
शहडोल
लोग धोखाधड़ी के शिकार हो गए 
क्षेत्र में किस प्रकार से आदिवासी वर्ग के लोगों की जमीनों पर हेराफेरी करके मनमानी तरीके से गैर आदिवासी वर्ग के लोगों को बिक्री करके करोड़ों रुपए की हेराफेरी की जा रही है इसका तरोताजा उदाहरण बुढार रोड स्थित कटकोना ग्राम के राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी भूमि के संबंध में समाजसेवी नरेंद्र सिंह गहरवार के आवेदन पर की गई शिकायत में उजागर हुआ है| अब कई लोगों की जमीन है जिन्हें दलालों ने हेराफेरी करके गैर आदिवासी वर्ग को बेच थी और करोड़ों रुपयों की कमाई की थी ऐसे भूमि धारकों को चूना लग गया है|क्योंकि अनुविभागीय अधिकारी ने सभी भूमि धारकों की जमीनों को पुन आदिवासी वर्ग के नाम से लिखे जाने का आदेश पारित कर दिया है.
इसी तरह अन्य कई भूमियों में लोगों ने करोड़ों अरबों रुपए कमा कर न सिर्फ आदिवासी वर्ग के साथ धोखाधड़ी किए हैं बल्कि आम आदमियों को भी धोखे से जमीन बेचकर उन्हें लूट लिया गया है .शहडोल में खसरा नंबर 51, 52, 53 में भी इसी प्रकार से सेंट्रल बैंक की खरीदी के नीलामी के नाम पर कई गैर आदिवासी वर्ग, आदिवासियों की जमीन को अफसरों से मिलकर अपने नाम करा लिया और कई गैर आदिवासी वर्ग को बेच दिया है. जिससे आदिवासी समाज के लोग धोखाधड़ी के शिकार हो गए हैं.किंतु ना तो राजस्व विभाग का अमला और ना ही पुलिस विभाग ऐसे आदिवासियों की मदद कर रहा है बल्कि कॉलोनाइजर्स से मिलकर शिकायतों को दबाने का काम किया है. जिससे आदिवासी वर्ग आज भी अपने हक के लिए भटक रहा है. अगर उजागर होगा तो वही हालात यहां पर दिखाई देंगे जोकि कटकोना ग्राम में पारित आदेश में दिख रहे हैं .
तो देखते हैं अधिकारी द्वारा किस प्रकार के आदेश पारित किए गए हैं
प्रकरण क्रमांक 1/अ-23/2015-2016 बेला पति मोलई बैगा निवासी कटकोना बनाम सन्तोष कुमार टुण्डेलाल जैन निवासी बुढार के वगैरह में आदेश पारित दिनांक 18.01, 2023 के अनुसार नरेन्द्र सिंह गहरवार निवासी बुढार के शिकायत के तारतम्य में तहसीलदार बुढार के प्रतिवेदन क्रमांक 10 दिनांक 3.1.2015 के अनुसार ग्राम कटकोना की भूमि खसरा नम्बर 763 रकवा 0.34 एकड, खसरा नम्बर 781 रकवा 2.25 एकड, खसरा क्रमांक 782 रकवा 0.60 एकड एवं खसरा नम्बर 783 रकवा 0.25 एकड के भूमिस्वामी मोलई पिता गज्जी बैगा निवासी कटकोना थे,
उक्त आराजी को इपिता जैन पति दर्शन कुमार जैन व्दारा अपने जबाव में बताया है, कि मेरे द्वारा ग्राम कटकोना की आराजी खसरा नम्बर 763, 781, 782 एवं 783 की भूमि विक्रेता सन्तोष कुमार जैन पिता दुण्डेलाल जन निवासी बुडार से क्रय किया गया था। सन्तोष कुमार जैन जिससे मैंने भूमि क्रय की थी यह भूमि स्वामी गैर आवियासी रहा है, और इस वजह से उपरोक्त भूमियों का क्रय मेरे व्दारा किया गया था। मैंने किसी भी आदिवासी की भूमि का न तो क्रय किया है, और न ही उपरोक्त भूमियों के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। न ही उपरोक्त भूमि किसी आदिवासी की रही है। मेरे व्दारा जो भूमियां क्रय की गई थी, यह सद्भावना पूर्वक क्रय की गई थी और विक्रेता सन्तोष कुमार जैन को प्रतिफल की सम्पूर्ण राशि अदा की गई थी। इस प्रकार से मेरे ध्वारा सीधे तौर से किसी भी आदिवासी की भूमि का क्रय नहीं किया गया है।
