चुनाव सर पर, अफसर लगे ट्रांसफर-पोस्टिंग-सेटलमेंट में

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 केंद्रीय बैंक में एक मुस्त लेम्स मैनेजर और सेल्समैन को स्थाई नियुक्ति देने के लिए चर्चा है  लाखो की राशि एकत्र की जा रही है जहां पर दी गई राशि के बीच में अब विवाद भी खड़ा हो गया है क्योंकि कुछ लोगों की राशि लेने के बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं की जा रही हैयह सही है कि मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी नहीं हुई है किंतु जिस प्रकार से चुनाव आयोग ने पत्र भेजकर के अधिकारियों के स्थानांतरण पर एक प्रकार से रोक लगाने का काम किया है

उससे यह साबित हो जाता है की विधानसभा चुनाव 6 जनवरी के पूर्व सुनिश्चित किया जाना है यानी एक प्रकार से चुनाव की घोषणा अनौपचारिक कर दी गई है । अधिकारियों के स्थानांतरण मुद्दे पर जारी की गई पत्र नैतिक रूप से सभी स्थानांतरण और नियुक्ति पर रोक लग जाना चाहिए। किंतु जमीनी तौर पर उसका उल्टा हो रहा है जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री मुखिया बनाकर मनमानी तरीके से स्थानांतरण किए गए हैं तो शहडोल जिले में तो एक तृतीय वर्ग कर्मचारी को अफसर बनाकर महाअफसर बना दिया गया और वह आदिम जाति कल्याण विभाग में।

एक एक व्यक्ति का अलग-अलग आदेश जारी कर रहा है। खबर यह है की कम से कम ₹50,000 स्थानांतरण का बाजार खुला  है जो प्रभारी मंत्री के इलेक्शन फंड का हिस्सा बताया जा रहा है। तो दूसरी तरफ

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में एक मुस्त लेंस मैनेजर और सेल्समैन को स्थाई नियुक्ति देने के लिए  लाखो की राशि एकत्र की जा रही है जहां पर दी गई राशि के बीच में अब विवाद भी खड़ा हो गया है क्योंकि कुछ लोगों की राशि लेने के बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं की जा रही है। सहकारी बैंक मैनेजर एस के यादव ने कहा”में उक्त  प्रक्रिया की लिस्टअभी तैयार नहीं हुई है” इस प्रक्रिया को रूप देने वाले हैं प्रमुख के पयासी मानते है की वर्षों सहकारिता में काम करने के बाद हर सरकारी कर्मचारी का हक होता है कि वह स्थाई नियुक्ति पावे और इसी प्रक्रिया पर काम चल रहा है किंतु श्री पयासी विधानसभा चुनाव के पहले चुनाव आयोग ने लगभग तिथि सुनिश्चित कर दी है। इस प्रकार से जो भी ड्यूटी करेंगे उसे जस्टिफाइड नहीं कर पा रहे हैं

बहरहाल देखना होगा कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र को पढ़ते हुए इस ट्रांसफर और पोस्टिंग के धंधे में कौन कितना पारदर्शी १ धंधा कर पा रहा है फिलहाल मतदान की घोषणा नहीं हुई है इसलिए इसे वह ऐसे भ्रष्टाचार के लिए आरक्षण भी मानते हैं।


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