
शहडोल मणिपुर हिंसा की लपट आदिवासी बाहुल्य जिला शहडोल में भी देखी गई इस पर अवश्य समाज के लोगों में राष्ट्रपति के नाम से ज्ञापन सौंपकर आदिवासी के विरुद्ध ज्ञापन दिया उन्होंने कहा हमारा देश गांवों का देश है जहां लगभग 18 करोड़ आदिवासी निवासरत हैं। जिन पर आए दिन अत्याचार, संवैधानिक अधिकारों के हनन की जानकारी प्रिंट, इलेक्ट्रानिक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से अन्याय अत्याचार की खबरें प्राप्त हो रहे है। देश के प्रथम नागरिक संविधान के संरक्षक से आकृष्ट कराते हुए समाधान चाहते आदिवासी समाज ज्ञापन के मांगे में मणिपुर राज्य में एक आदिवासी समुदाय से दूसरे आदिवासी समुदाय से लड़ाने के षडयंत्र एवं तत्काल में घटित मणिपुर राज्य में आदिवासी महिलाओ के साथ अमानवीय कृत्य करने वाले दोषियों एवं षडयंत्रकारियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाय।
आदिवासीयों को कभी बांध निर्माण, सड़क निर्माण अभ्यारण निर्माण के नाम पर विस्थापन रोका जाये।
भारत सरकार द्वारा लाये जा रहे यू. सी. सी. (समान नागरिक सहिता) कानून लागू होने से आदिवासियों को पांचवी, छटवी अनुसूची में प्राप्त संवैधानिक अधिकार समाप्त हो जायेगे इस कानून के लागू न किया जाये। देश मे डी-लिस्टिंग जैसे कानून तैयार न किया जाए इससे एक समुदाय से दूसरे समुदाय के बीच विवाद पैदा होंगे जो राष्ट्रीय एकता में बाधक है।
देश के शासकीय संशाधनों के निजीकरण बंद हो । 5वी, अनुसूचित क्षेत्र वाले जिलों में निवासरत आदिवासियों के जमीनों को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त रखा जाये। देश में कानून संविधान का पूर्ण रूपेण पालन हो आदिवासियों पर हो रहे शोषण एवं अत्याचार तत्काल बंद किया जाये।
शहडोल जिला आदिवासी बाहूल्य जिला है जो 5वी अनुसूची के अन्तर्गत आता है किन्तु यहां आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को दरकिनार करते हुए शोषण एवं अत्याचार किया जा रहा है ज्ञापन के माध्यम से ध्यान आकृष्ट कराते हुए समाधान चाहते है।
जिले में आदिवासियों के जमीन पर गैर आदिवासीयों का कब्जा, शहर एवं शहरों से लगे ग्रामीण क्षेत्र जैसे चापा, कल्याणपुर, पिपरिया, धुरवार, मे बहुतायत संख्या में गैर आदिवासी अपने मजदूरों आदिवासीयों के नाम से जमीन खरीद कर षडयंत्र तरीके.से शोषण किया जा रहा है जिस पर समाज कार्यवाही की मांग करता है।
विभिन्न विभागों में पदस्थ आदिवासी अधिकारी / कर्मचारीयों के साथ जातिगत भेदभाव रवैया से उनका स्थानान्तरण व प्रभार जूनियर व्यक्ति को दे दिया जाता है। वर्तमान में हुए राजस्व विभाग में प्रशासकीय 14 स्थानान्तरणों में 11 आदिवासी
पटवारियों का किया गया है। जो इसका जीता जागता उदाहरण है

