
नई दिल्ली
10 फरवरी।सुप्रीम कोर्ट ने अडाणी-हिंडनबर्ग मामले के मद्देनजर भारतीय निवेशकों के हितों को लेकर शुक्रवार को चिंता जताई। साथ ही नियामक तंत्र में सुधार संबंधी सुझावों पर केंद्र सरकार और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की राय मांगी
और उनसे अपना पक्ष रखने को कहा। प्रधान न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पीठ ने नियामक ढांचे को मजबूत करने पर सुझाव देने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन का भी प्रस्ताव दिया। मामले की सुनवाई अब सोमवार को होगी। पीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जिनमें अमेरिका स्थित ‘शार्टसेलिंग फर्म’ हिंडनबर्ग रिसर्च
की रिपोर्ट के बारे में जांच की मांग की गई है। रिपोर्ट ने अडाणी समूह की कंपनियों के शेयर की कीमतों को प्रभावित करके शेयर बाजार में हलचल मचा दी थी। मामला संज्ञान में आते ही न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने पीठ में अन्य न्यायाधीशों न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला के साथ करीब पांच मिनट तक चर्चा की। चर्चा के बाद उन्होंने सेबी की तरफ से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यह सिर्फ एक खुला संवाद है। वे अदालत के सामने
एक मुद्दा लाए हैं। चिंता का विषय यह है कि हम भारतीय निवेशकों के हित कैसे सुनिश्चित करेंगे ?
यहां जोजगह नहीं है जहां केवल उच्च मूल्य वाले निवेशक ही निवेश करते हों, यह एक ऐसी जगह भी है जहां बदलती कर व्यवस्था के साथ, मध्यमवर्ग का एक व्यापक तबका निवेश करता है तुषार मेहता ने इस पर जवाब दिया कि जो भी वैधानिक नियम मौजूद हैं, सेबी उन्हें देख रहा है। हम आपको संतुष्ट करने में सक्षम होंगे। सुनिश्चित करें कि ये सुरक्षित है? हम यह कैसेसुनिश्चित करें ये भविष्य में नहीं हो ? हन सेवी के लिए किस भूमिका की परिकल्पना कर रहे हैं? मेहता ने कहा- मेरे लिए तुरंत जवाब देना थोड़ा जल्दबाजी होगी ‘ट्रिगर’ बिंदु (हिंडनबर्ग) रिपोर्ट थी। जो हमारे क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर थी। ऐसे नियम हैं जो चिंताओं से निपटते हैं। हम भी चिंतित हैं। सेबी भी स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है।
इसके बाद न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने एक समिति गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि एक सुझाव समिति बनाने का है ताकि कुछ इनपुट प्राप्त किए जा सके। सरकार इस बात पर विचार कर सकती है कि क्या कानून में कुछ संशोधन की आवश्यकता है। क्या नियामक ढांचे लिए संशोधन की आवश्यकता है। एक निश्चित चरण के बाद हम नीति के क्षेत्र में प्रवेश
नहीं करेंगे, लेकिन एक तंत्र होना चाहिए ताकि यह भविष्य में न हो। पीठ ने कहा कि यह ऐसा मुद्दा है जिसे सरकार को देखना है। हमें एक तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है जो यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा। आप सोमवार को आएं और छूताएं कि मौजूदा व्यवस्था को कैसे मजबूत कि जाए और क्या इससे प्रक्रिया में मदद मिलेगी ?
क्या हम एक विशेषज्ञ समिति बनाने पर विचार कर सकते हैं, जिसे प्रतिभूति बाजार, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों और विवेकशील मार्गदर्शक व्यक्ति के रूप में एक पूर्वन्यायाधीश से लिया जा सकता है। अंततःइनपुट’ डोमेन विशेषज्ञों से लेना होगा। हमें भी यकीन नहीं हो रहा है। हम सिर्फ ध्यान से सोच हैं। हम सेबी को भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका दे सकते हैं। हमें सेबी को मजबूत करने के बारे में भी सोचने की जरूरत है ताकि भविष्य में इससे निपटने के लिए बेहतर प्रावधान हों।
यह एक नई दुनिया है। भारत वह नहीं है जो 1990 के दशक में था। साथ ही शेयर बाजार एक ऐसी न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा-आप वित्त मंत्रालय के विशेषज्ञों के साथ भी परामर्श कर सकते हैं। हमें एक ढांचा दें। ये सिर्फ गहरी सोच है। हम सचेत हैं कि हम जो कुछ भी कहते हैं वह शेयर बाजार को भी प्रभावित कर सकता है। यह भावनाओं पर चलता है। इसलिए हम इससे सतर्क हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमारे हर शब्द का असर होता है. हम किसी संस्था पर सवाल नहीं उठा रहे। पीठ ने वकीलों विशाल तिवारी और एमएल शर्मा की तरफ से दायर दो अलग- अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह कदम उठाया।
आपके अधिकारियोंको भी बताना चाहिए। यह कोई जादू-टोना नहीं है जो हम करने की योजना बना रहे हैं। न्यायमूर्ति
चंद्रचूड़ बोले-मान लीजिए कि ‘शार्ट-सेल’ के परिणामस्वरूप शंतों का मूल्य गिर सकता है। खदार को अंतर का लाभ मिलता है। यदि यह छोटे पैमाने पर हो रहा है कोईपरवाह नहीं करता। लेकिन अगर यह यड़े पैमाने पर होता है तो कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय निवेशकों को होने वाला कुल नुकसान कई स्यार का होता है। हम कैसे भविष्य में हमारे पास मजबूत आज पूंजी भारत से बाहर जा रही है। हम भविष्य में कैसे सुनिश्चित करे कि भारतीय निवेशक सुरक्षित रहे? बाजार
में अभी हर कोई है। कहा जाता है कि नुकसान दस लाख करोड़ से अधिक का है। हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि
तंत्र हो ? ( SABHARजनसत्ता )

