
नई दिल्ली, 10 अप्रैल।
गुजरात न्यायपालिका द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री दिखाए जाने संबंधी याचिका पर दंडित किए जाने के बाद डिग्री-डिग्री का खेल राजनीति का गरमा-गरम अवसर बन गया है. क्योंकि दिल्ली के ही उपराज्यपाल सक्सेना ने इशारे ही इशारे में केजरीवाल की डिग्री पर कटाक्ष करते हुए कहा आईआईटी की डिग्री होल्डर भी अशिक्षित हो सकते हैं… दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने डिग्री दिखाओ अभियान के तहत अपनी-अपनी डिग्री दिखाने लगे हैं. बहरहाल डिग्री-डिग्री खेल के बीच में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में सुचिता पूर्ण वातावरण को दृष्टिकोण में रखकर वकीलों की डिग्री के सत्यापन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है...
समाचार पत्रों की माने तो सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वकीलों के डिग्री सर्टिफिकेट के सत्यापन की प्रक्रिया की देखरेख के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन कर दिया। समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज और हाईकोर्ट के दो पूर्व जज शामिल होंगे। वरिष्ठ वकीलों राकेश द्विवेदी और मनिंदर सिंह को भी समिति के सदस्य के रूप में नामित किया गया है। बार काउंसिल आफ इंडिया समिति में तीन सदस्य को नामित करने के लिए स्वतंत्र होगी।
प्रधान न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने वकीलों के सत्यापन की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। समिति को पीठ ने जोर देकर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच उन लोगों को नहीं दी जा सकती हैजो वकील होने का दावा करते हैं लेकिन उनके पास वास्तविक शैक्षणिक योग्यता या डिग्री नहीं है। डिग्री प्रमाणपत्रों के सत्यापन में विश्वविद्यालयों द्वारा मांगे गए शुल्कों के कारण सत्यापन प्रक्रिया में आने वाली कठिनाई को ध्यान में रखते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि सभी विश्वविद्यालयों और परीक्षा बोडों को बिना शुल्क लिए डिग्री की सत्यता की पुष्टि करनी चाहिए। सभी विश्वविद्यालय और परीक्षा बोर्ड शुल्क लिए बिना डिग्रियों की सत्यता की पुष्टि करेंगे और राज्य बार काउंसिल द्वारा मांग पर बिना किसी देरी के कार्रवाई की जाएगी।
वकीलों की डिग्री के सत्यापन की प्रक्रिया की देखरेख के लिए बनाई उच्चाधिकार समिति काउंसिल के सदस्य बन गए हैं और ऐसे व्यक्तियों ने न्यायिक अधिकारियों के पदों पर भी काम किया हो सकता है। सुविधाजनक तिथि पर काम शुरू करने और 31 अगस्त तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है। पीठ ने कहा-राज्य बार काउंसिल में पंजीकृत वकीलों का उचित सत्यापन न्याय प्रशासन की सत्यनिष्टा की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करना देश के प्रत्येक सच्चे वकील का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करने के प्रयास में बार काउंसिल आफ इंडिया के साथ सहयोग करें कि प्रैक्टिस सर्टिफिकेट अंतर्निहित शिक्षा प्रमाणपत्र के साथ विधिवत सत्यापित हों। जब तक कि यह व्यवस्था समय-समय पर नहीं की जाती है, इस बात का बड़ा खतरा है कि न्याय का प्रशासन स्वयं एक गंभीर संकट में होगा।
सुखद खबर है कि लोकतंत्र का एक स्तंभ न्यायपालिका की इस कार्यवाही से फर्जी डिग्री धारी वकीलों की चटनी हो जाएगी खबर है शहडोल में भी कुछ वकील बिना कॉलेज के गए छत्तीसगढ़ के डिग्री बेचने वाली संस्थाओं से ला की डिग्री लेकर वकालत कर रहे हैं और वकील कम दलाल ज्यादा लगते हैं… इससे समाज में प्रदूषण के साथ अपराधिक मानसिकता के व्यक्तियों का मनोबल बढ़ता चला जा रहा है.. देखना होगा सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से कितने फर्जी धारी डिग्री के वकील का कचरा न्यायपालिका साफ कर पाती है…?

