
शहडोल शिक्षा जगत में भ्रष्टाचार की आसमानी ऊंचाई शहडोल क्षेत्र में इस समय प्रकट हो रही है कन्या महाविद्यालय शहडोल की चर्चित प्राचार्य निलंबित कर दी गई हैं तो कन्या परिषर कंचनपुर में कब्जा करने की दृष्टिकोण से षड्यंत्र करने वाले विक्रम सिंह, मिथलेश और गोपी को आदिवासी विभाग ने वहां से हटा दिया है। बताया जाता है की आदिवासी विभाग के कन्या परिसर कंचनपुर में छात्र परिसर का मनमानी भ्रष्टाचार के लिए उपयोग करने के उद्देश्य से षड्यंत्र करके नई-नई घटनाएं अंजाम दी जा रही थी ताकि कन्या परिषर में नियमित रूप से चलने वाली व्यवस्था को दरकिनार करके षड्यंत्रकारी गिरोह को कब्जा मिल जाए किंतु समय रहते सक्षम अधिकारियों ने षड्यंत्रकारी के मन्सा को समझते हुए उन्हें वहां से चलता कर दिया है ।
शासकीय इंदिरागांधी कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर श्रीमती उषा नेहा को आज निलंबित कर दिया गया उन पर करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितताएं किए जाने का आरोप लगा है।मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव द्वारा जारी आदेश में उल्लेख किया गया हैकि डॉ. उषा नीलम, प्राचार्य, शासकीय इंदिरा गांधी कन्या महाविद्यालय, शहडोल द्वारा प्राचार्य के पद पर पदस्थी के दौरान महाविद्यालय में भ्रष्टाचार करने, जनभागीदारी मद से लगभग राशि रू. 13 करोड़ की वित्तीय अनियमितता की जाकर पद का दुरुपयोग कर नियम विरुद्ध कार्य करने, नियमविरुद्ध भर्ती कर उन्हें नियमित अध्ययन कराया जाकर शासन की छात्रवृत्ति का लाभ दिये जाने संबंधी शिकायत प्रथम दृष्ट्या सही पाई गई है ।
आदेश में कहा गया है कि डॉ. उषा नीलम, प्राचार्य, शासकीय इंदिरा गांधी कन्या महाविद्यालय, शहडोल के उक्त कृत्य म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत होने के कारण म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 (1) (क) के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है । निलंबनकाल में डॉ. उषा नीलम का मुख्यालय कार्यालय क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, जबलपुर संभाग, जबलपुर नियत रहेगा
भोपाल :जनजातीय कार्य विभाग के अधीन मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा तीन नई वित्तीय सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें से भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना और टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना के माध्यम से जनजातीय वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनके समग्र कल्याण के प्रयास किये जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम को ‘भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना’ में 31 जनवरी 2024 तक कुल 5 हजार 523 आवेदन मिले। इनमें से बैंकों द्वारा 716 आवेदन मंजूर कर 561 पात्र हितग्राहियों को 22 करोड़ 10 लाख 64 हजार 895 रूपये वित्तीय सहायता वितरित की जा चुकी है। केवल 155 प्रकरण वित्त सहायता वितरण की अंतिम प्रक्रिया में हैं। इस योजना में जनजातीय युवाओं को विनिर्माण गतिविधियों के लिए एक लाख से 50 लाख रूपये तथा सेवा व व्यवसाय गतिविधियों के लिए एक लाख से 25 लाख रूपये तक की वित्तीय सहायता बैंकों के माध्यम से दी जाती है। बैंक ऋण पर अधिकतम सात वर्षों के लिए पाँच प्रतिशत ब्याज अनुदान एवं बैंक गारंटी का भुगतान राज्य शासन द्वारा किया जाता है।
‘टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना’ में निगम को 31 जनवरी 2024 तक कुल 6 हजार 11 आवेदन मिले। बैंकों द्वारा 699 आवेदन मंजूर कर 490 पात्र हितग्राहियों को दो करोड़ 66 लाख 5 हजार 165 रूपये वितरित किये जा चुके हैं। सिर्फ 209 प्रकरण अंतिम निराकरण के लिए लंबित हैं। इस योजना में जनजातीय युवाओं को 10 हजार से एक लाख रूपए तक की स्व-रोज़गार परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता बैंकों के माध्यम से दी जाती है। बैंक ऋण पर अधिकतम पाँच वर्षों के लिए सात प्रतिशत ब्याज अनुदान एवं बैंक गारंटी राज्य शासन द्वारा दी जाती है।

