
भोपाल : रविवार, सितम्बर 17ऐसे परिवार, जिनके आवेदन प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण अंतर्गत आवास प्लस एप पोर्टल पर स्वतः रिजेक्ट हो चुके हैं। ऐसे परिवार, जो भारत सरकार के एमआईएस पोर्टल पर दर्ज होने से छूट गए हैं। ऐसे परिवार जो सामाजिक, आर्थिक एवं जातिगत जनगणना 2011 एवं आवास प्लस की सूची में शामिल नहीं हैं तथा उन्हें किसी भी सरकारी योजना में आवास नहीं मिला है। योजना में ऐसे परिवार भी शामिल होंगे जिनके पास पक्की छत वाले मकान नहीं है अथवा जो दो कमरों तक के कच्चे मकानों में निवासरत है। ऐसे परिवार जिनकी मासिक आय 12 हजार रु से कम है तथा परिवार का कोई भी सदस्य आयकर दाता नहीं है।2.5 एकड़ या इससे अधिक सिंचित और 5 एकड़ से अधिक और असिंचित कृषि भूमि होने पर इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे। जिन परिवारों के पास मोटर युक्त चौपहिया वाहन है वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। परिवारका कोई सदस्य शासकीय सेवा में हो, तो भी इस योजना की पात्रता नहीं होगी।
आवेदन की प्रक्रियायोजना से संबंधित आवेदन फॉर्म जनपद पंचायतों द्वारा ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराये जायेंगे। ग्राम पंचायत द्वारा 5 अक्टूबर, 2023 तक आवेदन प्राप्त किये जाएंगे। पात्र आवेदक ग्राम पंचायत में फॉर्म भरकर जमा कर पंचायत सचिव / ग्राम रोजगार सहायक से पावती प्राप्त करेंगे।आवश्यक दस्तावेज में समग्र आईडी, आधार नम्बर, बैंक खाता, मनरेगा जॉब कार्ड (यदि उपलब्ध हो), लाड़ली बहना योजना का पंजीयन क्रमांक (केवल लाड़ली बहनों के लिए) है। इन सभी दस्तावेजों को आवेदक को स्वयं सत्यापित करना होगा, किसी अन्य से सत्यापित कराने की आवश्यकता नहीं हैं।
जिला जेल शहडोल में हुआ
जिला जेल शहडोल में हुआ विधिक जागरूकता शिविर
शहडोल : शुक्रवार, सितम्बर 15, 2023, 16:45 IST

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शहडोल श्री महेन्द्र कुमार जैन के मार्गदर्शन में एवं जिला न्यायाधीश तथा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती निशा विश्वकर्मा की अध्यक्षता एवं उपस्थिति में जिला जेल शहडोल में निरूद्ध विचाराधीन बंदियों के मध्य बंदियों के अधिकार एवं प्लीबारगेनिंग विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं जेल का निरीक्षण किया गया। विचाराधीन बंदियों को संबोधित करते हुए श्रीमती निशा विश्वकर्मा ने कहा कि जेल में निरूद्ध समस्त बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान किये जाने के लिये जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सदैव तत्पर है। प्राधिकरण का उद्देश्य असहाय एवं जेल में निरुद्ध पुरुष और महिलाओं को निः शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना है। शिविर में बंदियों को विधिक सहायता प्राप्त करने के अधिकार से अवगत कराते हुये प्लीबारगेनिंग की प्रक्रिया विचाराधीन बंदियों को समझाई गई। बंदियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी बंदी के पास अधिवक्ता की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अपने मुकदमें की पैरवी के लिए निःशुल्क अधिवक्ता की सुविधा प्रदान की जाती है। जेल में लीगल एड क्लीनिक की स्थापना की गई है जिससे किसी बंदी को कोई समस्या हो तो वह जेल में स्थापित लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है। इसी तारतम्य में शिविर को आगे बढ़ाते हुए जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री अमित शर्मा द्वारा जिला जेल शहडोल में उपस्थित बंदियों को वैकल्पिक न्याय समाधान के तरीकों जैसे मीडिएशन, लोक अदालत की विस्तृत जानकारी दी गई। शिविर के उपरांत न्यायाधीश के द्वारा पुरूष एवं महिला बैरक का निरीक्षण किया गया। शिविर में जेल अधीक्षक श्री भास्कर पाण्डेय, जेल सहायक अधीक्षक श्री गणेश सिंह तथा लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के अधिवक्तागण श्री कुंज बिहारी द्विवेदी, श्री रामशंकर तिवारी, श्री इमरान खान, सुश्री अंकिता सिंह परिहार, सुश्री प्रिया सिंह बघेल सहित श्री सूरज सिंह एवम समस्त जेल स्टाफ उपस्थित रहे।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शहडोल महेन्द्र कुमार जैन के मार्गदर्शन में एवं जिला न्यायाधीश तथा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती निशा विश्वकर्मा की अध्यक्षता एवं उपस्थिति में जिला जेल शहडोल में निरूद्ध विचाराधीन बंदियों के मध्य बंदियों के अधिकार एवं प्लीबारगेनिंग विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं जेल का निरीक्षण किया गया। विचाराधीन बंदियों को संबोधित करते हुए श्रीमती निशा विश्वकर्मा ने कहा कि जेल में निरूद्ध समस्त बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान किये जाने के लिये जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सदैव तत्पर है। प्राधिकरण का उद्देश्य असहाय एवं जेल में निरुद्ध पुरुष और महिलाओं को निः शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना है। शिविर में बंदियों को विधिक सहायता प्राप्त करने के अधिकार से अवगत कराते हुये प्लीबारगेनिंग की प्रक्रिया विचाराधीन बंदियों को समझाई गई। बंदियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी बंदी के पास अधिवक्ता की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अपने मुकदमें की पैरवी के लिए निःशुल्क अधिवक्ता की सुविधा प्रदान की जाती है। जेल में लीगल एड क्लीनिक की स्थापना की गई है जिससे किसी बंदी को कोई समस्या हो तो वह जेल में स्थापित लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है। इसी तारतम्य में शिविर को आगे बढ़ाते हुए जिला विधिक सहायता अधिकारी अमित शर्मा द्वारा जिला जेल शहडोल में उपस्थित बंदियों को वैकल्पिक न्याय समाधान के तरीकों जैसे मीडिएशन, लोक अदालत की विस्तृत जानकारी दी गई। शिविर के उपरांत न्यायाधीश के द्वारा पुरूष एवं महिला बैरक का निरीक्षण किया गया। शिविर में जेल अधीक्षक भास्कर पाण्डेय, जेल सहायक अधीक्षक गणेश सिंह तथा लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के अधिवक्तागण एवम समस्त जेल स्टाफ उपस्थित रहे।

