लालपुर का हवाईअड्डा, बनेगा चुनाव का प्रोपेगंडा…….?- त्रिलोकीनाथ

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शहडोलprime minister modi will be welcomed by adivasi tradition in madhya pradesh  - आदिवासी परंपरा से होगा पीएम का स्वागत, ऐसा है मध्य प्रदेश पहुंचने का  कार्यक्रम-आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका से वापस लौट आएंगे, उनकी अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिका ने भारत के पड़ोसी चीन के बढ़ते तनाव हो को खत्म करने के लिए अपने विदेश मंत्री को चीन भेजा था और दोनों की यात्राओं के संयोग के दौरान अमेरिका के अपने हित, उनकी विदेश नीति; उस पर सफलतापूर्वक काम कर रही थी. भारत लौटने के बाद  27  तारीख को नरेंद्र मोदी शहडोल के लालपुर हवाई अड्डे में आएंगे, जहां से क्षेत्र के  जनजाति समाज के प्रतिनिधियों से मिलकर उनके साथ खाना पीना खा सकते हैं और उनके स्वास्थ्य के बारे में और उनकी हित के बारे में कुछ संदेश दें सकते हैं.

————————–त्रिलोकीनाथ—————————–

इसके पहले भी जब गुजरात में विधानसभा का चुनाव चल रहा था उस वक्त भारत की राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू जो उड़ीसा के आदिवासी समाज से आती हैं वह शहडोल के इसी लालपुर हवाई अड्डे में आई थी. और मध्यपदेश में दूसरी बार विशेष आदिवासी क्षेत्र में लागू होने वाले संविधान की पांचवी अनुसूची के अंतर्गत पेसा एक्ट को लागू करने की घोषणा की थी. पहली बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इंदौर में इसकी घोषणा पहले कर चुके थे. स्वाभाविक है राष्ट्रपति जी का दौरा विधानसभा गुजरात के चुनाव के मद्देनजर रखा गया था. ताकि साफ संदेश जाए याद आदिवासी समाज के लिए मोदी सरकार के दौर की राष्ट्रपति आदिवासी हित में निर्णय ले रही हैं. चुनाव गुजरात में भाजपा को जबरदस्त जीत मिली.

बात कर रहे थे प्रधानमंत्री जी के लालपुर हवाई अड्डे में आने की इसी लालपुर हवाई अड्डे में जो वास्तव में अब हवाई अड्डा नहीं रहा है कभी शहडोल आदिवासी क्षेत्र के  इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट का चेहरा बना, ओरियट पेपर मिल्स के मालिकों के उतरने के लिए यह ओपियम का हवाई अड्डा था अब  इसकी लीज (पट्टा) खत्म हो गया है. कुछ दिन पहले इस हवाई अड्डे में मध्य प्रदेश सरकार अपना टेंपरेरी खाद्यान्न गोदाम( स्टॉक यार्ड)बना कर रखी थी. बहरहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां से आदिवासियों के हित में उनके साथ और बैठकर संदेश देने का प्रयास करेंगे कि मध्य प्रदेश के चुनाव में उनकी सरकार कितना अच्छा काम कर रही है ,ताकि आने वाले चुनाव में उन्हें वोट दिया जा सके.

कुल मिलाकर चुनाव के धंधे के हिसाब से पूरी यात्रा चुनाव प्रचार के उद्देश्य से सुनिश्चित की गई है, क्योंकि कुछ दिन पहले कांग्रेश की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी जबलपुर में अपना जलवा दिखा चुकी हैं ,उनके जलवे के मद्देनजर ही यह यात्रा सुनिश्चित की गई है. हो सकता है इस यात्रा के पीछे मणिपुर के आदिवासी विशेष क्षेत्र जो अभी अघोषित हैं उन्हें भी ठीक करने का काम किया जाए. जहां पिछले 2 माह से जाति-समाज की हिंसा की आग लगी हुई है और इस आग में सिर्फ अभी तक करीब सवा सौ लोग ही मरे हैं. यह आग तब लगी थी जब कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव के दौरान भगवान बजरंगबली को वोट डालने के लिए उपयोग किए थे ,कि बजरंगबली बोलकर चुनाव का बटन दबाया जाए और बजरंगबली पाला बदल दिए थे. जिससे कांग्रेस चुनाव जीत गई थी . उनके अनुसार ऐसा कहा जा सकता है.

