चंद्रयान 3 के चंद्रमा पर उतरने के पहले शहडोल में महाराज राव शिवराज ने कथित तौर पर एक और घोषणा कर दी की लालपुर में हवाई अड्डा बनाया जाएगा।
जब हम चंद्रमा पर उतरे, यंत्र के माध्यम से तब लगा की इसी लालपुर हवाई अड्डे से चढ़कर हम चंद्रमा में घूमा करेंगे क्योंकि वह हमारे मां का घर है, ऐसा बचपन में हमें बताया गया की–
” चंदा मामा दूर के .. पुआ पकाए पूर के;
आप खाएं थाली में, मुन्नी को दे प्याली में..”
और लालपुर हवाई अड्डे से चढ़कर शाम के हम चंद्रमा में उतरने वाले थे गोधूलि बेला परत भी इसरो के पर्दे पर एक व्यक्ति का धुंधला चेहरा आया… हमारे प्रिय जन ने कहा वह एलियन आ गया हम भी गंभीर हो गए… क्या सचमुच में एलियन दिख रहा है…? बाद में पता चला नहीं वह तो प्रधानमंत्री थे। नरेंद्र मोदी पिछली बार इसी इसरो में चंद्रयान-2 के वक्त साक्षात प्रकट थे लेकिन दुर्भाग्य से चंद्रयान दो बुरी तरह से असफल हो गया । हमें भी डर लगने लगा की अंतिम चरणों में हमारा कॉन्फिडेंस कहीं खत्म ना हो जाए …?
—————————————-( त्रिलोकी नाथ)——————————————————-
और जब चंद्रयान 3 चंद्रमा पर लैंड हुआ यानी पधार गया तब आत्मिक खुशी हुई की चंद्रमा के प्रकाश को हम निजी तौर पर कैसे अनुभव करेंगे… क्योंकि अब तक उनके प्रकाश से प्रकाशित हमारी अध्यात्मिक शक्ति हमेशा हजारों साल पहले से हमें प्रकाशित करती रही है… वृंदावन के वास्तविक संत सन्यासी प्रेमानंद जी महाराज इस समय साक्षात प्रकाश मय है
जो आध्यात्मिक विज्ञान के महान वैज्ञानिक के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्होंने चंद्र-चकोरी की बात को विरासत से परिभाषित किया है , कि कैसे हम हजारों साल से चंद्रमा और चकोर की तरह एक दूसरे के लिए समर्पित रहे हैं। और अपना लाइव कनेक्शंस बना कर रखें। आध्यात्मिक विज्ञान में आध्यात्मिक ऊर्जा के सहारे हम चंद्रमा से हजारों साल से जुड़े रहे। प्रिया-प्रीतम के साथ भाई और बहन के शिकवा शिकायत भी चंद्रमा के माध्यम से होता रहा है ।
तो चंद्रमा हमारा पुराना रिश्तेदार है जो अब तक पवित्रता के संबंध को परिभाषित करता रहा 23 अगस्त 2023 को गोधूलि बेला पर आधुनिक विज्ञानयंत्र के सहारे हम चंदा मामा के घर पहुंच गए हैं
हमें कितना प्यार दुलार मिलता है यह हम कितना प्यार दुलार कर पाते हैं यह हमारे यानी पृथ्वी वासी और चंद्रमावासी जीव तत्वों पर निर्भर करेगा ..? प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी अपनी शुभकामनाएं अपने अंदाज में लोगों को दिए हैं। हमें भी आशा करना चाहिए कि जैसे हम आदिवासी क्षेत्र सघन वन क्षेत्र विरासत की प्राकृतिक क्षमता से भरपूर शहडोल को बीते 75 साल में कितना बचा पाए इस तरह का विकास कितना शाप ग्रस्त है। हमें भी यह लगातार मंथन करते रहना चाहिए।
अन्यथा इस क्षेत्र में ओपीएम के मालिकों ने अपनी सुविधा के लिए जो लालपुर में हवाई अड्डा बना रखा था लेकिन जमीन की लीज यानी पट्टा समाप्त होने के साथ भाजपा सरकार ने उसे अनाज भंडारण के लिए इस्तेमाल करके यह प्रमाणित किया कि हम हैं तो अंततः आदिवासी ही हैं अब चुनाव आने वाला तो थोड़ा सा लीपापोती करके अगर लालपुर को हवाई अड्डे को फिर से हवाई अड्डा बना दिया जाए तो क्या बुराई है..? भ्रष्टाचार के अवसर भी होंगे और हम यहां से चंद्रमा भी पहुंच जाएंगे यानी सपना की दुनिया में एक और उड़ान मैं होगी… यही मुंगेरीलाल का सपना भी है। फिलहाल मानव सभ्यता के विकास क्रम में भारत भूमि से चंद्रमा की सतह पर उतरने के इस ऐतिहासिक अवसर में चंद्रमा पर यंत्र के सहारे सुनहरे सपने के संसार दिखाने और देखने वालों को बहुत-बहुत बधाई।




