में या आरा मशीनों, मिलो में बेचकर जंगल मुनाफा कमा रहे हैं। कोयलांचल प्रबंधन द्वारा खदानों से कोयला उत्खनन किए जाने के बाद खुली खदानों के स्थान पर मिट्टी की भरपाई कर वहां जंगल विकसित किए जाने का प्रावधान शासन द्वारा किया गया है, बावजूद इसके न तो एसईसीएल प्रबंधन इस दिशा में कोई पहल करता और न ही वन विकास निगम, भूमि संरक्षण विभाग अथवा वन विभाग द्वारा जंगलों के संरक्षण संवर्धन की दिशा में कोई कार्यवाही की जा रही है। हालांकि शासन से आने वाले लाखों करोड़ों रुपए हर साल खर्च होते हैं लेकिन वह कागजों तक ही सीमित है मैदानी स्तर पर कहीं भी किसी जंगल के संरक्षण संवर्धन का कार्य देखने को नहीं मिलता है।
    चौकी है, चौकीदार नहीं…
    बंगवार जंगल की सुरक्षा के लिए वर्षो पूर्व वार्ड नंबर 21 स्थल पर ही वन चौकी बनाया गया है लेकिन अभी तक कोई भी बीट गाड व चौकीदार की नियुक्ति लगता नहीं की गई है। इसलिए जंगल चौकी प्राय: बंद देखी जाती है, जिसके चलते वन माफिया के लोगों के साथ ही क्षेत्रीय ग्रामीण भी बड़े पैमाने पर जंगल के हरे पेड़ों को काटकर लकड़ी का कारोबार करने में जुटे हुए हैं। इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारी कर्मचारियों का ध्यान भी आकृष्ट कराया गया लेकिन किसी ठोस कार्य वाही के अभाव में अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद है।
    मशीनों से कट रहे पेड….
    ठंड के दिनों में जलाऊ लकड़ी बिनने के साथ लकड़ी माफिया सूखी लंबी चौड़ी पेड़ मशीन से काटकर गिरा दिया जाता है फिर उस पेड के क‌ई टुकड़े काट कर ले जाते हैंबताया कि बंगवार, वेम्हौरी , वंडी के जंगल में एक लंबे समय से लकडी माफिया सक्रिय है जहां पर अक्सर वनों की अवैध कटाई होने के कारण कभी यह जंगल हरे-भरे घने नजर आते थे। आज इन जंगलों में सिर्फ टूटे ही टूटा नजर आते हैं लेकिन यहां पर तो सिर्फ जिस तरह से वनों की अवैध कटाई की जा रही है इससे तो ऐसा लगता है कि जैसे इन्हें खुली छूट मिली हो वन विभाग को चाहिए कि इस ओर ध्यान दें और वनों की जिस तरह से अवैध कटाई की जा रही है उस पर कार्यवाही कर वनों की सुरक्षा की जाए अन्यथा सरकार की फलदार वृक्ष लगाने की योजना को पतीला लग जाएगा।
  •  

Share

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

राशिफल

- Advertisement -spot_img

Latest Articles