
उपमुख्यमंत्री देवड़ा के घोषणा के बाद शहडोल के आदिवासी विभाग में एक प्रकार की हलचल मची हुई है,जो एक तृतीय वर्ग कर्मचारी अंसारी को सहायक आयुक्त बना करके तत्कालीन कलेक्टर द्वारा करोड़ों रुपए का वारान्हारा किया गया था..इस अनियमित भुगतानके लिए तृतीय वर्ग कर्मचारी अंसारी को शहडोल आदिवासी विभाग का सहायक आयुक्त बनाया ही नहीं बनाया गया बल्कि उसके द्वारा 8 करोड़ रुपए भी ज्यादा का लंबित और विवादित भुगतान एक निजी स्कूलों को कर दिया गया जिसमें करोड़ों रुपए का बंदरबाट पारदर्शी तरीके से किया गया था
|कलेक्टर द्वारा एक तृतीय कर्मचारियों को आहरण का अधिकार कैसे दिया जा सकता है..? और उससे भी ज्यादा इस अनियमित वित्तीय अराजकता के लिए तत्कालीन अधिकारी ने कलेक्टर के साथ मिलकर के एक बड़ा खेल किया था उसे वक्त तृतीय वर्ग कर्मचारियों ने कहा कि जो भी कलेक्टर ने किया मैं उसका सिर्फ पालन कर रहा हूं. मेरी इसमें कोई भूमिका नहीं है .वास्तव में कर्मचारी अच्छी तरह से जानता था कि यह पारदर्शी भ्रष्टाचार वित्तीय अराजकता का उदाहरण है. इसके बावजूद भीउसनेभ्रष्टाचार की बह रही आदिवासी विभाग की गंगा में जाकर डुबकियां लगाई थी. इस धनराशि से उसने कई जगह कई प्लॉट भूमि के टुकड़े खरीदे व कर्मचारी अब यह तृतीय वर्ग कर्मचारीसेवानिवृत हो चुका है.
किंतु उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि पिछले 5 वर्ष की समस्त व्यक्ति पर गंभीरता से कार्रवाई होगी कि क्या आदिवासी विभाग में आदिवासी बच्चों के नाम पर जो करोड़ों रुपए का बंदरबाट शहडोल में हुआ है वह भी उपमुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार की रडार में शामिल होता है या नहीं…? कहा जाता है कि उपमुख्यमंत्री ने इस भ्रष्टाचार पर भी अपनी उंगली रख दी है , सवाल यह भी उठना है कि रिटायरमेंट के बाद उस तृतीय वर्ग कर्मचारी और उसे समय के तत्कालीन कलेक्टर और कोशलय अधिकारी के खिलाफ भी गंभीर कार्रवाई होगी अथवा यह भी एक नए प्रकार का भ्रष्टाचार बंदरबाट के रूप में खत्म हो जाएगा…? सहायक आयुक्त कार्यालय का यह भ्रष्टाचार एक मामूली सा उदाहरण है वास्तव में को सहायक आयुक्त बना करके अरबो रुपए का अनियमित आहरण कोषालय से किया गया .
बताया जाता है तब भोपाल स्तर से भी कलेक्टर को इस बात का दबाव दिया गया था की शहडोल में आदिवासियों के नाम पर स्कूल चल रही एक बड़ी संस्था को उसका फर्जी भुगतान कर दिया जाए…अब चुकी उपमुख्यमंत्री ने इस पर संज्ञान लिया है और बकायतें प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की है तो देखना होगा कि आदिवासी क्षेत्र शहडोल में आदिवासी बच्चों के नाम पर हुई खुली भ्रष्टाचार और लूट की इस बड़ी कार्यवाही पर उपमुख्यमंत्री कितनी गंभीरता से अपनी जवाब देही का निर्वहन करते हैं

