
आध्यात्मिक की ताकतसे भारत को एक करते 21वीं शदीं के बाबा प्रेमानंद
हिंदू मुस्लिम और सांप्रदायिक सद्भावना को नष्ट करने के जब पूरे प्रयास हमारी राजनीति बहुत बुरी तरह से वोट के धंधे को बनाए रखने के लिए सत्ता में कब्जा बनाए रखने के लिए भारतीय धारा को तार तार करनेपर उतारू हैऔर एक प्रकार कीचरम परिणीति की ओर बढ़ रही हैऔर इस दौर में जब राजनीति की धारा में नफरत की दुकान,मोहब्बत की बाजार,जैसे शब्द श्रृंखला आकर्षण के केंद्र बन जाते हैं .उसे आगे बढ़ाने के लिए किसी नौजवान राहुल गांधी को करीब साढे 3500 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती हो,इस दौर में कोई दोनों किडनी का फेलियर ब्रह्मचारी वृंदावन में बैठकर एक कमरे के अंदर से पूरे विश्व को प्यार का संदेश दे रहा हो और वह संदेश न सिर्फ सुना जा रहा है बल्कि मनन भी किया जा रहा है और उसकी तरंगे असर भी डाल रही है,यह अपने आप में एक आश्चर्य में भारतीय प्रयोग है |यही उसकी सनातन की प्रवाहित मूल धारा है ,वृंदावन के बाबा प्रेमानंद इस प्रेम धारा की स्रोत बने हुए हैं…
…………………………..त्रिलोकी नाथ…………………………………..
पहले तो इनकी धारा प्रवाह में वह सिख समुदाय जो की हिंदू मुस्लिम सिख इसाई…जैसी नारों में हिंदू और सिख पृथक पृथक संप्रदाय के रूप मेंअलग करके दिखाए गए उन्हें एक जाकर कर दिया और कई सिख समुदायऔर उसे पथ कोअपनी आध्यात्मिक उत्थान देखने वाला सिख समाज बाबा प्रेमानंद में अपने गुरुवाणी का दर्शन करने लगा क्योंकि बाबा प्रेमानंद उनकी गुरबाणी में अपने ईश्वर को देखते है.
बाबा प्रेमानंद का यह चमत्कार ही था की लंबे समय से हिंदू और सिख जो एक ही परंपरा से निकले हुएऔर राजनीति की धारा में पृथक कर दिए गए समाज एक जाकर हो चुके तथा किसी राधा वल्लभ संप्रदाय के हिंदू सनातन आध्यात्मिक के अनुयाई में अपना आदर्श ढूंढने लगे थे यहां तक तो बात समझ में आती थी क्योंकि वस्तुतः सिखधर्म हिंदू धर्म का ही एकहिस्सा है किंतु आज जब एक एक मुस्लिम फकीर वृंदावन में बाबा प्रेमानंद के एकांतिक सभा मेंआकर अपने आध्यात्मिक आस्था का भविष्य देख रहा था उससे दो पृथक पृथक धार्मिक संप्रदाय हिंदू और मुस्लिम समाज में ईश्वर एक है, स्थापित हो रहा था…..
इसे देखकर जितना वह मुस्लिम फकीर उत्साहित था उतना ही बाबा प्रेमानंद अपने ईश्वर को उसके धर्म में स्थापित कर रहे थे कि इस्लाम धर्म का मूल भावना इस प्यार और मोहब्बत को आगे बढ़ने का है जिसे भगवान श्री कृष्णा की प्यार प्रवाह राधा जी की साकार रूप में प्रवाहित हो रही यह बात हो सकता है सांप्रदायिक बंटवारे में अपने राजनीति के अस्तित्व को तलाशने वालों के लिए एक खतरनाक भविष्य का संकेत हो क्योंकि राजनीति का अस्तित्व ही सांप्रदायिकता और नफरत की बुनियाद पर टिका हो वह फिर चाहे कैसा भी लोकतंत्र हो इस देश के लिए अत्यंत खतरनाक है
वृंदावन के इस महान संत ने वह कर दिखाने का प्रयास अपने ब्रह्मचर्य जीवन से स्थापित किया है जो महात्मा गांधी ने अपने सामाजिक जीवन में रह कर दिखाया था. 21वीं शदी में ऐसे महान संत के युग पुरुष कहलाए जाने चाहिए .यह अलग बात है की यह हिंदू सनातन आध्यात्मिक परिवेश में परमार्थ की भावना में निकले प्रेमानंद बाबा भारत की आध्यात्मिक शक्ति का मूर्ति मान स्वरूप है. जो अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रवाह से अपने शरीर में अत्यंत कष्टदायी किडनी के खराब हो जाने के बावजूद भी अत्यंत स्वस्थ व्यक्ति से ज्यादा स्वस्थ और मदमस्त आनंद स्वरूप में डूबे रहते हैं जिन्हें देखकर सुनकर या समझ कर यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि वह किडनी की बीमारी से प्रभावित कोई व्यक्ति हैं.
इस महान व्यक्ति ने देश की आजादी के बाद भारत जैसे भटके हुए देश में युवा बच्चों के लिए सेक्स शिक्षा के लिए सबसे बड़े उदाहरण बने हुए हैं जो खुलकर उम्र के बदलाव में किशोर अवस्था में जो आपराधिक और पतित यौन संबंधी परिस्थितियों पैदा होती हैं उसे पर वह पूरा प्रकाश डालते हैं उनके इस प्रकाशमान प्रवचनों को भारत के कई स्कूलों ने अपने यहां नियमित पाठ का हिस्सा भी बना रखा है ताकि बच्चों की सेक्स संबंधी शिक्षाको उसकी आध्यात्मिक भावनासे उसके ब्रह्मचर्य को बचाया जा सके.ताकि भारत का भविष्य खूबसूरत और स्वस्थ युवकों का बन सके.
क्योंकि भारतीय राजनीति ने अपने विकास की धारा में ब्रह्मचर्य और सेक्स शिक्षा पर सिर्फ मजाक किया है और ऐसे प्रयोग किया है जिससे बच्चों के विकास क्रम में शारीरिक बदलाव में उसे कोई भी व्यक्ति यौन शिक्षा पर खुलकर उसकी और उससे होने वाले लाभ की प्रभावों पर खुली चर्चा नहीं करता. बाबा प्रेमानंद इन सब मामलों पर बहुत ही दयनीय और बंदिनीय तथा विनीत भाव से बच्चों को समझने का प्रयास करते हैं बहरहाल इस युग के इस महान बाबा ने8 नवंबर 2011 के एकांतिक2023 के एकांतिक वार्तालाप मेंजिस प्रकार से हिंदू-मुस्लिम और सिख को एक मंच पर अध्यात्म की मूल भावना से आनंद प्रवाहित करने का एक मंच प्रदान कर रहे हैं वह अद्भुत हैऔर परम प्रणाम योग भी है.निश्चित तौर पर हम सब के लिए यहभारत की भविष्य के लिए एक वरदान का दिन भी माना जाना चाहिए.परम पूज्य बाबा को बारंबार प्रणाम.

