
सभी कलेक्टरों से जवाब मांगा ..
रीवा
जिले के तालाबों से अतिक्रमण हटाए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 से लेकर अब तक के कलेक्टरों को दोषी माना है। न्यायालय की अवमानना के लिए दोषी मानते हुए इस अवधि में पदस्थ रहे सभी कलेक्टरों से चार सप्ताह के अंदरजवाब मांगा है। गौरतलब है कि वर्ष 2012 में श्यामानंदन मिश्रा की ओर से अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।
इस याचिका की सुनवाई के दौरान वर्ष 2014 में यह बात सामने आई कि जिले के 231 तालाबों पर अतिक्रमण हैं। न्यायालय द्वारा इन सभी तालाबों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए, लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी प्रशासन अतिक्रमण नहीं हटा पाया है, जिस पर न्यायालय ने नाराजगी जताई है। न्यायालय ने 2014 से
लेकर अब तक के कलेक्टर को नोटिस देते हुए जवाब देने को कहा है। प्रशासन ने यह दिया जवाब सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से यह जवाब दिया गया कि जिले में 210 अब ऐसे तालाब हैं, जिन पर अतिक्रमण तो है,
इस अवधि में पदस्थ रहे कलेक्टर एसएन रूपला राहुल जैन प्रीति मैथिल नायक ओम प्रकाश श्रीवास्तव बसंत कुर्रे डॉ. इलैयाराजा टी मनोज पुष्प
फाइल फोटो
लगातार लेकिन निस्तार में बाधा नहीं है। वहीं 134 तालाबों से अतिक्रमण हटाया गया है। शेष तालाबों की संख्या 76 है। इस तरह के जवाब पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने कहा कि प्रशासन गोल-मोल बात कर रहा है। सभी तालाबों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश हैं लेकिन इसका पालन अभी तक नहीं किया गया।
तराई अंचल के सर्वाधिक तालाब अतिक्रमित सरकारी आंकड़ों की मानें तो तराई अंचल में सबसे ज्यादा तालाब अतिक्रमित हैं। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार त्योंथर में 86 और जवा में 27 ऐसे तालाब हैं जहां अतिक्रमण है, लेकिन निस्तार प्रभावित नहीं है। जवा में 19 और त्योंथर में 14 अतिक्रमित तालाबों को शेष की सूची में रखा गया है। तालाबों से अतिक्रमण हटाने के मामले में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि 2014 से अभी तक के सभी कलेक्टर न्यायालय की अवमानना के दोषी हैं। सभी कलेक्टरों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताहमें जवाब देने को कहा गया है। (SABHARभास्कर)
गौरतलब है शहडोल संभागीय में भी मुख्यालय में सैकड़ों की संख्या में तालाब रहे किंतु धीरे-धीरे प्रशासनिक लापरवाही से सभी तालाब नष्ट होते जा रहे हैं या फिर भूमाफिया की भेंट चढ़ रहे हैं| जेल बिल्डिंग के पास वाले तालाब में अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है, नगर पालिका परिषद इनको ही तालाब के अंदर प्रधानमंत्री आवास बनाकर दे रही है| इसी तरह अन्य तालाबों में भी प्रधानमंत्री आवास बनाए गए हैं| इस तरह नगर पालिका प्रशासन और शहडोल प्रशासन तालाबों को नष्ट करने में अपनी भूमिका अदा कर रहा है |बहरहाल हाईकोर्ट के आदेश से संभावना बनी है कि जिले के तमाम कलेक्टर अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सतर्क होंगे ऐसी गलतफहमी पालनी चाहिए|

