
अमृतकाल में नए संसद भवन के लोकसभा के आसन पास राजतंत्र का राज दंड बैठा। जिसे सिंगोल कहा गया परंपराओं मे गई इस छड़ी के शीर्ष पर बैल ने यानी धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यता का नंदी अब लोकसभा का आइकॉन यानी आदर्श बनकर अपने तरीके से देश चलाने का काम करेगा । आज नए संसद,भवन जो करीब आठ सौ करोड़ रुपए की लागत पर बना है ।उसका लोकार्पण राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपती मुर्मू की बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया । हला कि इसकी आलोचना और विरोध के परिणाम स्वरुप करीब 20 विपक्षी पार्टी ने इस समारोह का बहिष्कार कर दिया ।
_______________________त्रिलोकीनाथ________________________
आज ही करीब 1 माह से ज्यादा समय से जंतर मंतर में बैठी देश की गोल्ड मेडल महिला और पुरुष पहलवान इसी संसद भवन के सामने पंचायत लगाने का काम करेंगे इस प्रतिबंधित करने के लिए लगभग सरकार ने व्यवस्था कर रखा है । महिला पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया पिछली माह से इस बात के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं कि भारती कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे योन प्रताड़ना और नाबालिक के साथ योन प्रताड़ना के तहत के आरोपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी की कारवाई की जाए व निष्पक्ष जांच कराई जाए। आरोप है कि बृजभूषण शरण सिंह महिला खिलाड़ियों का यौन शोषण करते थे किंतु भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी की सरकार देश की दुनिया में भारत का नाम ऊंचा करने वाली इन महिला पहलवानों को देखना भी नहीं चाहते।
सिंगोल पर बैठा नंदी के अंदाज में बृजभूषण शरण सिंह भारतीय जनता पार्टी शासन स्तंभ का आइकॉन बन गया है। और दम ठोक कर कह चुका है जब तक मोदी , शाह और चट्ठा नहीं चाहेंगे बह इस्तीफा नहीं देंगे और लगातार गंभीर मुकदमे का आरोपी मीडिया पर अपने अंदाज में बयान बाजी करता चला आ रहा है । जो उसके कॉन्फिडेंस लेबल को प्रदर्शित करता है।
इस तरह आज के दिन वीर सावरकर जिन पर आरोप था कि आजादी की पहले अंग्रेजों के लिए मुखबरी करते थे उसके जन्मदिन पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने मालाअर्पण भी किया गया है।
यही 21वीं सदी के नए भारत की पहचान बनती जा रही है अच्छी तरह से याद है कि गुजरात जो नरेंद्र मोदी का ग्रह राज्य है वहां चुनाव होने थे और मध्य प्रदेश की शहडोल जिले में लालपुर पर राष्ट्रपति जो कि आदिवासी समुदाय से हैं पांचवी अनुसूची के पेसा एक्ट दूसरी बार लागू करने औपचारिकता पूरी की। पहली बार स्वयं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पेसा एक्ट लागू करने का काम करीब साल भर पहले इंदौर में किया था।
इस तरह भारत की शीर्ष पद बैठी महामाहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपती मुर्मू जी का का अधिकार छीन कर प्रधानमंत्री ने लोकार्पण कर नए संसद भवन का उद्घाटन कर दिया। हो सकता है भारत की प्रमुख 20 विपक्षी पार्टी को यह नागवार गुजरा है और इसलिए उन्होंने महाहिम राष्ट्रपति के सम्मान का मुद्दा बना कर भवन लोकार्पण समारोह से किनारा काट लिया। यह इतिहास में नये तरीके की आपात-हालात अघोषित घोषणा भी है। जहां विपक्षी पार्टी को न सुनने य सुनकर और उनके समर्थन में राष्ट्रपति के अधिकारों के समान को भी अनदेखा कर संसद भवन का अनैतिक तरीके से लोकार्पण नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। यही तरीका तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू करते वक्त सभी विपक्षी पार्टियों के तमाम अधिकार समाप्त करने के साथ नागरिक अधिकार पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। वर्तमान में यह प्रतिबंध सिर्फ विपक्षी या उनसे असहमत पार्टी के साथ व्यवहार किया गया है। साथ ही महामहिम राष्ट्रपति के अधिकारों को भी चुनौती दे दी गई है…? और इसी चुनौती को विपक्षी पार्टी प्रसार/जागरूकता करने वाली है ।
राजनीति बहुत ठंडे तरीके से उबालें ले रही है। लोकतंत्र का यह चेहरा “गाय हमारी माता है, बैल हमारा बाप…. इस आदर्श पर चलने के अंदाज पाल चल पड़ा है.. और नहीं मानने वालों की लिए सिंगोल आने यानी राज डंडा संदेश बहुत साफ है.
अब सवाल उठता है कि लोकतंत्र के इस अंधेर गर्दी की आंधी में शुतुरमुर्ग मरुस्थल के रेत में या तो सिर छुपा ले अथवा संघर्ष के लिए खड़ा हो जाए…. क्योंकि साफ है सांप्रदायिकता और जातिवाद राज दंड के हिसाब से चलाया जाएगा… कहने को तो कहा जाएगा इस यह सबका-साथ सबका-विकास और सबका-विश्वास है किंतु वास्तव में यह पूरी तरह से उनके मन की बात है और कुछ नहीं…..
है ना, यही पहले चरण का प्रत्यक्षम् किम प्रमाणम …?