इप्सिता जैन पति दर्शन कुमार जैन व्दारा अपने जबाव में बताया है, कि मेरे द्वारा ग्राम आराजी खसरा नम्बर 763, 781, 782 एवं 783 की भूमि विक्रेता सन्तोष कुमार जैन पिता काटकोना की टुण्डलाल जैन निवासी बुढार से क्रय किया गया था। सन्तोष कुमार जैन जिससे मैने भूमि क्रय की थी यह भूमि स्वामी गैर आदिवासी रहा है, और इस वजह से उपरोक्त भूमियों का क्रय मेरे द्वारा किया गया था। मैंने किसी भी आदिवासी की भूमि का न तो क्रय किया हूँ, और न ही उपरोक्त भूमियों के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। न ही उपरोक्त भूमि किसी आदिवासी की रही है। मेरे व्दारा जो भूमियां क्रय की गई थी, यह सद्भावना पूर्वक क्रय की गई थी और विक्रेता सन्तोष कुमार जैन को प्रतिफल की सम्पूर्ण राशि अदा की गई थी। इस प्रकार से मेरे व्दारा सीधे तौर से किसी भी आदिवासी की भूमि का क्रय नही किया गया है। मेरे व्दारा सन्तोष कुमार जैन से उपरोक्त भूमियों को विधिवत क्रय कर के विधिवत नामान्तरण कराकर काबिज दखिल रहा हॅू। अस्तु प्रकरण 170(ख) म.प्र.भू.रा.संहिता 1959 के अन्तर्गत आवेदन का जबाव प्रस्तुत कर रहा हूँ।
नारेन्द्र सिंह गहरवार पिता स्व. दुर्गा सिंह गहरवार निवासी बुढार वार्ड नम्बर 04 शहडोल व्दारा दिनांक 17.10.2020 को एक आवेदन पत्र पेश किया कि ग्राम कटकोना जनरल नम्बर 70 पटवारी हल्का कटकोना राजस्व निरीक्षक मण्डल व तहसील बुढार स्थित आराजी खसरा नम्बर 763 रकवा 0.34/0.138, 781 रकवा 2.25/0.911, 782 रकवा 0.60/0.243, 737 रकवा 0.32/0.129, 783 रकवा 0.25/0101 हे. नोलई पिता गज्जी भरिया/ बैगा निवासी कटकोना की सन् 1958-59 के पहले से रही, सन् 1958-59 मे 2-3 साल रामलाल ब्राम्हण ने इस पर अधिया मे खेती किया था, नामान्तरण क्रमांक 49 दिनांक 13.2.1994 से उसके वारिसान परवतिया चेवा मोलई, व प्रेमलाल व बेसना पिता मोलई के नाम आयी। कालान्तर मे यह गैर आदिवासी फर्जी लोगों के नाम राजस्य अभिलेखो मे गलत ढंग से लिख दी गई। प्रार्थी ने 18.12.2008, 04.04.2009, 15.01.2014, 20.08.2014, 26.12.2014 आदि कई आवेदन दिया तब यह प्रकरण चलने लगा। दिनांक 16.10.2020 को प्रार्थी ने प्रश्नगत भूमियों के खसरे की नकल लिया तो पता चला कि निम्नानुसार लोगों के नाम प्रश्नगत भूमियां गलत ढंग से दर्ज कर दी गई है, साथ ही अवैध प्लाटिंग करके इन लोगों को जमीन बेच, जिनमे मकान बन रहे है अंकुश गुप्ता पिता सुरेश प्रसाद गुप्ता निवासी उमरिया शिवनाथ गुप्ता पिता रामप्रताप गुप्ता ग्राम देवराज नगर रामनगर सतना | सुरेश चन्द जायसवाल पिता मकखनलाल जायसवाल | निवासी वार्ड क्रमांक 8 धनपुरी बुढार जिला शहडोल ओम बहादुर सिंह पिता वंशबहादुर सिंह निवासी वार्ड नम्बर 11 बुढार हीरालाल सोनी पिता स्व. बैजनाथ सोनी पता वार्डनम्बर 3 बंगवार कालोनी बेम्हौरी बुढार | दुर्गा प्रसाद गुप्ता पिता चन्द्र प्रकाश गुप्ता निवासी वार्ड नम्बर बुढार अजय कुमार पिता विजय कुमार पाण्डेय निवासी कटकोना पता बुढार शहडोल 1/2 भाग मो, कलीम कुरैश पिता हाजी अब्दुल वहीद पता बुढारशहडोल 1/2 भाग भूपेन्द्र यादव पिता उदितनारायण यादव निवासी वार्ड | नमबर (02. चुढार शरीफ अहमद पिता खलील अहमद निवासी वार्ड नम्बर 12 बुढार शहडोल | नर्बदा प्रसाद पटेल पिता मूरी प्रसाद पटेल निवासी धनपुरी वार्ड नम्बर 5 शहडोल लाल जी साहू पिता प्रयाग साहू नियासी वार्ड नम्बर 03 बंगवार कालोनी बेम्हौरी बुढार श्रीमती देवकी विश्वकर्मा पति अजय विश्वकर्मा पता रामपुर | संजय सिंह पिता इन्द्रबहादुर सिंह पता निवासी पीटीएस चौक रीवा | भारत सरकार सन् 1958-50 मे 2-3 साल रामलाल ब्राम्हण ने इस पर अधिया में खेती किया था, नामान्तरण क्रमांक 49 दिनांक 13.2,1094 से उसके वारिसान परवतिया बेवा मोलई, व प्रेमलाल व बेसना पिता मोलई के नाम आयी।
कालान्तर मे यह गैर आदिवासी फर्जी लोगों के नाम राजस्व अभिलेखो मे गलत ढंग से लिख दी गई।उपरोक्त आधार पर प्रकरण में धारा 170 ख आकर्षित होने से आवेदिका का आवेदन पत्र स्वीकार किया जाता है, अनावेदकगणों द्वारा किये गये अनाधिकृत अन्तरण कपटपूर्ण होने से शून्य किया जाकर तहसीलदार बुढार को आदेशित किया जाता है, कि अनावेदकगणों आवेदिका की आराजी का कब्जा वापसदिलाकर पालन प्रतिवेदन 15 दिवस के अन्दर प्रस्तुत करें।

