
न्यूयॉर्क:संविधान की पांचवी अनुसूची में संरक्षित विशेष आदिवासी क्षेत्र शहडोल की जागरूकता के लिए अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में जिम्मेदार मेयर के द्वारा आपातकाल की घोषणा के मायने नेताओं को समझना चाहिए यह अलग बात है कि आपातकाल के मायने समझने की पात्रता क्या शहडोल के नेताओं ने अपने में समेट रखी है अथवा नहीं खुशी की बात है कि पहली बार शहडोल नगर पालिका के अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने सीवर लाइन की मनमानी परपर रोक लगाने का काम किया है, क्योंकि गुजरात इंडिया कंपनी (ईस्ट इंडिया कंपनी नहीं )की ओर से संचालित ऐसी कंपनियां शहडोल क्षेत्र में अराजकता का आलम बनाए हुए हैं.. अगर नेता जागरूक हो रहे हैं तो इसकी तारीफ होनी चाहिए और न्यूयॉर्क के आपातकाल को समझने में हमें मदद मिलेगी,इस पर आगे चर्चा करते रहेंगे….
न्यूयॉर्क शहर के मेयर एरिक एडम्स ने शहर में शरण चाहने वालों की रिकॉर्ड तोड़ आमद के जवाब में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी। शहर में सभी संबंधित एजेंसियों को शरण चाहने वाले मानवीय संकट का जवाब देने और अस्थायी आधार पर मानवीय राहत केंद्रों के निर्माण के लिए अपने प्रयासों का समन्वय करने के लिए औपचारिक रूप से निर्देश देने के लिए शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश जारी किया गया था। आपातकाल की स्थिति 30 दिनों के लिए प्रभावी रहेगी और कार्यकारी आदेश के अनुसार इसे बढ़ाया जा सकता है।
एक लाख से अधिक लोग अगले साल चाहेंगे शरण
एडम्स के अनुसार, न्यूयॉर्क शहर में आश्रय प्रणाली अब 61,000 से अधिक लोगों को समायोजित करने वाली 100-प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही है और शहर में अगले वर्ष 1,00,000 से अधिक शरण चाहने वाले होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘यह उस प्रणाली से कहीं अधिक है जिसे संभालने के लिए डिजाइन किया गया था। यह अस्थिर है। शहर अन्य प्राथमिकताओं के लिए धन से बाहर निकलने जा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि 17,000 से अधिक शरण चाहने वाले, जिनमें से ज्यादातर दक्षिण अमेरिका से हैं, उन्हें अप्रैल के बाद से दक्षिणी सीमा से सीधे न्यूयॉर्क शहर ले जाया गया है।
राजनीतिक प्रेरणा को ठहराया जिम्मेदार
एडम्स ने कहा कि न्यूयॉर्क सिटी 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस वित्तीय वर्ष के अंत तक प्रवासी संकट पर कम से कम 1 अरब डॉलर खर्च करने की उम्मीद करता है। उन्होंने मानव निर्मित मानवीय संकट के लिए राजनीतिक प्रेरणा और समन्वय की कमी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हमारे शहर में बसों को भेजने वाले किसी भी राज्य से समन्वय या यहां तक कि सिर्फ सहयोग होता है, या हमारे सहयोगियों से अधिक समर्थन होता है, तो शायद हम इन शरण चाहने वालों के लिए बजट, स्टाफ और आवंटित संसाधन कर सकते थे।’’ (sabhar NBT)