बात चल रही थी की शहडोल के आदिवासियों के साथ उठ बैठ कर मणिपुर की आदिवासी क्षेत्र के हिंसा कि आपको कैसे बुझाया जाएगा…? अगर 2 महीने पहले बजरंगबली को ही मणिपुर भेज दिया जाता तो आज जलता हुआ मणिपुर कुछ ठंडा हो सकता था जहां भाजपा की सरकार है, किंतु प्रधानमंत्री जी को मालूम है उनकी पवित्र सरकार जो भी कुछ कर रही होगी सब कुछ पवित्र उद्देश्य के लिए ही है. इसलिए वे पूरी दुनिया घूम आए किंतु मणिपुर नहीं गए हैं . यह उनका कॉन्फिडेंस ही है किंतु आदिवासी विशेष क्षेत्र शहडोल में जनजाति समाज के साथ अगर पे बैठ रहे हैं तो मणिपुर तो बहुत दूर है..?

प्रधानमंत्री को यह जरूर स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रपति जी के आने के बाद और पेशा एक्ट लागू होने के बाद कुल कितना लोगों को पेसा एक्ट  से संरक्षण मिला है…? उम्मीद करना चाहिए उनके भाषण में इसका समावेश दिखेगा. आदिवासी विशेष क्षेत्र शहडोल कहने को तो आदिवासी है किंतु रिलायंस इंडस्ट्रीज जो क्षेत्र में सीबीएम गैस निकालने का काम कर रही है अयोग्य खनिज अधिकारी की लापरवाही के कारण अभी तक बिना अनुबंध किए ही खनिज संसाधन गैस का निकासी कर रही है…. जो आदिवासी विशेष क्षेत्र की बड़ा प्राकृतिक संसाधन है जिसमें आदिवासियों का उत्थान की संपूर्ण संभावना है  सबका विकास- सबका साथ और सबका विश्वास के लिए इस आदिवासी विशेष क्षेत्र के संसाधन को ही अगर आधार मान लिया जाता तो इस क्षेत्र की गरीबी को खत्म करने का पूरा ढांचा खड़ा किया जा सकता था. लेकिन जिस प्रकार से इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के नाम पर ओरियंट पेपर मिल को स्थापित किया गया और अरबों रुपए का संसाधन का उपयोग हुआ पूरी की पूरी सोन नदी.. पूरा जंगल लगभग समाप्त हो गया उस दौर का इसके बाद भी आदिवासियों के लिए पेपर मिल आज भी विदेशी ही है…

यह सरकारी रिकॉर्ड ही चिल्लाते हैं की ओरियंट पेपर मिल जिस गांव में स्थापित है वह गांव बकहो और साबो मैं अगर मिलाकर देखा जाए तो सर्वाधिक गरीबी के प्रमाण पत्र दैनिक गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की बसाहट होगी और उसका लाभ प्रधानमंत्री मोदी के लाभार्थी ले रहे होंगे, तो विकास और विश्वास पिछले 40 साल में प्राकृतिक संसाधनों की लूट के साथ लगभग धराशाई हो चुका है… उम्मीद करना चाहिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस आदिवासी विशेष क्षेत्र की लूट के इस प्रमाण पत्र के जरिए भारत के तमाम आदिवासी क्षेत्रों में उद्योगपतियों की लूट का पोल खोलेंगे… उम्मीद यह भी करना चाहिए कि उनके मित्र मुकेश अंबानी की इंडस्ट्रीज रिलायंस इंडस्ट्रीज जिसका अनुबंध इस आदिवासी विशेष क्षेत्र में गैस खनन के लिए अयोग्य खनिज अधिकारी के कारण नहीं हो पाया है उसकी प्रोसेस भी चालू करा दी जाएगी….? क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जो कभी पर्यावरण मंत्री भी रहे केंद्र सरकार में उन्होंने अपनी पिछली शहडोल दौरे में कहा था कि जब उनकी सरकार आएगी वह रिलायंस इंडस्ट्रीज का खनिज अनुबंध कराएंगे…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कमलनाथ से ताकतवर  है उन्हें अपने इस दौरे में इसकी घोषणा करनी चाहिए इसकी भी उम्मीद इस आदिवासी विशेष क्षेत्र को है.. आखिर बिना अनुबंध के यानी बिना किसी एग्रीमेंट के अगर रिलायंस इंडस्ट्रीज गैस खनन का काम कर रही है तो उससे  होने वाली तमाम दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी होगी……? आदि-आदि इन अनुबंधों पर लिखा रहता है या फिर उसे अनदेखा किया जाएगा…? UP: मथुरा में रेत माफिया की गुंडागर्दी, दरोगा पर बालू से भरी ट्रैक्टर  ट्रॉली चढ़ाने की कोशिश, 3 लोग गिरफ्तार | mathura three arrested attack on  police personal during ...रही बात आदिवासी विशेष क्षेत्र शहडोल के प्राकृतिक संसाधनों की उपयोगिता की जोकि विशेषकर रेत खनिज संसाधन के मामले में खुली माफिया गिरी का हिस्सा बन चुका है और अब उनकी राज्य सरकार नीतिगत तरीके से आदिवासी विशेष क्षेत्र में गैर आदिवासी विशेष क्षेत्र के खनिज माफिया के लोगों के लिए गलत रेत खनिज नीति बनाकर नदियों से सीधे मशीन के जरिए खनिज संसाधन निकालने की नीति बना ली है. इसी तरह माफिया के कितने लोग यहां कब काम करेंगे कब चले जाएंगे उनकी सूची ना तो ग्राम सभाओं को दी जाती है और ना ही थाने पुलिस को… अब जबकि नई नीति बन गई है जिसमें कहा गया है की स्थानीय मजदूरों को रेत खनिज में लगाए जाने की बाध्यता भी खत्म कर दी गई है इससे से बाहर का रेतमाफिया ठेकेदारी की आड़ में आकर नदी समाज के साथ नंगा नाच करेगा उस पर भी प्रधानमंत्री को आदिवासी क्षेत्र के हित में बोलना चाहिए कि आखिर आदिवासी विशेष क्षेत्र के लोगों को उनके प्राकृतिक संसाधन में पहला हक क्यों नहीं मिलना चाहिए….?

ताकि गरीबी दूर की जा सके अथवा लाभार्थी वोट बैंक बढ़ाने की नीति पर भाई कुछ भाषा हो सकेगा इसमें उम्मीद करना चाहिए. बहरहाल प्रधानमंत्री जी के आने से  नर्मदा नदी और माफिया गिरी में बर्बाद हो रहीसोन नदी के संरक्षण पर भी प्रधानमंत्री जी का संभाषण होगा.. उम्मीद करनी चाहिए….. क्योंकि आदिवासी जनजातियों के साथ खाना पीना खाकर और बैठकर वक्त बिताने के साथ अगर इन बातों पर इमानदारी से कोई चर्चा नहीं होती है प्रधानमंत्री जी का यह दौरा सिर्फ पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा के अलावा कुछ साबित नहीं होने वाला, ऐसे में जबकि प्रधानमंत्री अपने विदेश यात्रा के अनुभव से जब आदिवासी विशेष क्षेत्र में प्रवास पर रहेंगे आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए आदिवासी विशेष क्षेत्र की प्राकृतिक संसाधन पर्यावरण संरक्षण और परिस्थितिकी पर एक ईमानदारी पूर्ण कार्यक्रम घोषित होगा ऐसी भी उम्मीद हमें क्यों नहीं करनी चाहिए राजनीति और चुनावी वोट बैंक के अलावा आखिर भी हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री जो हैं।


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